नौनिहालों को स्तनपान कराने में दिल्ली की माताएं काफी पीछे
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दिल्ली की माताएं अपने नवजात को स्तनपान कराने में बहुत ही पीछे हैं जबकि प्रसव के तुरंत बाद नवजात शिशु को स्तनपान कराना काफी जरूरी होता है। हालात यह हैं कि दिल्ली के सरकारी से ज्यादा निजी अस्पतालों में स्तनपान की दरें काफी कम है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि दिल्ली और यूपी देश के सबसे फिसड्डी राज्य हैं। जहां ममता के आंचल तक तो शिशु पहुंचता है लेकिन स्तनपान नहीं कर सकता। यही स्थिति उत्तर भारत के सभी राज्यों की है।
रिपोर्ट में 28 राज्य व 3 केंद्र शासित प्रदेशों की रैंकिंग जारी की गई है। इसमें सबसे निचले पायदान 31 वें स्थान पर यूपी और 30 वें स्थान पर दिल्ली है। रिपोर्ट में इन राज्यों को क्रमश: 10 में से 3.32 व 3.77 अंक मिले हैं। पहला रैंक मणिपुर का है, जिसे 7.27 अंक मिले हैं।
रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में करीब 84.4 फीसदी प्रसव अस्पतालों में हो रहे हैं। बावजूद इसके 39.34 फीसदी सरकारी अस्पतालों में ही नवजात शिशुओं के स्तनपान पर जोर दिया जा रहा है। जबकि महज 17.03 फीसदी निजी अस्पतालों में नवजात को दूध पिलाने के लिए मां को सौंपा जाता है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-4 के आधार पर तैयार हुई रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में जन्म के पहले एक घंटे के भीतर केवल 28 फीसदी माताएं ही अपने बच्चे को दूध पिला रही हैं। जबकि 0 से 6 माह तक 49.6 फीसदी और 6 से 9 माह के बीच 35.4 फीसदी माताओं ने ही स्तनपान कराया।
प्रसव के एक घंटे बाद स्तनपान कराने से न सिर्फ बच्चों को निरोगी बनाया जा सकता है, बल्कि महिलाओं का भी भविष्य में ब्रेस्ट और ओवेरियन कैंसर से बचाव हो सकेगा। स्तनपान के प्रति जागरूकता लाने के लिए सरकार की ओर से इयये संबंधित कार्यक्रमों के कार्यान्वयन को उच्च प्राथमिकता देने की सभी राज्यों से अपील भी की गई है। मेरा मानना है कि आशा कर्मियों, एएनएम और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी इसमें अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए कमजोर राज्यों को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
- डॉ. हर्षवर्धन, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री
हर साल 7 लाख नवजात शिशुओं की मौत
देशभर में 60 से अधिक अस्पतालों में मौजूद हैं मिल्क बैंक। कंगारू मदर केयर भी सहायक।
प्रति 1 हजार पर 29 नवजात वजन कम होने की वजह से मौत की चपेट में आ रहे हैं।
यूनिसेफ के अनुसार देश में 38 फीसदी शिशुओं के कद बढ़ने में आ रही हैं दिक्कतें
डब्ल्यूएचओ के अनुसार दुनिया भर में हर 5 में से 3 नवजात बच्चे ऐसे हैं जिन्हें जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान नसीब नहीं होता है। ऐसे बच्चों की संख्या दुनिया भर में 780 लाख के करीब है।
क्यों जरूरी है मां का दूध
. अधिकतर लोगों को पता नहीं है कि समय से पहले या सामान्य से कम वजन के साथ जन्मे शिशुओं के लिए स्तनपान बेहद जरूरी है। इससे उनके जीवन को बीमारियों से बचाया जा सकता है।
. जन्म के तत्काल बाद बाहरी वातावरण से शिशु को खतरा रहता है। मां का दूध शिशु को इसी वातावरण से लड़ने के लिए तैयार करता है। इसमें शुरुआती छह माह तक बच्चे की जरूरत के अनुरूप पर्याप्त पोषण उपलब्ध होता है।
. जन्म के बाद का पहला घंटा बच्चे के लिए गोल्डन ऑवर के समान होता है। स्तनपान बच्चे के लिए संपूर्ण आहार होता है। इस दूध में इतनी ताकत होती है कि यह बच्चे को संक्रमण से तो बचाता ही है वहीं बड़े होने के बाद भी मधुमेह, रक्तचाप और दिल की बीमारियों के खतरे को काफी कम कर देता है।
. छह महीने के बाद जब बच्चा बाहरी आहार लेना शुरू कर देता है, उसके बाद भी बच्चे को मां का दूध जरूर मिलना चाहिए। यह बच्चे को शारीरिक तौर पर मजबूत करता है।
(जैसा कि डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल की डॉ. आरती मारिया ने बताया)
देश के 5 फिसड्डी राज्य
राज्य रैंकिंग जन्म के 1 घंटे में स्तनपान (फीसदी में)
उत्तराखंड 25 28.8
हरियाणा 26 42.3
पंजाब 27 29.9
बिहार 28 35.4
राजस्थान 29 28.4
दिल्ली 30 28
यूपी 31 25.4
(जम्मू- कश्मीर और हिमाचल प्रदेश क्रमश: 14 वें और 15वें पायदान पर हैं। यहां जन्म के एक घंटे बाद स्तनपान की स्थिति क्रमश: 47.2 व 40.6 फीसदी दर्ज की गई है। )