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गोपीनाथ मुंडे की मौत के अनसुलझे सवाल

Thu, 05 Jun 2014 09:31 PM IST
Updated Thu, 05 Jun 2014 09:31 PM IST
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many questions left after gopinath munde's death in delhi

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गोपीनाथ मुंडे की सड़क हादसे में मौत के बाद अब दिल्ली पुलिस घटना के कारणों का पता लगाने में जुटी है।

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गोपीनाथ मुंडे की मौत से जुड़े अनसुलझे सवालों का जवाब ढूंढ़ने के लिए फिलहाल पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अंधेरे में ही तीर चला रही हैं। क्योंकि इस मामले में अभी तक यह तय नहीं हो पाया कि हादसे में किसकी गलती थी।

केंद्रीय मंत्री की मौत के बाद उनके शव का पोस्टमार्टम हुआ और अब उनके पैतृक गांव में उनका अंतिम संस्कार किया जा रहा है। बीजेपी के दिग्गज नेता तो हादसे में चल बसे लेकिन उनकी मौत ने कई सवाल छोड़े हैं, जिनके जवाब हर कोई जानना चाहता है।

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पहले टकराई थी कोई और कार?

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केंद्रीय मंत्री की मौत के बाद सबसे अहम सवाल यह उठता है कि आखिर उनकी कार का एक्सीडेट कैसे हुआ? दिल्ली के अरविंदो चौक‌ पर उनकी कार की टक्कर कैसे हुई?

सूत्रों के अनुसार गोपीनाथ मुंडे की कार को टक्कर मारने वाले आरोपी ड्राइवर गुरविंदर ने पुलिस को बताया कि मुंडे के ड्राइवर ने रेड लाइट जंप की थी।

यही नहीं, उसने बताया कि उसकी गाड़ी से पहले कोई और गाड़ी मुंडे की कार से टकराई थी और वह कार चालक मौके से भाग निकाला, लेकिन गुरविंदर ने टक्कर के बाद हिम्मत दिखाई और खुद पीसीआर को कॉल कर मौके पर बुलाया।

क्यों नहीं था कोई सिपाही?

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जिस लाइट सिग्नल पर हादसा हुआ है, उससे सटा हुआ ट्रैफिक पुलिस का बूथ है। दुर्घटना के समय वहां एक भी पुलिसकर्मी तैनात नहीं था। विशेष पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक) ताज हसन ने बताया कि ट्रैफिक पुलिसकर्मी सुबह सात बजे से रात 11 बजे तक ड्यूटी पर रहते हैं।

राजधानी में 863 सिग्नल और 419 ब्लिंकर्स हैं। छह हजार जवान ट्रैफिक को संचालित करते हैं। दिल्ली में रात में वाहन बेलगाम हो जाते हैं और उस समय न तो ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात होते हैं और न ही सिग्नल काम करते हैं।

अधिकारियों का कहना है कि राजधानी में ट्रैफिक पुलिस के 43 सर्किल हैं। रात में आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए हर सर्किल में कुछ पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जाती है, लेकिन उस वक्त किसी सिपाही का वहां न होना भी ट्रैफिक व्यवस्‍था पर सवाल खड़े करता है।

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क्या मुंडे के ड्राइवर ने नहीं देखा सिग्नल?

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अरविंदो मार्ग से अगर पृथ्वीराज रोड के लाइट सिग्नल को देखें तो वह दिखाई नहीं देता है। अरविंदो मार्ग से पृथ्वीराज रोड की तरफ वाला सिग्नल थोड़ा सा दाईं तरफ है।

पृथ्वीराज रोड से आते हुए वाहन उस समय दिखाई देते हैं जब वह सिग्नल पर बीच में आ जाते हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि भाजपा नेता की गाड़ी ग्रीन सिग्नल से गुजर रही थी और रेड लाइट होने में 26 सेकेंड का समय बचा था।

जबकि गुरविंदर को ग्रीन लाइट होने के लिए 13 सेकेंड इंतजार करना था, मगर उसने किया नहीं। यह भी पता चला है कि घटना से पहले यानी 6 बजे से पहले यह रेड लाइट ब्लिंकर पर थी।

तो पता चल जाता किसकी है गलती

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जिस जगह हादसा हुआ है, वहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। दिल्ली पुलिस की एफएसएल को मौके पर बुलाया गया था। इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही पता लग सकेगा कि किस गाड़ी ने लाइट जंप की थी।

जांच के लिए तुगलक रोड थाने में हादसे का रीक्रिएशन किया गया। दोनों गाड़ियों को उस तरह खड़ा किया गया, जैसे वे दुर्घटना के समय थी।

एसएफएल की टीम यह देखना चाहती थी कि दोनों गाड़ियां कितनी रफ्तार से टकराई थीं। रिपोर्ट आने के बाद गाड़ियों की स्पीड़ का पता लग जाएगा। वहीं, इंडिका कार के चालक गुरविंदर का कहना है कि वह एसएक्स-4 को देख नहीं पाया था।

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