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अनुत्तरित प्रश्न: सेप्टिक टैंक में मैनुअल सफाई पर रोक, फिर मजदूर क्यों उतरते हैं जहरीले चैंबर में; कोई बोलेगा?

Sat, 27 Jun 2026 05:59 AM IST
दुष्यंत शर्मा धनंजय मिश्रा, दिल्ली
धनंजय मिश्रा, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 27 Jun 2026 05:59 AM IST
सार

सीवर और सेप्टिक टैंक की जब मैनुअल सफाई पर रोक है और मशीनों से सफाई के दावे किए जाते हैं, तो आखिर मजदूर अब भी जहरीली गैस से दम घुटने की मौत क्यों मर रहे हैं। सिस्टम भी इस बारे में मौन है।

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Manual cleaning of septic tanks is banned; why, then, do workers still descend into toxic chambers
हर स्तर पर चूक, इसलिए नहीं रुक रहीं मौतें... - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

मुंडका में तीन मजदूरों की मौत ने फिर उस सवाल को जिंदा कर दिया है, जिसका जवाब वर्षों से नहीं मिल सका है। सीवर और सेप्टिक टैंक की जब मैनुअल सफाई पर रोक है और मशीनों से सफाई के दावे किए जाते हैं, तो आखिर मजदूर अब भी जहरीली गैस से दम घुटने की मौत क्यों मर रहे हैं। सिस्टम भी इस बारे में मौन है। पिछले दिनों संसद में केंद्र सरकार ने भी स्वीकारा है कि 2017 से 17 मार्च 2026 तक देश में 622 मजदूरों और दिल्ली 62 मजदूर ऐसे ही हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं।

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देश में हाथ से मैला उठाने पर रोक लगाने के लिए 2013 में कानून बनाया गया। सर्वोच्च न्यायालय ने 2014 और फिर 2023 में स्पष्ट निर्देश दिए कि सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई पूरी तरह सुरक्षित और अधिकतम मशीनीकृत तरीके से होनी चाहिए लेकिन सरकार के आंकड़े तो इस निर्देश के पालन नहीं होने की गवाही देते हैं। दिल्ली सीवर नेटवर्क और सेप्टिक टैंक दोनों व्यवस्थाएं साथ-साथ चलती हैं। नियोजित कॉलोनियों के बड़े हिस्से में जहां सीवर लाइनें हैं, जबकि अनधिकृत कॉलोनियों, पुराने गांवों, फार्महाउसों, छोटे औद्योगिक परिसरों और कई निजी संस्थानों में आज भी सेप्टिक टैंक प्रचलन में हैं। इनकी सफाई का बड़ा हिस्सा निजी स्तर पर कराया जाता है, जहां निगरानी और सुरक्षा मानकों का पालन अक्सर सवालों के घेरे में रहता है।
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सेप्टिक टैंक और सीवर सफाई के लिए हैं नियम
किसी भी व्यक्ति को बिना सुरक्षा इंतजाम के सीवर या सेप्टिक टैंक में उतारना प्रतिबंधित है। यदि विशेष परिस्थिति में अंदर जाना जरूरी हो, तो पहले टैंक की जहरीली गैसों और ऑक्सीजन स्तर की जांच करना, पर्याप्त वेंटिलेशन सुनिश्चित करना, सफाई कर्मी को हेलमेट, फुल बॉडी पीपीई किट, दस्ताने, गमबूट, हार्नेस, गैस डिटेक्टर और आवश्यकता होने पर श्वसन उपकरण उपलब्ध कराना अनिवार्य है। मौके पर प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था भी होनी चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने फैसलों में राज्यों और स्थानीय निकायों को इन सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराने और उल्लंघन की स्थिति में जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं।
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मशीनें हैं, लेकिन सही इस्तेमाल नहीं...
निजी स्तर पर सेप्टिक टैंक की सफाई में सक्शन मशीनों और अन्य उपकरणों का इस्तेमाल पहले की तुलना में बढ़ा है, लेकिन बड़ी समस्या इनके अधूरे या गलत उपयोग की है। कई मामलों में मशीन से केवल तरल अपशिष्ट निकाला जाता है, जबकि टैंक के तल में जमी ठोस गाद हटाने के लिए मजदूरों को भीतर उतार दिया जाता है। बिना गैस जांच, पर्याप्त वेंटिलेशन और सुरक्षा उपकरणों के ऐसा करना जानलेवा साबित होता है। मशीन ऑपरेटरों और ठेकेदारों के प्रशिक्षण की कमी हादसों की बड़ी वजह है।

