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सौदे में चिदंबरम से हुई बड़ी गलती, बढ़ेंगी मुश्किलें!

Mon, 22 Sep 2014 11:53 PM IST
Updated Mon, 22 Sep 2014 11:53 PM IST
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mistake by p. chidambaram on aircel maxis export deal.

एयरसेल-मैक्सिस मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया कि सौदे में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम द्वारा दिए गए एफआईपीबी की मंजूरी एक गलती थी।

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सीबीआई ने कहा कि वित्त मंत्री ने गलती से 800 मिलियन डॉलर यानी 3500 करोड़ रुपये के निवेश की मंजूरी प्रदान कर दी थी जबकि वे मात्र 600 करोड़ रुपये के निवेश को ही मंजूरी प्रदान करने में सक्षम थे।
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पटियाला हाउस स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी के समक्ष पेश जांच अधिकारी ने बताया कि एफआईपीबी की मंजूरी संबंधी मुद्दे की जांच विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी इस बात की जांच कर रही है कि चिदंबरम ने 2006 में एयरसेल-मैक्सिस सौदे में विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी कैसे दी थी।
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उन्होंने कहा जांच में पता चला है कि वित्त मंत्री 600 करोड़ रुपये तक की मंजूरी प्रदान करने के लिए सक्षम थे लेकिन चिदंबरम ने 800 मिलियन डॉलर यानि लगभग 3500 करोड़ रुपये के निवेश की इजाजत प्रदान कर दी थी।

अधिकार न होते हुए भी चिदंबरम ने किया ये काम?

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उन्होंने कहा कि यह मामला आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) को भेजा गया है और वे जांच कर रहे है कि चिदंबरम ने कैसे मंजूरी दी है।

न्यायाधीश सैनी ने सवाल करते हुए कहा कि आप एफआईपीबी की मंजूरी की बात कर रहे है जबकि पेश दस्तावेज वित्त मंत्री की पावर को दर्शा रहे है। दस्तावेजों से स्पष्ट है कि वित्त मंत्री को मात्र 600 करोड़ के निवेश की मंजूरी का अधिकार है।

सीबीआई अधिवक्ता केके गोयल ने कहा कि 600 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के लिए सीसीईए ही मंजूरी देने के लिए सक्षम है। यह जांच का विषय है और हम वर्तमान में किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकते।

किसको फायदा पहुंचाना चाहते थे चिदंबरम?

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सीबीआई ने कहा कि आरोपपत्र में आरोपी बनाई गई मॉरीशस की कंपनी मैसर्स ग्लोबल कम्युनिकेशन सर्विसेज होल्डिंग्स लिमिटेड जो मैक्सिस की एक सहायक है ने 800 मिलियन निवेश का आग्रह किया था और यह अधिकार मात्र सीसीईए को ही था।

सीबीआई द्वारा दायर आरोपत्र में पूर्व दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन, उनके भाई कलानिधि मारन, टी आनंद कृष्णन, मलेशियाई राष्ट्रीय ऑगस्टस राल्फ मार्शल और चार कंपनियों को आरोपी बनाया है।

अदालत द्वारा कलानिधि मारन की पत्नी कावेरी मारन के संबंध में पूछे जाने पर सीबीआई ने कहा कि उनके आरोपी फर्म सन डायरेक्ट टीवी प्राइवेट लिमिटेड में 82 प्रतिशत शेयर है लेकिन दस्तावेज उनकी प्रत्यक्ष भूमिका साबित नहीं करते। उन्होंने कहा कि हर निर्णय उनके पति करते थे और हम मामले की जांच कर रहे है।

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