मनोज वशिष्ठ एनकाउंटर : किसके दावे में कितना सच ?
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मनोज वशिष्ठ शनिवार को (एनकाउंटर के दिन) दोपहर घर से राजनीतिक और बिजनेस मीटिंग के लिए अपनी गाड़ी और ड्राइवर के साथ घर से निकला था।
मनोज के गाड़ी के चालक अन्नू यादव ने बताया कि मनोज शनिवार दोपहर करीब दो बजे वसंत कुंज स्थित राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी से मिलने उनके फार्म हाउस पर गए थे। चौधरी से मुलाकात के बाद मनोज वशिष्ठ उत्तर प्रदेश भवन चले गए।
चालक अन्नू यादव ने बताया कि संजय वोहरा से बिजनेस मीटिंग के लिए रात करीब आठ बजे मनोज राजेंद्र नगर स्थित उस रेस्टोरेंट में पहुंचे जहां एनकाउंटर किया गया। अन्नू ने बताया कि पार्किंग की दिक्कत की वजह से मनोज ने कहा कि तुम यहीं रुको 15 मिनट में आता हूं। थोड़ी देर बाद ही वहां हंगामा मच गया और पुलिस आने-जाने लगी तब उसे घटना के बारे में पता चला।
मनोज वशिष्ठ के एक रिश्तेदार दिवाकर ने बताया कि दो-ढाई माह पहले ही संजय वोहरा से मुलाकात हुई थी। संजय वोहरा से ही मिलने रेस्टोरेंट गया था मनोज। परिजनों ने संजय पर सीधे तौर पर तो कोई आरोप नहीं लगाया लेकिन उन्हें संदेह है कि कुछ गड़बड़ हो सकता है।
पुलिस के रिकॉर्ड में मनोज
मनोज वशिष्ठ खुद को बिल्डर बताता था। वह लोगों को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में लगाने का झांसा देकर मोटी रकम ठग लेता था। पीड़ित जब उससे पैसे मांगते थे तो वह बाउंसर के जरिये उन्हें चुप रहने की धमकी दिलवाता था। मनोज वशिष्ठ के खिलाफ कई राज्यों में मामले दर्ज हैं।
पुलिस ने उसके खिलाफ दर्ज सात आपराधिक मामलों की लिस्ट तैयार की है। सभी मामले जालसाजी व धोखाधड़ी के हैं। स्पेशल सेल के पुलिस अधिकारियों के अनुसार वह रियल एस्टेट में निवेश कराकर पैसे दोगुना करने का झांसा देता था।
उसने आरसीएस ग्रुप के तहत आरसी बिल्डर्स एंड डेवलपर्स, आरसीएस फाइनेंस लिमिटेड, आरसी प्रॉपर्टी लिमिटेड आदि कंपनियां बना रखी थीं। इसके ऑफिस गणेश नगर और कनॉट प्लेस की अरुणाचल बिल्डिंग में थे।
दिल्ली में दर्ज मामले
मनोज ने 6 अक्तूबर, 2014 को पुल प्रह्लादपुर निवासी देवेश वर्मा से 27 लाख रुपये की ठगी की थी। देवेश को वीर हाईटस प्रोजेक्ट के तहत बन रहे फ्लैट बेचने का झांसा दिया था।
इस मामले में मनोज और उसकी पत्नी प्रियंका व अन्य के खिलाफ भी आरोप हैं। वहीं मनोज ने 27 मार्च, 2014 को गाजियाबाद निवासी ए. मोला राव से 28 लाख रुपये की ठगी की थी। इस बाबत भी दिल्ली के बाराखंभा थाने में मामला दर्ज है।
जालंधर, पंजाब के रिटायर आर्मी ऑफिसर सुरजीत सिंह ने 15 सितंबर, 2013 में मनोज के खिलाफ दिल्ली के पटेल नगर थाने में 35 लाख रुपये की ठगी का मामला दर्ज कराया था।
वहीं दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में वर्ष 2002 में मामला दर्ज हुआ था। जो करीब 700 लोगों से 8 करोड़ रुपये की ठगी से जुड़ा था। इस मामले में मनोज, उसकी पत्नी प्रियंका, भाई अनिल, पंकज वशिष्ठ समेत छह लोग गिरफ्तार हुए थे।
केंद्रीय गृहमंत्री से मिला परिवार
वहीं, दिल्ली पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी ने सेंट्रल रेंज के संयुक्त आयुक्त के नेतृत्व में एसआईटी गठित करने की बात कही। सोमवार को मनोज के शव का लेडी हार्र्डिंग अस्पताल में डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम के बाद शव को परिवार वालों के हवाले कर दिया गया।
एनकाउंटर में मारे गए मनोज की पत्नी प्रियंका और भाई अनिल के साथ उसके माता-पिता भी सोमवार सुबह गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिले। प्रियंका ने बताया कि गृहमंत्री ने उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया। गृहमंत्री ने मामले की जांच एसआईऱ्टी से करवाने की बात कही और जरूरत पड़ने पर मामले को सीबीआई के हवाले करने का भरोसा दिलाया।
पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी ने पांच सदस्यीय एसआईटी गठित करने की बात कही। पुलिस आयुक्त ने बताया कि एसआईटी में सेंट्रल रेंज के संयुक्त आयुक्त के अलावा मध्य जिले के पुलिस उपायुक्त, क्राइम ब्रांच के एसीपी और दो अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं। एसआईटी ने मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस ने रेस्टोरेंट में मौजूद उन 13 गवाहों का बयान 161 के तहत दर्ज करवाए है।