दिल्ली से जुड़े इन दो धुरंधरों को मिला मैगसेसे पुरस्कार
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लगातार सुर्खियों में रहे वन सेवा अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। संजीव चतुर्वेदी 2002 बैच के वन सेवा अधिकारी हैं।
संजीव चतुर्वेदी से पहले किरण बेदी को इस पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। चतुर्वेदी एक ऐसे अधिकारी हैं जिन्हें भ्रष्टाचार के बड़े मामलों को उजागर करने के लिए जाना जाता है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई छेड़ने की वजह से संजीव के साथ कई विवाद भी जुड़ गए। इस साल 5 शख्सियतों को ये पुरस्कार दिया जा रहा है, जिसमें दो भारतीय शामिल हैं।
इस वजह से मिलेगा ये सम्मान
संजीव चतुर्वेदी को पिछले साल एम्स के सीवीओ पद से हटा दिया गया था। जिसके बाद ये मामला लगातार विवाद पकड़ता गया। कहा जा रहा था कि एम्स में भ्रष्टाचार की लड़ाई छेड़ने की वजह से संजीव को पद से हटाया गया था।
चतुर्वेदी हरियाणा काडर के अफसर हैं और अपने क्रांतिकारी विचारों के लिए जाने जाते हैं। संजीव चतुर्वेदी को ये पुरस्कार सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर करने के लिए दिया गया है।
संजीव चतुर्वेदी के अलागा गूंज एनजीओ के संस्थापक अंशु गुप्ता को भी मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया जाना है। अंशु की गूंज संस्था गरीबों की जरूरतों को पूरा करने और उनकी मदद के लिए काम करती है।
कौन हैं वो पांच जिन्हें मिलेगा पुरस्कार
जिन पांच लोगों को ये पुरस्कार दिया जाना है उनमें दो भारतीय अंशु गुप्ता और संजीव चतुर्वेदी के अलावा कोमाली छातोवोंग (Kommaly Chanthavong) लाओस से, लिगाया फरनांडो (Ligaya Fernando) फिलीपींस से, क्यू थू Kyaw Thu (म्यांमार) से हैं।
1957 में बना रेमन मैग्सेसे पुरस्कार एशिया का नोबेल पुरस्कार भी कहा जाता है। फिलिपीन के तीसरे राष्ट्रपति की स्मृति के रूप में ये पुरस्कार किसी एक व्यक्ति या संस्था के द्वारा समाज के हित में काम करने पर दिया जाता है।
इसके अलावा साहित्यिक, पत्रकारिता, प्रशासनिक व सामुदायिक क्षेत्र में भी विशेष काम करने पर ये सम्मान प्रदान किया जाता है।