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क्या इस फूलन देवी को जानते हैं आप जिसने बढ़ाई देश की शान

Fri, 31 Jul 2015 02:37 PM IST
Updated Fri, 31 Jul 2015 02:37 PM IST
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Mentally challenged girl wins 4 medals special olympic in los angeles

बुधवार को आधीरात के कुछ पहर ही बीते थे और देश के लिए एक गौरवमयी क्षण इंतजार कर रहा था। वह भी एक ऐसे नाम की वजह से जो कभी दुर्दांत महिला डकैत का था। लेकिन आज ये भारत की ऐसी विलक्षण खिलाड़ी का नाम है जिसने भारत को स्पेशल ओलंपिक में 1 गोल्ड समेत चार मेडल दिलाए हैं। वो है खिलाड़ी नंबर 105।

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ये कोई और नहीं भारत की फूलन देवी थी जिसने कुछ ही देर पहले F4 पॉवरलिफ्टिंग कैटेगरी में 35 किग्रा भारवर्ग बेंचप्रेसिंग में स्वर्ण पदक जीता था।

ज्यादा कुछ तो नहीं मात्र कुछ कपड़ों के साथ भारत से इतनी दूर पहुंची, 4 साल पहले परिवार द्वारा छोड़ी हुई 16 साल की मैंटली चैलेंज्ड फूलन के पांव आज जमीं पर नहीं थे। उसने सारा जहां जीत लिया था और दिखा दिया था कि वो हर मामले में नंबर 1 है।

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फूलन की टीम ने बढ़ाया देश का गौरव

Mentally challenged girl wins 4 medals special olympic in los angeles

लॉस एंजेलिस में हो रहे स्पेशल ओलंपिक खेलों में फूलन और उसके 9 और साथियों ने मिलकर भारत के लिए 6 मेडल जीते हैं, जिसमें 2 स्वर्ण और बाकी कांस्य पदक हैं। यह सभी बच्चे दिल्ली के रोहिणी स्थित आशा किरण होम के रहने वाले हैं।

आशा किरण होम के ये एथलीट्स 2013 के एशिया पैसिफिक खेलों की तरह निश्चित ही इन खेलों में भाग नहीं ले पाते अगर विदेश मंत्रालय से इन्हें मदद ना मिली होती।

2013 में इन खिलाड़ियों को इसलिए भाग नहीं लेने दिया गया क्योंकि इनका पासपोर्ट नहीं बना था। ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि न इनके पिता, न जन्म का पता था और ना ही इनकी उम्र किसी को पता थी।

फूलन को उसके परिवार ने छोड़ा

Mentally challenged girl wins 4 medals special olympic in los angeles

आशा किरण होम के प्रशासक बीएस बनर्जी बड़े प्यार से इन एथलीट्स को बच्चे कहते हैं। हालांकि ये दिलचस्प है कि इनमें सबसे बड़े एथलीट की उम्र 78 साल है जिसे स्पेशल ओलंपिक के लिए चुना गया।

बनर्जी बताते हैं कि मेडिकल टेस्ट के माध्यम से इन बच्चों की आयु पता ‌की गई और बाकी की जानकारी के साथ दिया गया तो विदेश मंत्रालय ने इस बार इसे स्वीकार कर लिया।

लेकिन इस प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने वाली फूलन के बारे में जानकारी उतनी ही सीमित थी जितनी कि उसे प्रशिक्षण करने के लिए संसाधनों की कमी।

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फूलन ऐसे पहुंची आशा किरण

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फूलन के बारे में सबको इतना ही पता है कि पुलिस ने उसे 2011 में सनलाइट कॉलोनी से बरामद किया था इंस्टीट्यूट ऑफ ह्युमन बिहेवियर एंड अलायड साइंसेज में भर्ती करा दिया।


जहां से उसे अक्टूबर में चाइल्ड वेल्फेयर कमिटी की आदेश पर आशा किरण भेज दिया गया। फूलन के बारे में जो प‌ुख्ता जानकारी आशा किरण दे सकता है वो ये कि उसका आईक्यू 46 है।

दिल्ली सरकार द्वारा चलाए जा रहे आशा किरण होम में 42 और लोगों के साथ कमरा बांटने वाली फूलन चार साल के छोटे से समय में विभिन्न खेलों में 40 से भी ज्यादा पुरस्कार जीत चुकी है।

आशा किरण ने जीते हैं सैकड़ों पुरस्कार

Mentally challenged girl wins 4 medals special olympic in los angeles

लॉस एंजेलिस में चल रहे स्पेशल ओलंपिक में फूलन ने बेंच प्रेस में एक गोल्ड समेत अब तक तीन ब्रॉन्ज मेडल जीत लिए हैं। फूलन के साथ ही आशा किरण की ही सोनक्षी ने एक कांस्य पदक, 39 साल के मटरू ने सॉफ्ट बॉल में स्वर्ण पदक जीता है।

मटरू जो 1985 से आशा किरण में रह रहा है उस वक्त वह केवल 9 साल का था। वो भी फूलन की तरह ही मेटली चैलेंज्ड है। आशा किरण की बात करें तो यहां खेलों पर 2012 से जोर दिया जा रहा है। यहां पर रहने वाले खिलाड़ी हर साल 100 पुरस्कारों से भी ज्यादा पुरस्कार जीतते हैं।

बनर्जी कहते हैं कि यहां के खिलाड़ी कभी खाली हाथ नहीं आते हालांकि वो ओलंपिक को लेकर आश्वस्त नहीं थे, लेकिन वहां भी 2 स्वर्ण पदक मिले।

बनर्जी चाहते हैं फूलन को ले जाए उनका परिवार

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हालांकि आशा किरण के एथलीट्स को बहुत ज्यादा ट्रेनिंग नहीं मिली लेकिन इस टीम ने पिछले एक साल में एसओ-भारत द्वारा आयोजित कई कैम्प में हिस्सा लिया और इसके साथ ही यहां ‌की आंटी सीमा ने भी इन्हें काफी ट्रेनिंग दी।

यही नहीं इन्हें पार्ट-टाइम कोच भी ट्रेन करते हैं। इन एथलीट्स की ट्रेनिंग के लिए दो पार्क हैं जिसमें से एक का इस्तेमाल कपड़े सुखाने ‌लिए भी होता है। एक सीमेंटेड रास्ता भी बना है जिसे साइकलिंग ट्रैक और रेसिंग के तौर पर ‌भी इस्तेमाल किया जाता है।

स्पेशल ओलंपिक में भेजने के लिए एक बहुत बड़े ग्रुप में से 11 खिलाड़ियों को चुना गया था। जिसमें से कविता (25) ने एथलेटिक्स चुना था पर शादी और बच्चों के चलते उसके ससुराल ने हमें उसे भेजने की अनुमति नहीं दी। बनर्जी तो फूलन देवी के लिए भी यही चाहते हैं कि उसके माता-पिता उसे वापस ले जाएं और उसकी भी शादी हो जाए।

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