हाईकोर्ट का अहम फैसला: मर्जी से मनाली गई थी लड़की, सीने पर था टैटू; अदालत ने घटाई दुष्कर्म के दोषी की सजा
यह मामला जून 2009 का है। उस समय पीड़ित लड़की की उम्र करीब 14 साल और आरोपी युवक की उम्र 18 साल थी। लड़की घर से बिना बताए चली गई थी और आरोपी के साथ पहले दिल्ली के कनॉट प्लेस और फिर वहां से मनाली गई। दो दिन बाद दोनों वापस दिल्ली लौट आए थे।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने अपहरण और दुष्कर्म के एक पुराने मामले में अहम फैसला सुनाते हुए दोषी युवक की सजा को कम कर दिया है। अदालत ने मामले के तथ्यों पर गौर करते हुए कहा कि लड़की ने अपनी छाती पर आरोपी के नाम का टैटू गुदवाया था और वह स्वेच्छा से उसके साथ मनाली गई थी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि घटना के 17 साल बाद युवक को वापस जेल भेजना 'न्याय की हत्या' के समान होगा।
'स्पष्ट रूप से एक प्रेमपूर्ण रिश्ता था'
न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव की अदालत ने इस मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि दोनों के बीच स्पष्ट रूप से एक प्रेमपूर्ण रिश्ता था। हालांकि, घटना के वक्त लड़की की उम्र कम होने के कारण इस रिश्ते को कानूनी रूप से वैध नहीं माना जा सकता था। इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, अदालत ने दोषी द्वारा जेल में पहले ही बिताई गई करीब दो साल चार महीने की सजा को न्याय के लिए पर्याप्त माना।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला जून 2009 का है। उस समय पीड़ित लड़की की उम्र करीब 14 साल और आरोपी युवक की उम्र 18 साल थी। लड़की घर से बिना बताए चली गई थी और आरोपी के साथ पहले दिल्ली के कनॉट प्लेस और फिर वहां से मनाली गई। दो दिन बाद दोनों वापस दिल्ली लौट आए थे।
लड़के खटखटाया हाई कोर्ट का दरवाजा
निचली अदालत ने साल 2011 में आरोपी को इस मामले में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। इसके बाद युवक ने हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट में अपील के दौरान दोषी ने अपनी दोषसिद्धि (कनविक्शन) को चुनौती नहीं दी थी, बल्कि सिर्फ अपनी सजा को कम करने की गुहार लगाई थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।