हर स्तर पर चूक, इसलिए नहीं रुक रहीं मौतें...
लगभग हर हादसे की जांच में एक जैसी खामियां सामने आती हैं। सेप्टिक टैंक में उतरने से पहले जहरीली गैसों और ऑक्सीजन स्तर की जांच नहीं की जाती, जबकि यह अनिवार्य सुरक्षा प्रक्रिया है। अधिकांश मामलों में सफाईकर्मियों को ऑक्सीजन सिलेंडर, हार्नेस, गैस डिटेक्टर, पीपीई किट और अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते। हादसों के बाद सामने आता है कि सफाई का काम प्रशिक्षित एजेंसियों की बजाय निजी ठेकेदारों या दिहाड़ी मजदूरों से कराया गया था। दिल्ली नगर निगम निर्माण समिति के पूर्व अध्यक्ष जगदीश ममगाई ने बताया कि समस्या केवल लापरवाही की नहीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था की भी है। कई मामलों में लागत बचाने के लिए मशीनीकृत सफाई की बजाय मजदूरों को सीधे टैंक में उतार दिया जाता है।

हाल में हुए बड़े हादसे...

  • 22 अगस्त 2025 : बाहरी दिल्ली के लिबासपुर इलाके में कमर्शियल-कम-रेसिडेंशियल बिल्डिंग के बड़े सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान दो मजदूरों की दम घुटने से मौत हो गई।
  • 17 मई 2024 : बवाना इंडस्ट्रियल एरिया की एक फैक्ट्री में बने सेप्टिक टैंक की सफाई करने उतरे दो सगे भाइयों की दर्दनाक मौत हो गई।
  • 24 मार्च 2023 : पूर्वी दिल्ली के पटपड़गंज इंडस्ट्रियल एरिया स्थित निजी फैक्ट्री के गहरे सीवर/सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान एक की मौत हो गई।
  • 30 मार्च 2022 : रोहिणी इलाके में चार लोगों की सीवर में फंसने से मौत हो गई है। चारों लोगों के शव को एनडीआरएफ की टीम ने रात भर रेस्क्यू ऑपरेशन करके निकाला
  • 27 मार्च 2021 : पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर में बैंक्वेट हाल के सेप्टिक टैंक के सफाई के दौरान हुई मौत।
  • 11 अक्तूबर 2020 : बदरपुर इलाके में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान दो लोगों की मौत हुई जबकि एक गंभीर हालत बनी।
  • 7 मई 2019 : भाग्य विहार, मुबारकपुर डबास स्थित निर्माणाधीन मकान के सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान दो मजदूरों की मौत हुई।
  • 9 सितंबर 2018 : डीएलएफ कैपिटल ग्रीन्स, मोती नगर के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की सफाई के दौरान पांच मजदूरों की मौत हो गई। जांच में सामने आया कि वे प्रशिक्षित सीवर कर्मी नहीं, बल्कि हाउसकीपिंग स्टाफ थे और उन्हें बिना सुरक्षा उपकरण टैंक में उतारा गया था।
  • 6 अगस्त 2017 : लाजपत नगर में दिल्ली जल बोर्ड की सीवर लाइन की सफाई के दौरान बिना सुरक्षा उपकरण उतरे तीन सफाई कर्मचारियों की जहरीली गैस से मौत हो गई।
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