{"_id":"6759f5e417caa99a5a030523","slug":"milk-bank-started-in-safdarjung-hospital-2024-12-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi : सफदरजंग अस्पताल में शुरू हुआ दूध बैंक, हर साल दो हजार बच्चों को मिल पाएगी सुविधा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi : सफदरजंग अस्पताल में शुरू हुआ दूध बैंक, हर साल दो हजार बच्चों को मिल पाएगी सुविधा
Thu, 12 Dec 2024 01:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 12 Dec 2024 01:58 AM IST
सार
इसकी मदद से नवजात स्वास्थ्य सेवा में सुधार होगा। इस मौके पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संदीप बंसल ने कहा कि दूध बैंक की मदद से नवजात को उचित सुविधा मिलेगी। यह समय की जरूरत है।
विज्ञापन
सफदरजंग अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नवजात को दूध की आपूर्ति करने के लिए सफदरजंग अस्पताल में बुधवार को लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट (एलएमयू) का शुभारंभ किया गया। इसकी मदद से नवजात स्वास्थ्य सेवा में सुधार होगा। इस मौके पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संदीप बंसल ने कहा कि दूध बैंक की मदद से नवजात को उचित सुविधा मिलेगी। यह समय की जरूरत है।
विज्ञापन
एलएमयू से सालाना उन 2000 नवजात को फायदा होगा, जो सफदरजंग अस्पताल के मदर-एनआईसीयू में भर्ती हैं। स्तनपान कराने वाले बच्चों के लिए तीन अतिरिक्त आईक्यू पॉइंट के साथ न्यूरोडेवलपमेंटल परिणामों में सुधार हो सकता है।
विज्ञापन
वहीं, वीएमएमसी की प्रिंसिपल डॉ. गीतिका खन्ना ने कहा कि दूध बैंक की सुविधा सफदरजंग में नवजात मृत्यु दर और रुग्णता को कम करने में मदद करेगी। बाल रोग विभाग के प्रमुख डॉ. रतन गुप्ता ने कहा कि इसकी मदद से ऐसे बच्चों को भी दूध मिल पाएगा जिनकी मां स्तनपान नहीं करा पा रही हैं।
विज्ञापन
मदर न्यूबॉर्न इंटेंसिव केयर यूनिट (एन-निकू) की प्रभारी डॉ. सुगंधा आर्य ने बताया कि देश में प्रति वर्ष 27 मिलियन बच्चे जन्म लेते हैं। प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 20 नवजात की मृत्यु दर चिंताजनक है। नव स्थापित 40 बिस्तरों वाली लेवल 3 मदर-निकू इकाई बाल चिकित्सा देखभाल में सुधार कर रही है।
उन्होंने कहा कि मां का दूध नवजात के लिए सबसे अच्छा भोजन है और इससे हर छोटे व बीमार नवजात को मां का दूध या दाता मानव दूध उपलब्ध हो सकेगा। एक अनुमान लगाया गया है कि स्तनपान की मदद से मृत्यु दर में 3/4 की कमी संभव है। इसमें हर साल भारत में पांच वर्ष से कम आयु के 1.60 लाख बच्चों की मृत्यु को रोकने की क्षमता है।