मां-बाप को मिली रेप पीड़िता, भाई ने किया दुष्कर्म
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हाईकोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िता को उसके माता पिता को सौंपने का निर्देश दिया है। दुष्कर्म पीड़िता नाबालिग सात माह से एनजीओ के शेल्टर होम में थी।
पीड़िता के भाई व एक अन्य युवक पर दुष्कर्म का आरोप है। पीड़िता की मां ने कस्टडी देने की याचिका दायर की थी। जस्टिस जीएस सिस्तानी की पीठ ने मामले में नाबालिग पीड़िता की सशर्त कस्टडी उसके माता पिता को सौंपी है।
बच्ची के माता पिता दो माह तक सप्ताह में दो बार उसे काउंसलर से मिलने की अनुमति देंगे। इसके बाद बच्ची को महीने में एक बार या जब भी बच्ची चाहे तो उसे काउंसलर से मिलने देंगे।
कोर्ट ने बाल विकास समिति की वेलफेयर अफसर सोमी हर्षन को बच्ची का कानूनी अभिभावक नियुक्त किया है। कोर्ट ने बच्ची के हितों के संरक्षण के लिये हर जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया है।
एएसआई को हाल-चाल जानने का निर्देश
मामले की जांच अधिकारी महिला एएसआई को दो माह तक हर दो सप्ताह में पीड़िता के हालचाल जानने के लिए उसके घर जाने का निर्देश दिया है।
अगर जांच अधिकारी को कोई गड़बड़ नजर आती है तो वह उचित कार्रवाई के लिये बाल कल्याण अधिकारी से संपर्क करे। कोर्ट ने एसएचओ को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश महिला एएसआई को दिया है।
पेश मामले में पीड़िता 17 मार्च 2013 से घर से लापता थी। उसके माता पिता ने उसकी गुमशुदगी की सूचना चाणक्यपुरी थाने में देकर नाबालिग के अपहरण का मुकदमा दर्ज करवाया था।
पुलिस ने जांच करके पीड़िता को बरामद कर लिया था। पीड़िता के बरामद होने के बाद पुलिस ने उसके माता पिता को बुलाया था। उस समय थाने में पीड़िता व एक अन्य युवक अमित मौजूद था। परिजन जब थाने पहुंचे तो पीड़िता का भाई भी उनके साथ था।
घर नहीं लौटना चाहती थी बच्ची
पीड़िता ने अपने भाई पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था जिसके बाद पुलिस ने पीड़िता के भाई को गिरफ्तार कर लिया था। उस समय पीड़िता ने अपने बयान में कहा था कि वह अपने घर नहीं जाना चाहती वह किसी जगह शांति से रहना चाहती है।
कोर्ट में याचिका पर सुनवाई के दौरान पीड़िता मौजूद थी। उसने अपने बयान में कहा कि वह अब घर वापस जाना चाहती है। कोर्ट ने इससे पहले उसका यह आग्रह खारिज कर दिया था क्योंकि उसका बयान दर्ज नहीं हुआ था।
याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कहा कि पीड़िता का बयान दर्ज हो चुका है। इसलिए उसे माता पिता को सौंपा जा सकता है लेकिन कई शर्तें लगाई हैं।