जानिए, कौन है सबसे भ्रष्ट सरकारी महकमा
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दिल्ली में सतर्कता विभाग ने अपनी रिपोर्ट पेश की है जिसमें उसने बताया है कि सरकारी विभागों में सबसे भ्रष्ट विभाग कौन सा है।
सतर्कता विभाग ने एक वाट्सऐप नंबर (9910641064) शुरु किया था। विभाग ने दिल्ली की जनता से अपील की थी कि भ्रष्टाचार से संबंधित अपनी सारी शिकायतें इसी नंबर पर भेजें। सतर्कता विभाग को इस नंबर पर भी सबसे ज्यादा शिकायतें ट्रैफिक पुलिस के खिलाफ ही मिलीं।
सतर्कता विभाग को छह नवंबर तक कुल 40,477 शिकायतें मिली हैं। इन शिकायतों के आधार पर विभाग पिछले दस महीनों में दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के खिलाफ भ्रष्टाचार के नौ केस दर्ज करा चुकी है। हालांकि सतर्कता विभाग इन्हीं दस महीनों में दिल्ली पुलिस के विभिन्न विभागों के खिलाफ कुल 23 मामले दर्ज कर चुकी है।
यानि 23 मामलों मे नौ मामले अकेले ट्रैफिक पुलिस के खिलाफ हैं जो भ्रष्टाचार के कुल मामलों का 40% है। यानि दिल्ली पुलिस के विभिन्न विभागों में सबसे भ्रष्ट विभाग ट्रैफिक पुलिस है।
वाट्सएप नंबर ने खोली पोल
चौंकाने वाली बात ये है कि जिन नौ मामलों में जांच की जारी है उनमें से चार मामलों की शिकायत सतर्कता विभाग के वाट्सएप नंबर पर की गई थी। हालांकि अभी भी ट्रैफिक पुलिस के खिलाफ 150 से ज्यादा शिकायतों की जांच जारी है।
असल में ट्रैफिक पुलिस ने घूस लेने का ऐसा तरीका इजाद किया है जिसमें सीधे उन्हें पकड़ना मुश्किल होता है। उन्होंने अपने आदमी सेट कर रखें हैं जो ट्रांसपोटर्स से नियमित तौर पर वसूली करते रहते हैं।
सतर्कता विभाग के डीसीपी सिंधु पिल्लई का कहना है कि अपने दलालों के माध्यम से ट्रैफिक पुलिस की वसूली पर हमारी निगाह है और जल्द ही हम इस पूरे नेटवर्क का खुलासा करेंगे।
कुछ महीने पहले अपराध शाखा ने एक ऐसे गैंग को पकड़ा था जो ट्रैफिक पुलिस के प्रतिनिधी बनकर लोगों को गाड़ियों के ओके सर्टिफिकेट वाला स्टीकर बेच रहे थे। सतर्कता विभाग को ट्रांसपाटरों और ट्रैफिक पुलिस के बीच चल रहे इस गोरखधंधे के बारे में भी महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं जिसके आधार पर जल्द ही बड़े खुलासे हो सकते हैं।