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प्रति व्यक्ति आय से 68 गुना अधिक वेतन लेते हैं सांसद

Wed, 18 Dec 2013 10:25 AM IST
प्रिया गौतम
प्रिया गौतम Updated Wed, 18 Dec 2013 10:25 AM IST
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MPs draws 68 percent more salary from average per capita income

‘इतना कम वेतन सांसदों का अपमान है।’ यह बात 20 अगस्त 2010 को सांसदों के मूल वेतन को लगभग तीन गुना करते वक्त लालू प्रसाद यादव ने कही थी और कुछ अन्य सांसदों ने भी इस पर हायतौबा की थी।

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आंकड़ों पर गौर करें तो वेतन के नाम पर हो-हल्ला करने वाले भारतीय सांसद देश की प्रति व्यक्ति आय से 68 गुना अधिक वेतन ले रहे हैं। यह बात अलग है कि संसदीय कार्यवाही में व्यवधान पैदा करके पिछले तीन वर्षों के नौ सत्रों में सांसद प्रस्तावित 94 फीसदी में से सिर्फ 23 फीसदी ही विधेयक पास कर पाए हैं।
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संसद, कार्यपालिका और न्यायपालिका पर मंगलवार को जारी की गई सातवीं सिटिजंस रिपोर्ट ऑन गवर्नेंस एंड डेवलपमेंट 2013 में नेशनल सोशल वॉच ने खुलासा किया है कि पिछले तीन सालों में लोकसभा में 577 और राज्य सभा में 442 घंटे हंगामे की भेंट चढ़ गए। वहीं दोनों सदनों में तारांकित सवालों के सिर्फ 10 फीसदी का ही जवाब दिया गया।
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लोकसभा में जहां कुल सांसद संख्या के 31 फीसदी पर आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं, वहीं 1952 से अब तक लोकसभा में छह फीसदी भागीदारी वाली महिलाओं में भी 17 फीसदी के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।

संसद की गिरती साख और ढीली कार्यवाही पर चिंता जताते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि 2011 से 2013 तक के नौ सत्रों में लंबित विधेयकों की संख्या दोगुनी हो गई है। राज्यसभा में 37 सालों से विधेयक लंबित पड़े हैं। इसके साथ ही जहां 58 फीसदी सांसद करोड़पति हैं, वहीं देश की तीन चौथाई आबादी अभी भी गरीब है।


न्यायपालिका ने दिए 20 बेहतरीन फैसले
रिपोर्ट में कहा गया कि चुनाव सुधार, सरकार की कार्यप्रणाली, पर्यावरण और विकास के मुद्दे, मानवाधिकार व पंचायत और विधि मामलों की पांच श्रेणियों में न्यायपालिका ने बेहतरीन फैसले दिए हैं। हालांकि 2004 के 2.8 करोड़ मामलों के मुकाबले न्यायपालिका पर 2011 में मुकदमों का बोझ बढ़कर 3.17 करोड़ हो गया है। इसके साथ ही न्यायपालिका में जजों और वकीलों के सगे-संबंधियों की संख्या बेतहाशा बढ़ी है।

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