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कनाडा में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों की ठगी
Thu, 19 Sep 2019 06:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 19 Sep 2019 06:22 AM IST
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fake passport
- फोटो : अमर उजाला
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नेपाल के युवाओं को विदेशों में नौकरी दिलवाने के नाम पर लाखों की ठगी करने वाले गिरोह का क्राइम ब्रांच ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के कब्जे से कई देशों के फर्जी वीजा स्टिकर, पासपोर्ट, दस्तावेज और मशीनें बरामद की गई हैं।
गिरोह के सदस्य मूलरूप से नेपाल के युवाओं को कनाडा सहित दूसरे देशों में नौकरियां दिलवाने के नाम पर उनसे पासपोर्ट ले लेते थे। नेपाल में ही उनसे शुरुआती किस्त वसूलकर युवाओं को दिल्ली बुलाया जाता था। कनाडा के दूतावास में वीजा के लिए पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लेते थे। इसके बाद फर्जी वीजा स्टिकर लगाकर व्हाट्सएप के जरिये आवेदकों को भेजकर शेष राशि ले लेते थे।
नेपाली दूतावास की ओर से स्पेशल इनवेस्टिगेशन यूनिट-एक को दी गई शिकायत में बताया गया कि नेपाली मूल के तीन युवक सुशील जोशी, केशब सिंह बिष्ट और दीपक को जितेंद्र शर्मा, बिजय चोपड़ा, बिरेन बिष्ट और बिनोद ने कनाडा में नौकरी दिलवाने के नाम पर 14-15 लाख रुपये की धोखाधड़ी की है।
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उनकी तरफ से दी गई शिकायत में कहा गया है कि कनाडा में नौकरी दिलवाने के नाम पर काठमांडू में जीतू उर्फ जितेंद्र शर्मा से उनकी मुलाकात हुई। इसके बाद जितेंद्र से व्हाट्सएप और मोबाइल पर बातचीत होने लगी। फिर उन्हें नेपाल से दिल्ली बुलाया जाता था। इस दौरान जितेंद्र के जरिये अन्य आरोपियों से भी मुलाकात हुई।
इस दौरान उनसे कनाडा की वीजा के लिए नकद रुपये वसूले जाते थे। बकाया वसूलने के लिए ग्रीन पार्क में चिकित्सकीय जांच भी की जाती थी। वीजा हासिल करने के लिए सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करवाने के बाद नौकरी हासिल करने के लिए आवेदन करने वाले युवाओं को कनाडा की वीजा के फोटोग्राफ भेज दिए जाते थे।
लेकिन इसके लिए पासपोर्ट पर वीजा के फर्जी स्टिकर लगा दिए जाते थ ताकि युवाओं से बकाया राशि वसूली जा सके। तीनों युवकों से बकाया 14-15 लाख रुपये वसूलने के बाद सभी आरोपी फरार हो गए। इस मामले की पड़ताल के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से फर्जी वीजा स्टिकर और तीनों नेपाली युवकों के पासपोर्ट बरामद किए हैं। इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों से हुई पूछताछ में एक के बाद एक इस गिरोह में शामिल बिचौलिए, ट्रेवल एजेंट सहित अन्य लोगों की गिरफ्तारी हुई है।
फर्जी वीजा स्टिकर मुहैया करवाने के मामले में गगन सिंह, आशा रानी, विजय के अलावा पहाडग़ंज स्थित दफ्तर में स्टिकर तैयार करने वाले मास्टरमाइंड मंजीत सिंह उर्फ बब्बू को भी गिरफ्तार किया गया है। मूल रूप से गाजियाबाद के वैशाली निवासी मंजीत सिंह ही इस गिरोह के लिए अलग अलग देशों के फर्जी वीजा स्टिकर, बायो डाटा, फर्जी पासपोर्ट की प्रतियां मुहैया करवाता था। गिरफ्तार अन्य आरोपियों में पहाड़गंज निवासी एजेंट विपिन शर्मा, आंध्र प्रदेश निवासी प्रदीप कुमार के नाम शामिल हैं। आरोपियों के कब्जे से कई पासपोर्ट समेत अन्य सामान बरामद हुए हैं।
