आपसी भाईचारे के लिए बिसाहड़ा से राजघाट तक होगी पदयात्रा
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सद्भावना कायम होने से क्षेत्र का विकास संभव है। यह बात शुक्रवार को पूर्व सांसद स्वामी अग्निवेश ने बिसाहड़ा पहुंचकर कही। उन्होंने कहा कि मानवता और भाईचारे का पैगाम देने के लिए 27 नवंबर को दादरी के बिसाहड़ा गांव से पदयात्रा दिल्ली के राजघाट के लिए रवाना होगी।
इसमें आर्य समाज के लोगों के साथ क्षेत्र के लोग भी शामिल होंगे। वह शुक्रवार को ग्राम प्रधान संजय राणा के घर पर जानकारी दे रहे थे। उन्होंने बताया कि बिसाहड़ा को कुछ लोगों ने राजनीति का केंद्र बना दिया।
भाई-भाई को लड़ाने का बजाए आपस में सद्भावना जरूरी है। आपस में सद्भाव से ही क्षेत्र और गांव की तरक्की हो सकती है। भाईचारे का पैगाम देने के लिए ही 27 नवंबर को बिसाहड़ा गांव से पदयात्रा रवाना होगी।
29 नवंबर को दिल्ली के राजघाट पर पहुंचेगी। लोगों को मानवता और आपस में भाईचारा कायम रखने के लिए एक पैगाम दिया जाएगा। पदयात्रा में हर वर्ग के लोग शामिल होंगे।
इकलाख के घर पर लगा था ताला
उन्होंने कहा कि गाय की रक्षा करना हर वर्ग का दायित्व है। हिंदू को अपनी गाय दूसरों के हाथों नहीं बेचना चाहिए। समाज के साथ सरकार को भी रक्षा की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और हरियाणा सरकारों ने गोहत्या पर कानून बनाकर पांच साल की सजा का प्रावधान किया है। उनका कदम स्वागत करने योग है। दूसरी सरकारों को भी इसको लागू करना चाहिए।
उनके साथ आतिक साजिद, तहसीम खान, संतोष कुमार मौजूद थे। उससे पहले वे इकलाख के घर पहुंचे। लेकिन घर पर ताला बंद था। उसके बाद स्वामी अग्निवेश बिसाहड़ा गांव के शिव मंदिर पर पहुंचे।
मंदिर पर मौजूद कुछ ग्रामीणों से बात की। उससे पहले वे दादरी के रेलवे रोड स्थित आर्य समाज मंदिर पर भी पहुंचे। मंदिर पर मौजूद आर्य समाज के बलवीर सिंह आर्य, राकेश आर्य, डा. आनंद आर्य, सुधीर रावल मौजूद थे।