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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   More than 30 protesters are standing firm on a hunger strike alongside Sonam Wangchuk.

Delhi NCR News: सोनम वांगचुक के साथ अनशन पर डटे हैं 30 से अधिक प्रदर्शनकारी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jul 2026 07:13 PM IST
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सुर्खियों से दूर, लेकिन संघर्ष में बराबर की भागीदारी
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अलग-अलग राज्यों से पहुंचे हैं लोग, बोले- मांग पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा

सचिन कुमार

नई दिल्ली।जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन में भले ही सबसे अधिक चर्चा सोनम वांगचुक की हो रही हो, लेकिन उनके साथ 30 से अधिक प्रदर्शनकारी भी भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सभी की साझा लड़ाई है। जब तक उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
सोनम वांगचुक के साथ भूख हड़ताल पर बैठे अधिकांश प्रदर्शनकारी पहली बार किसी लंबे आंदोलन का हिस्सा बने हैं। कोई छात्र है, कोई सामाजिक कार्यकर्ता तो कोई नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियां छोड़कर यहां पहुंचा है। हम्माद, उज्जवल, नीतीश, आदित्य, श्रवण, पुंडी मस्कल बद्रा, विकास, रंगला तंवर, सूर्य प्रकाश, संजय नोगिया, पवन, आर्यन, नवीन, बहादुर सिंह, दीपक, अरीब और अर्पित समेत 30 से अधिक लोग भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनकी प्रमुख मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार तक पहुंचाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं।
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प्रदर्शनकारी उज्जवल बताते हैं कि उनका उद्देश्य केवल अपनी बात सरकार तक पहुंचाना और मांगों पर गंभीरता से विचार कर समाधान निकालना है। वहीं, पवन ने कहा कि भले ही मीडिया में सोनम वांगचुक का चेहरा अधिक दिखाई देता हो, लेकिन यहां मौजूद हर व्यक्ति समान प्रतिबद्धता के साथ आंदोलन का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि 20 जुलाई को संसद मार्च की तैयारी भी की जा रही है। नीतीश ने कहा कि आंदोलन को केवल एक व्यक्ति तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। यहां मौजूद हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है और लंबे संघर्ष के लिए तैयार है। अर्पित ने कहा कि सोनम वांगचुक की वजह से आंदोलन को राष्ट्रीय पहचान जरूर मिली है, लेकिन धरने पर बैठे प्रत्येक प्रदर्शनकारी का योगदान उतना ही महत्वपूर्ण है।
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लंबे अनशन के कारण प्रदर्शनकारियों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता भी बढ़ रही है। धरना स्थल पर मौजूद सहयोगी लगातार उनकी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। कई लोगों को कमजोरी और अन्य शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अरीब ने बताया कि लंबे अनशन का असर शरीर पर साफ दिखाई दे रहा है, फिर भी सभी को उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान देगी। उनका कहना है कि आंदोलन के 28 दिन पूरे होने के बाद भी उनका संकल्प पहले की तरह मजबूत है और समाधान निकलने तक वे पीछे नहीं हटेंगे।

प्रदर्शनकारियों की जुबानी
मैं यहां किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बैठा हूं। मेरी सिर्फ यही उम्मीद है कि हमारी मांगों को गंभीरता से सुना जाए। भूख हड़ताल आसान नहीं है, लेकिन अपनी बात मजबूती से रखने के लिए मैंने यह रास्ता चुना है। -पुंडी मस्कल बद्रा
सोनम वांगचुक जी का संघर्ष हमें हिम्मत देता है, लेकिन यह आंदोलन सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं है। यहां बैठा हर साथी अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है और अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह गंभीर है।-विकास
हम अलग-अलग राज्यों से आए हैं, लेकिन हमारी चिंता और हमारी मांग एक ही है। हम चाहते हैं कि हमारी बात सरकार तक पहुंचे और इस मामले का जल्द समाधान निकले। -रंगला तंवर

कई दिनों के उपवास का असर शरीर पर पड़ता है, लेकिन जब मुद्दा लोगों के भविष्य से जुड़ा हो तो संघर्ष करना पड़ता है। मुझे विश्वास है कि हमारी आवाज जरूर सुनी जाएगी।-सूर्य प्रकाश
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