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मदर्स डेः मां और बाजी बनकर बच्चियों की परवरिश कर रहीं नजमा
Sun, 12 May 2019 06:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 12 May 2019 06:55 AM IST
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नजमा
- फोटो : अमर उजाला
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कोई मुझे बाजी कहती है तो कोई अम्मी जान, ये लड़कियां मेरे लिए मेरे अपने बच्चों से भी ज्यादा कीमती हैं। ये कहना है अनाथालय ‘बच्चियों का घर’ में रहने वाली अनाथ लड़कियों की परवरिश करने में लगीं नजमा बेगम का। नजमा बेगम तीन साल से जामा मस्जिद के मटिया महल स्थित अनाथालय में बच्चियों की परवरिश करने में लगी हैं।
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नजमा बताती हैं कि अलग-अलग परिस्थितियों से जूझते हुए बच्चे अनाथालयों तक पहुंचते हैं। कुछ बच्चे इतने छोटे होते हैं कि उन्हें मां का मतलब तक नहीं पता होता है तो किसी-किसी ने इसके मतलब को जानने की शुरुआत ही की होती है और तभी वे उससे बिछड़ जाती हैं।
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नजमा कहती हैं कि परिस्थिति कैसी भी हों, लेकिन मां की जगह कोई दूसरा व्यक्ति कभी नहीं ले सकता है। मैं बस ये कोशिश करती हूं कि ये बच्चियां अपना दर्द मुझसे बांट पाएं और मां न होने की अपनी तकलीफ को हल्का कर पाएं।
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नजमा का कहना है कि उन्होंने मनोविज्ञान की पढ़ाई की है और वे इस विषय की अध्यापिका भी रही हैं। इसी के चलते उन्हें बच्चियों की भावनाएं समझने में मदद मिल जाती है।
आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश
नजमा का कहना है कि बच्चियों को पढ़ाने के लिए पास के स्कूल में भेजा जाता है और उनकी शिक्षा पर पूरा ध्यान रखा जाता है, ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।
उन्होंने बताया कि बच्चियों को एक गैर-सरकारी संगठन की मदद से होम ट्यूशन दी जाती है। हालांकि नजमा ये भी बताती हैं कि बच्चियों पर थोड़ी पाबंदी भी रखी जाती है ताकि बुरी संगत में न पड़ें।