एमसीडी: बुक प्रॉपर्टी को नियमित कराने में आसानी के लिए नई नीति, भ्रष्टाचार पर लगेगी रोक
अनधिकृत निर्माण या नवीकरण के दौरान बुक हुईं संपत्तियों को आसानी से नियम के अनुकूल कराने के लिए निगम सदन में नई नीति को मंजूरी दी गई है।
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अनधिकृत निर्माण या नवीकरण के दौरान बुक हुईं संपत्तियों को आसानी से नियम के अनुकूल कराने के लिए निगम सदन में नई नीति को मंजूरी दी गई है। संपत्ति का नए सिरे से नक्शा पास करा और अवैध निर्माण को हटाकर संपत्ति नियमानुकूल हो पाएगी। इससे बिजली मीटर लगाने में होने वाले भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण पर रोक लगेगी।
सदन में सोमवार को हिंदूराव अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में डीएनबी पाठ्यक्रम की शुरुआत करने, उद्यान विभाग के मालियों का अनुबंध पांच महीने के लिए बढ़ाने और टोल टैक्स वसूली करने वाली एजेंसियों को कार्यकाल छह महीने के लिए बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों को सदन में पास कराया गया। मेयर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, मौजूदा समय स्टैंडिंग कमेटी का गठन नहीं हुआ है और लोक सभा चुनाव की घोषणा कभी भी हो सकती है। चुनाव की घोषणा होते ही आचार संहिता लग जाएगी, तब हम ऐसे प्रस्ताव में पास नहीं कर पाएंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए मालिकों का एक साथ 5 महीने का अनुबंध बढ़ा दिया है। दिल्ली में जितने भी टोल नाके हैं, उन्हें छह महीने का एक्सटेंशन दे दिया गया है।
दिल्ली में संपत्तियों के बुक होने से लोग परेशान हैं। जब भी किसी कॉलोनी में किसी संपत्ति का नवीकरण होता है या नई बिल्डिंग बन रही होती है, तो शिकायत मिलने पर एमसीडी द्वारा संपत्ति को बुक कर दिया जाता है। इसमें बिजली के मीटर का कनेक्शन मिलने में लोगों को बहुत समस्या होती है। इसलिए सदन में प्रीति बनाम एमसीडी-2007 केस को आधार बनाकर एक प्रस्ताव पास किया गया है। इसके बाद अब बुक संपत्ति को नियमों के मुताबिक नियमित कराया जा सकेगा। यदि किसी ने नक्शा पास करवाकर दो फ्लोर का मकान बनाया है। लेकिन कुछ समय बाद तीसरा फ्लोर भी बना लिया और उस फ्लोर को अवैध मानते हुए बुक कर दिया गया है। उस क्षेत्र में तीन फ्लोर बनाने की अनुमति है तो संपत्ति मालिक बाद में नक्शा पास करवाकर और जरूरी फीस भरकर उस तीसरे फ्लोर को रेगुलराइज करवा सकेगा। इसके अलावा स्वीकृत भवन योजना से अतिरिक्त फ्लोर बनवा लिए हैं तो उनको हटाकर अपनी प्रोपर्टी को रेगुलराइज करा सकेंगे।
बिजली व जल बोर्ड के पास भी रहेगी जानकारी
मेयर ने कहा, यदि किसी संपत्ति में नव निर्माण, नवीकरण होता है और संपत्ति मालिक संपत्ति का संपत्तिकर भर रहा है। ऐसे में मूल्यांकन एवं संग्रहण विभाग का मूल्यांकन अधिकारी, भवन विभाग से भवन योजना की जानकारी मांग सकता है। इसके बाद संबंधित मूल्यांकन अधिकारी को भवन विभाग को 15 दिन में जवाब देना होगा। यदि भवन में कोई बदलाव किया गया है और इसका हाउस टैक्स जमा करने की जानकारी मूल्यांकन एवं संग्रहण विभाग के पास है। तो मूल्यांकन विभाग की जिम्मेदारी होगी कि वह भवन विभाग को इसका जवाब समय पर दे। इसके बाद डीएमसी एक्ट के सेक्शन- 491 के तहत जोनल उपायुक्त, सुपरिटेंडेंट इंजीनियर व एक्सईएन यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी भवन में कोई बदलाव हुआ है तो इसकी जानकारी बिजली विभाग और दिल्ली जल बोर्ड को भी मिले। जोनल उपायुक्त, सुपरिटेंडेंट इंजीनियर व एक्सईएन यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी विभागों से पूरी रिपोर्ट लेने और देने के बाद ही प्रॉपर्टी पर कोई कार्रवाई हो।
प्लास्टिक बोतलों से बनाया एमसीडी साइनेज
रीसाइकल प्लास्टिक बोतलों से एमसीडी ने अपना साइनेज तैयार कराया है। निगम मुख्यालय सिविक सेंटर के ए-ब्लॉक के प्रवेश द्वार पर इसको सेल्फी पॉइंट के रूप में स्थापित किया गया है। सोमवार को मेयर डॉ शैली ओबरॉय ने इसका उद्घाटन किया। इसे सिंगल यूज प्लास्टिक को रीसाइकल, रीड्यूज और रीयूज करने के उदाहरण के तौर पर पेश किया गया है। इस अनूठे सेल्फी पॉइंट में 200 रीसाइकल प्लास्टिक बोतलों से बनी ईकोब्रिक्स का उपयोग किया गया है। मेयर ने बताया कि यह सेल्फी पॉइंट रीसाइकल, रीड्यूज और रीयूज का बेहतरीन उदाहरण है। 100 डेज टू बीट प्लास्टिक-2 अभियान के अंतर्गत यह पहल की गई है और सिंगल यूज प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के बारे में जनता को जागरूक करने के लिए पूरी दिल्ली में इस तरह के सेल्फी पॉइंट बनाए जाएंगे। उन्होंने अपील की है कि सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग न करें और दिल्ली को स्वच्छ, हरित बनाने में नगर निगम का सहयोग करें।