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युवाओं के इस शौक के बारे में जान डर जाएंगे आप

Sat, 11 Apr 2015 05:51 PM IST
Updated Sat, 11 Apr 2015 05:51 PM IST
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Medicines are used as addiction in youth

बीमारियों के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं का इस्तेमाल नशे के लिए किया जा रहा है। इसमें खांसी, दर्द निवारक और नींद की दवाएं प्रमुख रूप से युवा इस्तेमाल कर रहे हैं।

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नियमों को ताक पर रखकर शहर के कुछ दुकानदार इन दवाओं को धड़ल्ले से बेच रहे हैं। दवाओं दुकानों पर कार्रवाई करते हुए जिला ड्रग विभाग ने करीब चार दिन पूर्व छह दुकानों का लाइसेंस पार्शियल कैंसिल कर दिया है।
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यानी अब इन दवा दुकानों को दवा बेचने के लिए विभाग लाइसेंस नहीं देगा। पांच अन्य दवा दुकानों पर पकड़े जाने पर नोटिस भी जारी किया है।

दरअसल, कुछ दवाओं में नशीले तत्व होने के कारण इनके बेचने के लिए दवा विक्रेताओं को लाइसेंस के साथ डॉक्टर की पर्ची पर देने का निर्देश है, ताकि इसका गलत इस्तेमाल न हो सके।
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लेकिन, शहर के युवाओं में इलाज करने वाली दवाओं का नशे के रूप में इस्तेमाल करने का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। ड्रग विभाग की दबिश की वजह से गैर कानूनी तरीके से भी शहर में खांसी और दर्द की दवा आ रहे हैं। हाल ही में ड्रग विभाग ने बड़े पैमाने पर गैर कानूनी तरीके से कफ सीरप की खेप पकड़ी थी।

बढ़ रही है नशीली दवाओं की मांग

Medicines are used as addiction in youth

बुपिरोनॉरफिन के दो इंजेक्शन लियोजेसिक और लियोजिक बाजार में सिर्फ 15 रुपये रुपये में उपलब्ध है। ये इंजेक्शन आमतौर पर दर्द निवारक के तौर पर उपयोग किए जाते हैं। लेकिन समाज का एक तबका इनका उपयोग नशाखोरी के लिए कर रहा है।

कफ सीरप कॉरेक्स का इस्तेमाल खांसी ठीक करने के बजाय नशे की लत पूरी करने के लिए की जा रही है। खांसी की दवा की तरह दर्द निवारक सेग्मोप्रॉक्सीपॉन (एसपी) का दुरुपयोग भी हो रहा है। इसका एक कैप्सूल दर्द से निजात देता है पर लोग 10-20 कैप्सूल साथ लेकर नशे के लिए दुरुपयोग करते हैं।

शहर के एक दवा दुकानदार ने बताया कि पिछले कुछ सालों में कफ सीरप, नींद की दवा और तेज दर्द की दवाओं की मांग काफी बढ़ी है। जो पहले दिन में एक दो बेचते थे, अब दिन में दर्जनों बिक जाते हैं। नशे के मकसद से खरीदने वाले अकसर 16-22 साल के बीच होते हैं। एक बार ही पूरी बोतल गटक जाते हैं।

इन दवाओं का होता है इस्तेमाल

Medicines are used as addiction in youth

सिविल अस्पताल के डॉक्टर प्रदीप शर्मा कहते हैं कोरेक्स में कोडीन नामक तत्व होता है, जो अफीम जैसा नशा करता है। एक चम्मच दवा खांसी को दबाती है, जबकि पूरी बोतल पीने से सीधा असर दिमाग पर पड़ता है।

इसका लगातार इस्तेमाल लीवर व किडनी को नुकसान पहुंचता है। शरीर के जोड़ों में दर्द शुरू हो जाता है। लोग चल-फिर नहीं सकते। ऐसे लोग भी आ रहे हैं, जो एक साथ दो-तीन बोतलें पी जाते हैं।

प्रॉक्सीवोन, स्पास्मो-प्रॉक्सीवोन, कॉरेक्स, बॉरेक्स, रेक्सकॉफ, फेनसेडिल कफ सीरप, लोमोटिल, अलप्रैक्स, रेसटील, लिबिरियम, इक्वीलिबीरियम, एपीट्रिल, एपीजैम, कोलपोज, वैलियम, एटिवन, लारपोज, निट्रावेट, हाइपोनेक्स, फोर्टविन, बुपरिन, बुपिरनोर आदि।

विभाग सभी दवा दुकानों पर पैनी नजर रखे हुए है। बिना पर्ची के और नियम के तहत नहीं बेचने वाले पर कार्रवाई शुरू कर दी है। छह लाइसेंस कैंसल और 05 दवा दुकानों को नोटिस दिया जा चुका है। -अमनदीप चौहान, जिला ड्रग कंट्रोलर

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