जुनैद के गांव में फीकी पड़ी सिवईयां की मिठास, अब इस तरीके से ईद मनाएंगे लोग
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धार्मिक उन्माद में अंधे कुछ लोगों की साजिश से खंदावली गांव के तमाम लोगों की खुशियों पर ग्रहण लगा दिया है। जुनैद की मौत से गांव में ईद की तैयारियां फीकी पड़ गई हैं। गमगीन माहौल में गांव के लोगों ने सिर्फ नमाज अदा कर ईद मनाने का फैसला लिया है। यहां सिवईयां नहीं बनेंगी। लोगों ने ईद पर रिश्तेदारों को गांव आने से भी मना करना शुरू कर दिया है।
ईद को मात्र तीन दिन बचे हैं। बच्चों को नए कपड़े मिलने का इंतजार है। फैजल ने रमजान शुरू होते ही अब्बा से कह दिया था इस बार शेरवानी सिलवाएगा। अब्बा ने वायदा भी किया था और उसके मुताबिक कपड़ा खरीदकर टेलर को सिलने के लिए दे दिया। साथ ही टेलर को बता दिया गया था कि मियां ईद से चार दिन पहले ही कपड़े दे देना।
इब्राहीम खुद टेलर हैं। उनके लिए अपने घर के बच्चों के लिए नए कपड़े सिलना भला कौन सी बड़ी बात है। सोचा था ईद पर काफी कपड़े सिलने को मिलेंगे। सिलाई करने से मिले रुपयों से बच्चों के लिए कपड़ा खरीदने के साथ ही कुछ अनाज भी खरीदकर रख लिया जाएगा। चौमास चल रहा है, आगे फुटकर में राशन नहीं खरीदना पड़ेगा।
उधर, मजदूरी कर परिवार का गुजर-बसर करने वाले सुहानी सोचा था कि बिटिया की जींस की पैंट की जिद इस बार जरूर पूरी करेंगे। मगर इस प्रकार के माहौल में सब कुछ फीका हो गया। अमीना भी परेशान है। रमजान में कॉस्मेटिक का सामान बेचकर मुनाफा कमाने को सोचा था। इसके लिए रिश्तेदार से 50 हजार रुपये उधार लेकर सामान भी वह ले आई थी मगर दो दिन से खरीददारी बिल्कुल बंद है।
हाजी रहमू भी बहुत परेशान हैं। उसकी गांव में परचून की दुकान है। दुकान में सिवईयां खरीद कर रखी थी लेकिन वह नहीं बिक रही। सब्बीर खान ने बताया कि गांव में अब खुशी का माहौल नहीं है। इस बार न रिश्तेदार आएंगे और न ही किसी पड़ोसी को ईदी दी जाएगी। लोग सिर्फ नमाज अदा कर ईद मनाएंगे।
13 साल की उम्र में ही जुनैद ने पढ़ लिया था कलमा
पड़ोसी जमील खान ने बताया कि जुनैद काबिल लड़का था। उसने 13 साल की उम्र में कलाम पाक को हीफज (जुबानी रटना) कर लिया था। ईद के दौरान वह 500 नमाजियों को तरावी पढ़ाता था। जिसके बदले में नमाजियों ने हदिया (उपहार) के रूप में 20 हजार रुपये दिए थे। इन्हीं 20 रुपयों को लेकर वह सदर बाजार ईद की खरीदारी करने के लिए गया था। जहां उसने ईद के लिए नए कपड़े, घड़ी, नया पेन, मिठाई, किताबें खरीदी थी।
पेशे से चालक जुनैद के पिता जलालुद्दीन ने बताया कि उनका बेटा नूंह (मेवात) स्थित मदरसे में पढ़ाई कर रहा था। जब वह पांच साल का था, तभी उसे मदरसे में दाखिल करा दिया था। वह कभी-कभी गांव आता था। वे ही नूंह जाकर मदरसे में खर्चा जमा करा देते थे। ईद मनाने के लिए 22 जून को वह घर आया था।