मथुरा जमीन घोटाले से उठने लगा पर्दा, सामने आ रहे हैं कई अधिकारियों और उनके रिश्तेदारों के नाम
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यमुना प्राधिकरण के मथुरा क्षेत्र में 126 करोड़ रुपये के जमीन घोटाले में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। सीबीआई को मामले की जांच सौंपने से खलबली मच गई है। धीरे-धीरे अफसरों व उनके रिश्तेदारों के गठजोड़ से हुए घोटाले ती परतें खुल रही हैं। 2014 में बिना जरूरत के मथुरा के सात गांवों मादौर, सेउपट्टी बांगर, सेउपट्टी खादर, कौलाना बांगर, कौलाना खादर, सौतीपुरा बांगर व नौहझील बांगर में 57.15 हेक्टेयर जमीन 85.5 करोड़ रुपये में खरीदी गई थी।
ब्याज लगाकर इसके एवज में कुल 126 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जबकि इस जमीन पर प्राधिकरण की कोई परियोजना प्रस्तावित नहीं थी। अब भी यह जमीन खाली पड़ी है। उस समय की मुआवजे की तय दर से अधिक पर जमीन खरीदी गई। उस समय यीडा की मुआवजा दर 693 और कुछ जगह 1021 थी, जबकि 768 रुपये से लेकर 2268 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर पर जमीन खरीदी गई।
जांच में पता चला कि जिन लोगों से प्राधिकरण ने जमीन खरीदी उन्होंने किसानों से तीन से चार माह पहले ही इसे खरीदा था। जमीन खरीदने वालों में तत्कालीन सीईओ पीसी गुप्ता व अन्य अधिकारियों के कई परिचित भी शामिल थे।
खुल सकते हैं कई घोटालों के राज
मथुरा जैसे कई और मामले यमुना प्राधिकरण व ग्रेनो प्राधिकरण में हैं। जहांगीरपुर में 80 करोड़ रुपये की जमीन खरीदी गई, जबकि उस समय यमुना प्राधिकरण के पास जमीन थी। इसकी भी शिकायत पर जांच हुई है। जांच रिपोर्ट बनाकर चेयरमैन को भेज दी गई है। कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए मास्टर प्लान से बाहर की जमीन खरीदी गई थी।
वहीं जेवर से आगे 22 गांवों की जमीन खरीद घोटाले में भी गड़बड़ी हुई थी। इसमें भी करोड़ों रुपये की जमीन बिना किसी ठोस प्लान के खरीद ली गई। इसकी भी जांच चल रही है। इसी तरह हिंडन के डूब क्षेत्र में जमीन खरीद ली गई। इससे करीब 23 करोड़ रुपये का नुकसान ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को हुआ है। कई घोटालों में कुछ नाम कॉमन हैं। इनमें अधिकारियों के साथ ही नेताओं के भी नाम हैं।