शादीशुदा रहते हुए दूसरी शादी करना पड़ गया महंगा, हाईकोर्ट ने ठहराया रेप का दोषी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट ने विवाहित होने के बावजूद स्वयं को अविवाहित बताकर दूसरा विवाह करने वाले व्यक्ति को दुष्कर्म के आरोप में दोषी ठहराया है। अदालत ने उसे सात वर्ष कैद की सजा सुनाई है।
न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने अपने फैसले में कहा कि सभी तथ्यों से स्पष्ट है कि आरोपी ने स्वयं को अविवाहित बताकर पीड़िता से विवाह किया था। आरोपी ने उसे अंधेरे में रखा और उससे शारीरिक संबंध बनाए। यह सरासर दुष्कर्म की श्रेणी का अपराध है।
अदालत ने आरोपी की निचली अदालत के निर्णय के खिलाफ दायर अपील खारिज करते हुए कहा कि उसे सात वर्ष कैद संबंधी निर्णय में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है।
पेश मामले के अनुसार पीड़िता की करोलबाग इलाके में दुकान थी। इसी दौरान आरोपी दुकान पर बैंक की ऋण की किस्त लेने आता था। दोनों में जान पहचान हुई। आरोपी ने लड़की की मां के सामने पीड़िता से विवाह का प्रस्ताव रखते हुए स्वयं को अविवाहित बताया।
इसके बाद परिवार वालों की मर्जी से आरोपी ने 21 जुलाई 2008 को लड़की से शादी कर ली। शादी के बाद आरोपी ने करोलबाग के एक होटल में लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाए। अगले दिन वह पटेल नगर स्थित एक किराए के घर में लड़की को लेकर गया और वहीं रहने लगा।
लड़की ने लगाए थे ये आरोप
लड़की का आरोप था कि पटेल नगर में रहने के दौरान आरोपी घर देरी से आता था। साथ ही 25 जुलाई को उसके पति ने बताया कि वह बैंक टूर पर जा रहा है ऐसे में 10 अगस्त तक लौटेगा और वह मायके चली जाए। इसके बाद आरोपी वापस आया और बहन के घर राखी पर गया। यही सिलसिला चलता रहा। इतना ही नहीं आरोपी ने कहा कि वह बच्चा नहीं चाहता।
एक दिन जब वह मायके जाने के लिए सामान पैक कर रही थी तो उसके हाथ आरोपी का राशन कार्ड लगा, जिससे पता चला कि वह पहले से विवाहित है और उसका एक बच्चा भी है। पुलिस ने उसकी शिकायत नहीं लिखी, आखिर अदालत के निर्देश पर मामला दर्ज किया गया और आरोपी को गिरफ्तार किया गया। निचली अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए सात वर्ष कैद की सजा सुना दी थी।