{"_id":"5ba674f4867a557ff47de4ef","slug":"manish-sisodia-and-59-others-discharged-in-case-related-to-2014-protest-in-front-of-tihar","type":"story","status":"publish","title_hn":"तिहाड़ जेल के बाहर प्रदर्शन मामला, मनीष सिसोदिया सहित 59 बरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तिहाड़ जेल के बाहर प्रदर्शन मामला, मनीष सिसोदिया सहित 59 बरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 22 Sep 2018 10:29 PM IST
विज्ञापन
manish sisodia
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अदालत ने तिहाड़ जेल के समक्ष प्रदर्शन व सरकारी कार्य में बाधा पंहुचाने के मामले में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, आप विधायक अमानतुल्ला, स्वराज इंडिया के योगेन्द्र यादव सहित अन्य आरोपियों को राहत प्रदान कर दी। अदालत ने सभी को आरोपमुक्त करते हुए कहा पुलिस मामले में ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर पाई। इतना ही नहीं अदालत ने जांच में लापरवाही बरतने पर पुलिस को फटकार भी लगाई है।
विज्ञापन
पटियाला हाउस स्थित अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल ने अपने फैसले में कहा कि सभी तथ्यों व साक्ष्यों का अध्ययन करने के बाद वे महसूस करते है कि पुलिस मामले में ठोस साक्ष्य पेश करने में असफल रही है। अदालत ने कहा जो साक्ष्य पेश किए गए हैं उसके आधार पर आरोप साबित नहीं होता। ऐसे में वे सभी आरोपियों को बरी करते है।
विज्ञापन
अदालत ने पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह घटना 21 मई 2014 की है और जो आरोप लगाए गए हैं उसमें मात्र दो वर्ष तक की कैद का प्रावधान है। इसके अलावा जांच पूरी करने का प्रावधान तीन वर्ष है। अदालत ने कहा पुलिस ने मामले में 2 मई 2018 को आरोप दायर किया जबकि जांच पूरी करने की अवधि एक वर्ष पहले ही खत्म हो गई थी।
विज्ञापन
अदालत ने कहा पेश दस्तावेजों से स्पष्ठ है कि पुलिस ने जांच संबंधी पूरी प्रक्रिया 22 मई 2014 को ही कर ली थी और उसके बाद कुछ नहीं किया। यह सरासर जांच अधिकारी की लापरवाही है कि उसने चार वर्ष बाद आरोप पत्र दायर किया और वे यह भी स्पष्ट नहीं कर पाया कि चार वर्ष की देरी क्यों हुई। इतना ही नहीं संबंधित थानाध्यक्ष व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी जांच पर निगरानी रखने में असफल रहे है।
अदालत ने कहा सभी आरोपी राजनीतिक पार्टी से है और आरोप भी गंभीर प्रकृति का नहीं है। मामले में पुलिस ने एक भी पुलिसकर्मी के धारा 161 के तहत बयान दर्ज नहीं किए। स्पष्ट है कि मामले में कोई पीड़ित नहीं है। ऐसे में जांच में लापरवाही और कोई ठोस साक्ष्य न होने के चलते आरोपियों के खिलाफ कोई अपराध साबित नहीं होता।
यह मामला मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मानहानि से जुड़ा है। वर्ष 2014 में अदालत द्वारा भाजपा नेता एवं केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की ओर से मानहानि की शिकायत पर समन के बाद अरविंद केजरीवाल ने जमानत लेने से इनकार कर दिया था। इसके बाद अदालत ने केजरीवाल को दो दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। इसके विरोध में आप के नेता मनीष सिसोदिया, योन्द्र यादव सहित अन्य कार्यकर्ता तिहाड़ जेल के बाहर जमा हो गए थे और पुलिस से भिड़ गए थे।
पुलिस ने मनीष सिसोदिया, योगेन्द्र यादव, अमानतुल्ला, संजीव झा सहित 59 लोगों के खिलाफ जबरन प्रदर्शन, सरकारी काम में बाधा पंहुचाने, निषेधाज्ञा तोडने इत्यादि आरोप में आरोपपत्र दायर किया था।
बरी आरोपियों के नाम
मनीष सिसोदिया, संजीव कुमार, जरनैल सिंह, योगेन्द्र यादव, राम कुमार शमाढ, अमानतुल्ला खान, संजीव कुमार झा और योगेश यादव इत्यादि सहित कुल 59।