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पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट सोलर सिटी की ओर बढ़ रहा है शहर
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Wed, 06 Jul 2016 12:02 AM IST
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गुड़गांव
- फोटो : अमर उजाला
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट हर घर सूर्य पुत्र को लेकर हरियाणा सरकार अधिक संजीदा है। साइबर सिटी में इंटरनेशनल सोलर एलायंस का अंतरिम सचिवालय शुरू होने के बाद शहर अब सोलर सिटी की तरफ बढ़ रहा है।
सौर ऊर्जा के महत्व को समझते हुए उद्योग और निजी तौर पर भी लोग सौर पैनल लगवा रहे हैं। बीते छह माह में 116 स्थानों पर सौर ऊर्जा के जरिये बिजली पैदा कर इस्तेमाल की जा रही है।
करीब 11537 किलोवाट यूनिट बिजली हर दिन पैदा हो रहा है। बता दें कि 26 जनवरी को फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के साथ इंटरनेशनल सोलर एलायंस की अंतरिम सचिवालय की नींव रखने आए प्रधानमंत्री मोदी ने सौर ऊर्जा को हर घर तक पहुंचाने पर जोर देते हुए राज्यों से इस बारे में ठोस कदम उठाने की अपील की थी।
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जिसके बाद प्रदेश सरकार की ओर नेट मीटरिंग को लेकर काम शुरू हुआ। आज 116 स्थानों पर नेट मीटरिंग के जरिये बिजली पैदा कर बिजली विभाग के भार को कम कर रहे हैं।
साथ ही बिजली विभाग को भी कुछ बिजली बचत होने पर दिया जा रहा है। जिसके एवज में सरकार उन्हें बिजली बिल में रियायत दे रही है। इस मामले में उद्योग और शैक्षणिक संस्थान आगे हैं। अक्षय ऊर्जा विभाग के प्रोजेक्ट ऑफिसर रामेश्वर सिंह कहते हैं कि लोगों में सौर ऊर्जा को लेकर जागरूकता आई है।
इसके लिए आवेदन आने लगे हैं। 50 से अधिक आवेदन अभी लंबित पड़े हैं। जिन पर जल्द ही काम शुरू किया जाएगा। सौर ऊर्जा के बारे में लोगों को जागरूक करने और किस तरह सूर्य की रोशनी को ऊर्जा में तब्दील कर लाभ उठाया जा सकता है? इसे दिखाने के लिए गुडग़ांव प्रशासन ने यह सोलर प्लांट तैयार किया है।
क्या हो रहा है फायदा
अभी कुल बिजली खर्च का करीब 90 फीसदी तक सौर पैनल लगाने का नियम बनाया हुआ है। सोलर एनर्जी का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को इससे बिजली बिलों में राहत मिल रही है। एक अनुमान के मुताबिक करीब 55 से 80 फीसदी तक बिजली बिल में कटौती हो रही है। अतिरिक्त उपायुक्त विनय प्रताप का कहना है कि घरों में लगने वाले छोटे सोलर प्लांट को बिजली के मीटर से जोड़ा जा सकता है। इससे लोगों के बिजली के बिल में भी कमी आएगी और इसका फायदा होगा।
यह बनाया गया है नियम
-निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम, औद्योगिक व व्यवसायिक संस्थान, मॉल, होटल तथा पर्यटन कम्पलेक्स, जिनका लोड 50 किलोवाट से 1000 किलोवाट है उनमें 10 किलोवाट या 05 प्रतिशत की क्षमता का सोलर पॉवर प्लांट लगाना जरूरी है।
-यदि लोड 1000 किलोवाट से अधिक है तो कम से कम 50 किलोवाट या लोड का 3 प्रतिशत का सोलर पॉवर प्लांट लगाना अनिवार्य है।
