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क्यों यहां अब भी जा रही जच्चा-बच्चा की जान?
अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Thu, 03 Apr 2014 05:50 PM IST
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फरीदाबाद में जच्चा-बच्चा को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए स्वास्थ्य विभाग करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है।
इसके बावजूद जिले में नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं की मृत्यु दर में कोई कमी नहीं आई है। इस पर स्वास्थ्य मुख्यालय ने नाराजगी जताई है। इस बारे में स्थानीय अधिकारियों से जवाब तलब किया गया है।
स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने बुधवार शाम को सभी स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारियों की बैठक ली। मुख्यालय ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि जिले में जन्म लेने वाले एक हजार बच्चों में से 42 की किसी न किसी वजह से मौत हो रही है, जबकि एक लाख गर्भवती महिलाओं में से 142 की सुविधाओं के अभाव में जान जा रही है।
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मुख्यालय ने यह भी कहा है कि जिले के कई केंद्रों से रिपोर्टिंग सही नहीं है। इस वजह से यह पता नहीं चल पाता कि किस जगह कितने जच्चा-बच्चा हैं। इसके साथ ही मौत के कई मामलों की जानकारी भी नहीं पहुंचती।
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बुधवार को हुई बैठक में डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. अनूप कुमार ने जच्चा-बच्चा के सभी केसों की जानकारी देने के निर्देश दिए। डॉ. कुमार ने बताया कि जच्चा-बच्चा रिव्यू बैठक शुरू की जा रही है। जो जानकारी मिल रही है उनकी जांच की जा रही है, ताकि मृत्यु दर के कारणों का पता करके इसे कम किया जा सके।
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इसके बावजूद जिले में नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं की मृत्यु दर में कोई कमी नहीं आई है। इस पर स्वास्थ्य मुख्यालय ने नाराजगी जताई है। इस बारे में स्थानीय अधिकारियों से जवाब तलब किया गया है।
स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने बुधवार शाम को सभी स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारियों की बैठक ली। मुख्यालय ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि जिले में जन्म लेने वाले एक हजार बच्चों में से 42 की किसी न किसी वजह से मौत हो रही है, जबकि एक लाख गर्भवती महिलाओं में से 142 की सुविधाओं के अभाव में जान जा रही है।
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बुधवार को हुई बैठक में डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. अनूप कुमार ने जच्चा-बच्चा के सभी केसों की जानकारी देने के निर्देश दिए। डॉ. कुमार ने बताया कि जच्चा-बच्चा रिव्यू बैठक शुरू की जा रही है। जो जानकारी मिल रही है उनकी जांच की जा रही है, ताकि मृत्यु दर के कारणों का पता करके इसे कम किया जा सके।