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गिरोह के सदस्य मूलरूप से नेपाल के युवाओं को कनाडा सहित दूसरे देशों में नौकरियां दिलवाने के नाम पर उनसे पासपोर्ट ले लेते थे। नेपाल में ही उनसे शुरुआती किस्त वसूलकर युवाओं को दिल्ली बुलाया जाता था। कनाडा के दूतावास में वीजा के लिए पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लेते थे। इसके बाद फर्जी वीजा स्टिकर लगाकर व्हाट्सएप के जरिये आवेदकों को भेजकर शेष राशि ले लेते थे।
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नेपाली दूतावास की ओर से स्पेशल इनवेस्टिगेशन यूनिट-एक को दी गई शिकायत में बताया गया कि नेपाली मूल के तीन युवक सुशील जोशी, केशब सिंह बिष्ट और दीपक को जितेंद्र शर्मा, बिजय चोपड़ा, बिरेन बिष्ट और बिनोद ने कनाडा में नौकरी दिलवाने के नाम पर 14-15 लाख रुपये की धोखाधड़ी की है।
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उनकी तरफ से दी गई शिकायत में कहा गया है कि कनाडा में नौकरी दिलवाने के नाम पर काठमांडू में जीतू उर्फ जितेंद्र शर्मा से उनकी मुलाकात हुई। इसके बाद जितेंद्र से व्हाट्सएप और मोबाइल पर बातचीत होने लगी। फिर उन्हें नेपाल से दिल्ली बुलाया जाता था। इस दौरान जितेंद्र के जरिये अन्य आरोपियों से भी मुलाकात हुई।
इस दौरान उनसे कनाडा की वीजा के लिए नकद रुपये वसूले जाते थे। बकाया वसूलने के लिए ग्रीन पार्क में चिकित्सकीय जांच भी की जाती थी। वीजा हासिल करने के लिए सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करवाने के बाद नौकरी हासिल करने के लिए आवेदन करने वाले युवाओं को कनाडा की वीजा के फोटोग्राफ भेज दिए जाते थे।
लेकिन इसके लिए पासपोर्ट पर वीजा के फर्जी स्टिकर लगा दिए जाते थ ताकि युवाओं से बकाया राशि वसूली जा सके। तीनों युवकों से बकाया 14-15 लाख रुपये वसूलने के बाद सभी आरोपी फरार हो गए। इस मामले की पड़ताल के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से फर्जी वीजा स्टिकर और तीनों नेपाली युवकों के पासपोर्ट बरामद किए हैं। इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों से हुई पूछताछ में एक के बाद एक इस गिरोह में शामिल बिचौलिए, ट्रेवल एजेंट सहित अन्य लोगों की गिरफ्तारी हुई है।
फर्जी वीजा स्टिकर मुहैया करवाने के मामले में गगन सिंह, आशा रानी, विजय के अलावा पहाडग़ंज स्थित दफ्तर में स्टिकर तैयार करने वाले मास्टरमाइंड मंजीत सिंह उर्फ बब्बू को भी गिरफ्तार किया गया है। मूल रूप से गाजियाबाद के वैशाली निवासी मंजीत सिंह ही इस गिरोह के लिए अलग अलग देशों के फर्जी वीजा स्टिकर, बायो डाटा, फर्जी पासपोर्ट की प्रतियां मुहैया करवाता था। गिरफ्तार अन्य आरोपियों में पहाड़गंज निवासी एजेंट विपिन शर्मा, आंध्र प्रदेश निवासी प्रदीप कुमार के नाम शामिल हैं। आरोपियों के कब्जे से कई पासपोर्ट समेत अन्य सामान बरामद हुए हैं।