-01 एकड़ भू-खंड में विकसित परिसर में कम से कम 10 किलोवाट, एक एकड़ से अधिक और 2 एकड़ से कम क्षेत्र में विकसित आवासीय परिसर में कम से कम 20 किलोवाट, 2 एकड़ से 5 एकड़ तक के आवासीय परिसर में कम से कम 30 किलोवाट तथा 5 एकड़ से अधिक आवासीय परिसर में कम से कम 40 किलोवाट का सोलर पॉवर प्लांट स्थापित करना अनिवार्य है।
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सौर ऊर्जा के महत्व को समझते हुए उद्योग और निजी तौर पर भी लोग सौर पैनल लगवा रहे हैं। बीते छह माह में 116 स्थानों पर सौर ऊर्जा के जरिये बिजली पैदा कर इस्तेमाल की जा रही है।
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करीब 11537 किलोवाट यूनिट बिजली हर दिन पैदा हो रहा है। बता दें कि 26 जनवरी को फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के साथ इंटरनेशनल सोलर एलायंस की अंतरिम सचिवालय की नींव रखने आए प्रधानमंत्री मोदी ने सौर ऊर्जा को हर घर तक पहुंचाने पर जोर देते हुए राज्यों से इस बारे में ठोस कदम उठाने की अपील की थी।
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जिसके बाद प्रदेश सरकार की ओर नेट मीटरिंग को लेकर काम शुरू हुआ। आज 116 स्थानों पर नेट मीटरिंग के जरिये बिजली पैदा कर बिजली विभाग के भार को कम कर रहे हैं।
साथ ही बिजली विभाग को भी कुछ बिजली बचत होने पर दिया जा रहा है। जिसके एवज में सरकार उन्हें बिजली बिल में रियायत दे रही है। इस मामले में उद्योग और शैक्षणिक संस्थान आगे हैं। अक्षय ऊर्जा विभाग के प्रोजेक्ट ऑफिसर रामेश्वर सिंह कहते हैं कि लोगों में सौर ऊर्जा को लेकर जागरूकता आई है।
इसके लिए आवेदन आने लगे हैं। 50 से अधिक आवेदन अभी लंबित पड़े हैं। जिन पर जल्द ही काम शुरू किया जाएगा। सौर ऊर्जा के बारे में लोगों को जागरूक करने और किस तरह सूर्य की रोशनी को ऊर्जा में तब्दील कर लाभ उठाया जा सकता है? इसे दिखाने के लिए गुडग़ांव प्रशासन ने यह सोलर प्लांट तैयार किया है।
क्या हो रहा है फायदा
अभी कुल बिजली खर्च का करीब 90 फीसदी तक सौर पैनल लगाने का नियम बनाया हुआ है। सोलर एनर्जी का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को इससे बिजली बिलों में राहत मिल रही है। एक अनुमान के मुताबिक करीब 55 से 80 फीसदी तक बिजली बिल में कटौती हो रही है। अतिरिक्त उपायुक्त विनय प्रताप का कहना है कि घरों में लगने वाले छोटे सोलर प्लांट को बिजली के मीटर से जोड़ा जा सकता है। इससे लोगों के बिजली के बिल में भी कमी आएगी और इसका फायदा होगा।
यह बनाया गया है नियम
-निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम, औद्योगिक व व्यवसायिक संस्थान, मॉल, होटल तथा पर्यटन कम्पलेक्स, जिनका लोड 50 किलोवाट से 1000 किलोवाट है उनमें 10 किलोवाट या 05 प्रतिशत की क्षमता का सोलर पॉवर प्लांट लगाना जरूरी है।
-यदि लोड 1000 किलोवाट से अधिक है तो कम से कम 50 किलोवाट या लोड का 3 प्रतिशत का सोलर पॉवर प्लांट लगाना अनिवार्य है।
-01 एकड़ भू-खंड में विकसित परिसर में कम से कम 10 किलोवाट, एक एकड़ से अधिक और 2 एकड़ से कम क्षेत्र में विकसित आवासीय परिसर में कम से कम 20 किलोवाट, 2 एकड़ से 5 एकड़ तक के आवासीय परिसर में कम से कम 30 किलोवाट तथा 5 एकड़ से अधिक आवासीय परिसर में कम से कम 40 किलोवाट का सोलर पॉवर प्लांट स्थापित करना अनिवार्य है।