{"_id":"5e83dfad8ebc3e76876a25ab","slug":"markaz-claims-we-did-not-break-any-rules-asked-the-sdm-for-permission-to-move-out","type":"story","status":"publish","title_hn":"मरकज का दावाः हमने कोई नियम नहीं तोड़ा, एसडीएम से मांगी थी निकालने की अनुमति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मरकज का दावाः हमने कोई नियम नहीं तोड़ा, एसडीएम से मांगी थी निकालने की अनुमति
Wed, 01 Apr 2020 05:56 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 01 Apr 2020 05:56 AM IST
विज्ञापन
दिल्ली मरकज...
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
निजामुद्दीन स्थित दिल्ली मरकज ने मंगलवार को कहा कि उसने कोई कानून नहीं तोड़ा है। इसके साथ ही संस्थान ने अपने भवन में क्वारंटीन सेंटर बनाने की पेशकश की। सौ साल पुराने तबलीगी जमात के मुख्यालय ने कहा कि हम प्रशासन को पूरा सहयोग दे रहे हैं।
विज्ञापन
मरकज ने कहा, यहां सालभर कार्यक्रम चलता है और दुनियाभर के लोग शामिल होते हैं। जलसे की तारीख एक साल पहले तय हो जाती है और लोग आने का कार्यक्रम बनाते हैं। पीएम ने जैसे ही 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का आह्वान किया हमने कार्यक्रम बंद कर दिया।
विज्ञापन
21 मार्च को ट्रेनें बंद होने से बड़ी संख्या में लोग फंस गए। जनता कर्फ्यू खत्म होने से पहले दिल्ली सरकार ने लॉकडाउन की घोषणा कर दी। 24 मार्च को हमने एसएचओ को बताया, एक दिन पहले 1500 लोग अपने साधनों से निकल गए थे।
विज्ञापन
23 मार्च को पीएम ने 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा कर दी। ऐसे में यहां रुके लोगों के पास जाने का कोई रास्ता नहीं बचा। 24 मार्च को हमें निजामुद्दीन थाने के एसएचओ का नोटिस मरकज बंद करने के लिए मिला। हमने उसी दिन उन्हें बताया कि यहां 1000 लोग रुके हैं जबकि 1500 लोग चले गए हैं।
मरकज ने दावा किया कि उसने लोगों को उनके घरों तक पहुंचने के लिए एसडीएम को चिट्ठी लिखकर वाहनों के पास बनाने की अनुमति मांगी। पुलिस को भी इसकी सूचना दी गई। हमने प्रशासन को 17 वाहनों की सूची देकर पास मांगा ताकि लोगों को वापस भेजा जा सके। पास नहीं मिला। हम लोगों को बस अड्डे पर नहीं भेज सकते थे। इसलिए उन्हें यहीं रखा गया।