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अक्षयपात्र संस्था से दिल्ली में मिड डे मील बच्चों को मिल सकेगा: सिसोदिया 

Wed, 09 Aug 2017 08:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 09 Aug 2017 08:08 PM IST
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mp raised questions upon mid day meal in delhi assembly
- फोटो : SELF

दिल्ली विधानसभा में स्कूलों में बच्चों को खिलाए जाने वाले मिड डे मील पर चर्चा हुई। पक्ष और विपक्ष दोनों ने ही मीड डे मील की गुणवत्ता के साथ-साथ इसके टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाए। सदस्यों ने कहा कि मिड डे मील में इस्तेमाल होने वाले पानी, तैयार करने की जगह, परोसने के दौरान सेवा भाव का भी अभाव होता है। इस योजना के लिए कड़े कानून की मांग की गई।

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चर्चा के जवाब में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया कहा कि पिछले दो साल से मिड डे मील देख रहा हूं। आंगनवाड़ी में पोषाहार की गुणवत्ता ठीक नही है। अक्षयपात्र संस्था कई राज्यों में अच्छे तरीके से बच्चों को खाना खिला रही हैं। सेवा भाव से भी यह संस्था काम कर रही हैं। दिल्ली में उनकी कोई गतिविधि अभी नहीं चल रही।
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दरअसल उनके पास जगह नहीं है। दिल्ली में उनका अभी कोई किचन स्थापित नहीं है। इस संस्था को जगह दिलाने के लिए हमने दिल्ली के उपराज्यपाल के पास प्रस्ताव भेजा था। अक्षयपात्र का प्रस्ताव था कि आप जगह मुहैया कराए, हम किचन सेटअप करेंगे और उच्च गुणवत्ता का भोजन बच्चों को परोसेंगे।
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हालांकि इस प्रस्ताव को दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल ने मंजूरी नहीं दी। यह कहा कि आप अपनी सरकार के कार्यकाल के लिए जगह दे दो। सिसौदिया ने कहा कि मौजूदा उपराज्यपाल ने इस प्रस्ताव पर साकारात्मक संकेत दिए है। उम्मीद है कि जल्द ही दिल्ली के कुछ इलाकों में अक्षयपात्र जैसी संस्था मिड डे मील तैयार कर वितरण भी करेगी।

दूसरा प्रस्ताव ये भी है कि उनके ट्रस्टी जमीन ले ले। हालांकि इसके लिए लैंड यूज चेंज करना होगा। वर्तमान ठेकेदार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि उनकी कोई विशेष योग्यता इन कामों में नहीं है। आर्थिक फायदे के लिए काम करते है। भाजपा विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि मिड डे मील को लेकर सख्त कानून की जरूरत।


उनके कांट्रैक्ट के नियमों को भी सख्त किया जाना चाहिए। इसपर सिसोदिया ने कहा कि मौजूदा समय मे भी सख्ती बरती गई है। दिल्ली सरकार ने एक सख्त टेंडर डॉक्यूमेंट भी तैयार किया है। उम्मीद है नई व्यवस्था अभी से बेहतर होगी।

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