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मदर्स डे स्पेशल: हर चुनौती से निपटकर बच्चों को शिखर तक पहुंचा रहीं मां; इन माताओं ने किडनी देकर बचाई जान

Sat, 10 May 2025 02:27 PM IST
श्याम जी. संवाद न्यूज एजेंसी, अमर उजाला, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमर उजाला, नोएडा Published by: श्याम जी. Updated Sat, 10 May 2025 02:27 PM IST
सार

मां अपने बच्चों के लिए हर कठिनाई सहकर उन्हें सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाती हैं। इस दौरान चाहे दूरी बाधा बने या विपरीत परिस्थितियां। आधुनिक तकनीक और मां के त्याग ने जर्मनी, मुंबई से लेकर आईआईटी तक बच्चों के सपनों को साकार किया।

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Mother Day Special After dealing with every challenge mother is taking her children to top
मदर्स डे - फोटो : Amar ujala

विस्तार

मां अपने बच्चे के लिए अपना सबकुछ अर्पण कर देती हैं। खुद की चिंता छोड़ वह अपने बच्चों को शिखर तक पहुंचाने में अपना पूरा जीवन खर्च कर देती हैं। इसके लिए कई बार उन्हें अपने बच्चों को खुद से दूर तक रखना पड़ता है, लेकिन आजकल की आधुनिक कनेक्टिविटी ने इस दूरी को कम कर दिया है।

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विपरीत परिस्थितियों में पढ़ाया, अब जर्मनी में कर रहा पढ़ाई
सेक्टर 22 निवासी प्रो. कविता सिंह चौधरी ने बताया कि शुरुआत से ही उनके जीवन में संघर्ष रहा। साल 2008 में उनके पति की एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। तब उनके दोनों बेटे 10 वर्षीय वर्धमान सिंह और 8 वर्षीय बेटे वर्चस्व सिंह छोटे थे। उस दौरान वह बांदा के एक कॉलेज में कार्यरत थीं। उनके जाने के बाद उनका हौसला नहीं डगमगाया। उन्होंने नोएडा आकर बच्चों को पढ़ाया। अब उनका बेटा अपनी पढ़ाई के लिए उनसे दूर जर्मनी में रहता है। दूसरा बेटा दिल्ली में जामिया में मनोवैज्ञानिक विषय पर शोधार्थी है। दोनों से वह फोन पर हर दिन बात करती हैं और बेटों को उनके पास मां का साया होने का अहसास दिलाती हैं।
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मुंबई में लीगल एडवाइजर है बेटी
सेक्टर 132 निवासी ऋचा मिश्रा ने बताया कि उनकी दो बेटियां और एक बेटा है। सितंबर 2018 में पति की मौत हुई थी। उसके बाद से वह अपने बच्चों का खुद ही पालन पोषण करती आ रही हैं। इस बीच बच्चों की पढ़ाई को भी जारी रखा। अब उनका बेटी रेनुका मुंबई में लीगल एडवाइजर के तौर पर कार्य कर रही है। दूसरी बेटी ऋतिका दिल्ली में सीए और देवांश गुरुग्राम में पढ़ाई कर रहा है। तीनों ही बच्चे उनसे दूर हैं। लेकिन उन्होंने बताया कि बेटियों से रोजाना फोन और व्हाट्सएप से बातचीत करती हैं।
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आईआईटी मद्रास में ढाई साल पढ़ रही बेटी
सेक्टर 93 निवासी मोनिका मेहरोत्रा ने बताया कि उनकी बेटी पिछले ढाई साल से चेन्नई स्थित आईआईटी मद्रास में पढ़ाई कर रही है। बेटी के जाने के बाद से घर सूना सा हो गया है। दिन में चार से पांच बार बेटी से बात न हो तो मन नहीं मानता है। हर वक्त बेटी की चिंता सताती रहती है। यहां तक कि बिना बात किए वह और उनके पति न तो खाना खाते हैं और न ही चैन से सोते हैं। लेकिन अपने भविष्य के लिए घर छोड़कर जाना यदि जरूरी है तो वह उसके साथ हैं।

बुजुर्ग माताओं ने बचाई बच्चों की जान
फोर्टिस अस्पताल के यूरोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट के डायरेक्टर डॉ. पीयूष वार्ष्णेय ने बताया कि उत्तर प्रदेश में हापुड़ के 37 वर्षीय व्यक्ति को क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) थी। उन्होंने अपनी एलोपैथिक दवाइयां छोड़ कर आयुर्वेदिक इलाज का सहारा लिया जिससे किडनी और भी खराब हो गईं। रक्तनलियां क्षतिग्रस्त होने की वजह से उनकी हालत डायलिसिस की भी नहीं थी। ऐसे में उनकी 53 वर्षीय सास ने किडनी दान करने की इच्छा जताई और किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। 


वहीं, जोनल डायरेक्टर मोहित सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में मेरठ के एक 40 वर्षीय व्यक्ति की किडनी पूरी तरह फेल हो चुकी थी। फोर्टिस अस्पताल में उन्हें तत्काल किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी गई। नेफ्रोलॉजी के डॉ. अनुजा पोरवाल मरीज की पत्नी और उनकी 66 वर्षीय मां ने किडनी दान करने की पेशकश की। जेनेटिक जांच में उनकी मां को एकदम उपयुक्त किडनी डोनर पाया गया। उन्होंने अपने बेटे को किडनी दान की और उसे दूसरा जीवन प्रदान किया।

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