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Delhi NCR News: मटिया महल में विरासत और कारोबार का संगम, बुनियादी सुविधाएं बदहाल
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गंदगी, लटकते तार और ई-रिक्शा की आवाजाही से परेशानी
व्यापारियों ने चांदनी चौक की तर्ज पर बाजार के कायाकल्प की मांग की
सनी सिंह
नई दिल्ली। जामा मस्जिद से लगा हुआ पुरानी दिल्ली का मटिया महल बाजार सिर्फ खरीदारी का केंद्र नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति, खानपान और कारोबार का ऐसा संगम है, जिसकी पहचान दिल्ली से बाहर तक है। निहारी, कबाब, बिरयानी और मुगलई जायके के साथ साख शरबत ए मोहब्बत, कुनाफा आदि के लिए यह इलाका खास पहचान रखता है। देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले लोगों के साथ विदेशी पर्यटक भी यहां पहुंचते हैं।
मटिया महल रोड और आसपास की गलियों में एक तरफ खानपान की दुकानों पर भीड़ और पुरानी दिल्ली का माहौल दिखता है, तो दूसरी तरफ बुनियादी व्यवस्थाएं सवाल खड़े करती हैं। कई जगह गंदगी और कचरा नजर आता है। संकरी गलियों में ई-रिक्शा की लगातार आवाजाही से पैदल चलने वालों को परेशानी होती है। ग्राहकों की भीड़ और वाहनों की आवाजाही एक साथ होने पर स्थिति मुश्किल हो जाती है।
बाजार की दुकानों और इमारतों के ऊपर बिजली व केबल के तार लटकते दिखाई देते हैं। व्यापारियों का कहना है कि पुराने बाजार में तारों को व्यवस्थित करने और अनुपयोगी तार हटाने की जरूरत है। ऐतिहासिक और पर्यटक क्षेत्र होने के कारण यहां साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
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बाजार मटिया महल ट्रेडर्स एसोसिएशन (बीएमएमटीए) का कहना है कि जब चांदनी चौक का कायाकल्प हो सकता है तो मटिया महल का क्यों नहीं। संबंधित विभागों को मिलकर इन समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
-
कोट्स
यहां के निहारी-कबाब का स्वाद लेने दूर-दूर से लोग आते हैं। बाजार की पहचान के हिसाब से सुविधाएं भी बेहतर होनी चाहिए। एमसीडी सफाई के नाम पर खानापूर्ति कर देती है।बाजार में गंदगी फैली रहती है।
— हाजी सलीमुद्दीन, अध्यक्ष, बीएमएमटीए
शाम को ग्राहक बढ़ते हैं तो ई-रिक्शा की आवाजाही से गलियों में चलना मुश्किल हो जाता है। इससे दुकानदार और ग्राहक दोनों परेशान होते हैं।
— शहजाद, प्रवक्ता, बीएमएमटीए
दुकानों के आसपास गंदगी और ऊपर लटकते तार रोज की समस्या हैं। तारों की व्यवस्था ठीक हो जाए तो बाजार का माहौल काफी बेहतर हो सकता है।
— जावेद खान, ज्वाइंट सेक्रेट्री, बीएमएमटीए
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व्यापारियों ने चांदनी चौक की तर्ज पर बाजार के कायाकल्प की मांग की
सनी सिंह
नई दिल्ली। जामा मस्जिद से लगा हुआ पुरानी दिल्ली का मटिया महल बाजार सिर्फ खरीदारी का केंद्र नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति, खानपान और कारोबार का ऐसा संगम है, जिसकी पहचान दिल्ली से बाहर तक है। निहारी, कबाब, बिरयानी और मुगलई जायके के साथ साख शरबत ए मोहब्बत, कुनाफा आदि के लिए यह इलाका खास पहचान रखता है। देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले लोगों के साथ विदेशी पर्यटक भी यहां पहुंचते हैं।
मटिया महल रोड और आसपास की गलियों में एक तरफ खानपान की दुकानों पर भीड़ और पुरानी दिल्ली का माहौल दिखता है, तो दूसरी तरफ बुनियादी व्यवस्थाएं सवाल खड़े करती हैं। कई जगह गंदगी और कचरा नजर आता है। संकरी गलियों में ई-रिक्शा की लगातार आवाजाही से पैदल चलने वालों को परेशानी होती है। ग्राहकों की भीड़ और वाहनों की आवाजाही एक साथ होने पर स्थिति मुश्किल हो जाती है।
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बाजार की दुकानों और इमारतों के ऊपर बिजली व केबल के तार लटकते दिखाई देते हैं। व्यापारियों का कहना है कि पुराने बाजार में तारों को व्यवस्थित करने और अनुपयोगी तार हटाने की जरूरत है। ऐतिहासिक और पर्यटक क्षेत्र होने के कारण यहां साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
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बाजार मटिया महल ट्रेडर्स एसोसिएशन (बीएमएमटीए) का कहना है कि जब चांदनी चौक का कायाकल्प हो सकता है तो मटिया महल का क्यों नहीं। संबंधित विभागों को मिलकर इन समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
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कोट्स
यहां के निहारी-कबाब का स्वाद लेने दूर-दूर से लोग आते हैं। बाजार की पहचान के हिसाब से सुविधाएं भी बेहतर होनी चाहिए। एमसीडी सफाई के नाम पर खानापूर्ति कर देती है।बाजार में गंदगी फैली रहती है।
— हाजी सलीमुद्दीन, अध्यक्ष, बीएमएमटीए
शाम को ग्राहक बढ़ते हैं तो ई-रिक्शा की आवाजाही से गलियों में चलना मुश्किल हो जाता है। इससे दुकानदार और ग्राहक दोनों परेशान होते हैं।
— शहजाद, प्रवक्ता, बीएमएमटीए
दुकानों के आसपास गंदगी और ऊपर लटकते तार रोज की समस्या हैं। तारों की व्यवस्था ठीक हो जाए तो बाजार का माहौल काफी बेहतर हो सकता है।
— जावेद खान, ज्वाइंट सेक्रेट्री, बीएमएमटीए