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बाबुओं की हेराफेरी, आफत आवंटियों की
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Mon, 08 Feb 2016 10:17 AM IST
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जीडीए बाबुओं की फाइलों में हेराफेरी का खामियाजा आवंटियों को भुगतना पड़ रहा है। जीडीए में संपत्तियों की फाइलें गायब होने का सिलसिला जारी है।
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हालिया मामला शास्त्रीनगर योजना से जुड़ा है। यहां की पांच दुकानों की फाइलें जीडीए से गायब हैं। जीडीए ने संबंधित दुकानों की फाइलों के लिए सार्वजनिक सूचना छपवाकर 15 दिनों में आवंटियों से दस्तावेज मांगे हैं।
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मालिकाना हक का सबूत न देने वालों के आवंटन रद्द कर दिए जाएंगे। इसके साथ ही जीडीए वीसी ने सभी जोन की संपत्तियों की फाइलों की नए सिरे से तलाश के आदेश भी दिए हैं।
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जीडीए में बड़ी संख्या में संपत्तियों की फाइलें मिसिंग हैं। फाइलें गायब होने के कारण संपत्तियों के मालिकाना हक का भी पता नहीं चल पा रहा है।
बीते दिनों जोन चार में स्थित शास्त्रीनगर योजना की दुकान संख्या एच-14, 15, 16, 17 और 18 की फाइलें जांच केदौरान गायब मिलीं।
लाख कोशिशों के बावजूद जब फाइलें नहीं मिलीं तो जीडीए अधिकारियों ने आवंटियों से मालिकाना हक के दस्तावेज मांगें हैं। जीडीए अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा ने बताया कि इन दुकानों के आवंटन से संबंधित फाइलें जीडीए से गायब हैं।
इस संबंध में सूचना के जरिए मालिकाना हक के दस्तावेज (आवंटन पत्र, किश्तों की रसीद आदि की फोटोकॉपी) मांगे गए हैं।
15 दिनों के भीतर दस्तावेज न मिलने पर इनका नए सिरे से आवंटन किया जाएगा। हालांकि एक दुकान की पूरी कीमत जमा करने के बावजूद उस पर कब्जा लेने आवंटी नहीं आ रहा है।
नए सिरे से प्रॉपर्टी सर्च
कई मामलों में यह बात सामने आई है कि जीडीए की फाइलों किसी और का नाम चल रहा है, जबकि उस संपत्ति में कोई और रह रहा है।
कई मामले तो ऐसे भी सामने आए हैं कि मूल आवंटी का आवंटन किसी कारणवश रद्द किया जा चुका है, लेकिन मौके पर अवैध कब्जेदार काबिज है।
ऐसी ही गोलमाल वाली संपत्तियों की फाइलें जीडीए से गायब हैं। अब नए सिरे से प्रापर्टी सर्च के आदेश दिए गए हैं।