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Delhi: भाटी माइंस में उगेगा जापानी तकनीक वाला मियावाकी जंगल, 60000 पौधों से हरा-भरा होगा इलाका

Tue, 12 May 2026 03:28 AM IST
Vijay Singh Pundir आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vijay Singh Pundir Updated Tue, 12 May 2026 03:28 AM IST
सार

इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां केवल पारंपरिक तरीके से पेड़ नहीं लगाए जाएंगे, बल्कि एक वैज्ञानिक पद्धति का सहारा लिया जाएगा। वन विभाग के साउथ फॉरेस्ट डिवीजन ने तय किया है कि भाटी इलाके में 60,000 पौधे लगाए जाएंगे। इसमें 40,000 छोटे पेड़ (सपलिंग्स) और 20,000 तरह-तरह की झाड़ियां रोपी जाएंगी। 

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Miyawaki forest with Japanese technology will grow in Bhati Mines
जंगल - फोटो : ANI

विस्तार

भाटी इलाके में अब कंक्रीट के बीच एक घना मियावाकी जंगल आकार लेने वाला है। दिल्ली सरकार के वन एवं वन्यजीव विभाग ने हवा को शुद्ध करने और हरियाली बढ़ाने के लिए एक खास परियोजना तैयार की है। इसमें जापानी तकनीक मियावाकी का इस्तेमाल कर हजारों पौधे लगाए जाएंगे, जो बहुत कम समय में एक घने जंगल का रूप ले लेंगे।

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इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां केवल पारंपरिक तरीके से पेड़ नहीं लगाए जाएंगे, बल्कि एक वैज्ञानिक पद्धति का सहारा लिया जाएगा। वन विभाग के साउथ फॉरेस्ट डिवीजन ने तय किया है कि भाटी इलाके में 60,000 पौधे लगाए जाएंगे। इसमें 40,000 छोटे पेड़ (सपलिंग्स) और 20,000 तरह-तरह की झाड़ियां रोपी जाएंगी। मियावाकी तकनीक से लगाए गए पौधे सामान्य पौधों की तुलना में 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं और 30 गुना ज्यादा घने होते हैं। इसका सीधा फायदा स्थानीय लोगों को मिलेगा, क्योंकि यह घना जंगल धूल को सोखने और ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने में किसी एयर प्यूरीफायर की तरह काम करेगा।
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एक साल तक होगी विशेष देखभाल
पौधे लगाने के बाद उन्हें उनके हाल पर छोड़ना दिल्ली में आम बात है, लेकिन इस परियोजना में ऐसी लापरवाही की गुंजाइश नहीं होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जो भी संस्था इस काम की जिम्मेदारी लेगी, उसे पूरे एक साल तक इन पौधों की देखभाल और रखरखाव करना होगा। इस बड़ी परियोजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस काम की इच्छुक संस्थाओं और जानकारों को 20 मई को एक महत्वपूर्ण बैठक के लिए बुलाया है, ताकि काम की बारीकियों को समझा जा सके।
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मिनी जंगल एक वरदान साबित होगा
प्रदूषण की मार झेल रही दिल्ली के लिए यह मिनी जंगल एक वरदान साबित हो सकता है। जब ये 60 हजार पौधे एक साथ लहलहाएंगे, तो ये इलाका जैव विविधता का केंद्र बन जाएगा और स्थानीय पक्षियों व छोटे जीवों को भी नया घर मिलेगा। सरकार की ये कोशिश दिल्ली वालों को शुद्ध हवा और बेहतर भविष्य देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।


पर्यावरण और आम जनता के लिए जरूरी  
दक्षिणी दिल्ली का भाटी माइंस इलाका पारिस्थितिक रूप से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। यहां हरियाली बढ़ने से न केवल तापमान में गिरावट आएगी, बल्कि गिरते भूजल स्तर को सुधारने में भी मदद मिलेगी। यह परियोजना साल 2025-26 के लिए तय की गई है। तुगलकाबाद स्थित वन विभाग का कार्यालय इस पूरी योजना की निगरानी कर रहा है।

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