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Delhi NCR News: चिप्स-बिस्किट के बदले कराते थे काम, दक्षिणी दिल्ली से 11 बाल मजदूर मुक्त कराए
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के तिगड़ी इलाके में बाल मजदूरी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 11 बच्चों को अलग-अलग दुकानों और सड़क किनारे चलने वाले प्रतिष्ठानों से मुक्त कराया गया। मुक्त कराए गए बच्चों की उम्र छह से 17 वर्ष के बीच है। इनमें दो बच्चों को मजदूरी के बदले चिप्स और बिस्किट दिए जाने का मामला सामने आया है। एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन (एवीए) से मिली सूचना के आधार पर तिगड़ी थाना क्षेत्र में संयुक्त अभियान चलाया गया। कार्रवाई के दौरान छह और 10 साल के दो बच्चे चप्पल की दुकान पर काम करते मिले। संस्था के अनुसार, दुकान संचालक उन्हें मजदूरी देने के बजाय चिप्स और बिस्किट देता था। 11 में से पांच बच्चों को कोई मजदूरी नहीं दी गई थी, जबकि अन्य बच्चों को भी कथित तौर पर बेहद कम राशि दी जा रही थी।
बिहार, यूपी और महाराष्ट्र के हैं बच्चे
मुक्त कराए गए बच्चे बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। जांच में सामने आया कि बच्चे बिना उचित मजदूरी और जरूरी सुरक्षा इंतजामों के काम कर रहे थे। कार्रवाई के बाद बच्चों से एसडीएम ने बयान दर्ज किए और उनके काम करने की परिस्थितियों की जांच शुरू की गई।
11 प्रतिष्ठान सील
अभियान में देओली तहसीलदार, श्रम विभाग, पुलिस, बाल विकास विभाग, एवीए और बाल विकास धारा के प्रतिनिधि शामिल रहे। कार्रवाई के दौरान जिन 11 प्रतिष्ठानों में बच्चे काम करते मिले, उन्हें सील कर दिया गया। सभी बच्चों का चिकित्सकीय परीक्षण कराने के बाद उन्हें बाल गृह भेज दिया गया। मामले में आगे की जांच जारी है।
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नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के तिगड़ी इलाके में बाल मजदूरी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 11 बच्चों को अलग-अलग दुकानों और सड़क किनारे चलने वाले प्रतिष्ठानों से मुक्त कराया गया। मुक्त कराए गए बच्चों की उम्र छह से 17 वर्ष के बीच है। इनमें दो बच्चों को मजदूरी के बदले चिप्स और बिस्किट दिए जाने का मामला सामने आया है। एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन (एवीए) से मिली सूचना के आधार पर तिगड़ी थाना क्षेत्र में संयुक्त अभियान चलाया गया। कार्रवाई के दौरान छह और 10 साल के दो बच्चे चप्पल की दुकान पर काम करते मिले। संस्था के अनुसार, दुकान संचालक उन्हें मजदूरी देने के बजाय चिप्स और बिस्किट देता था। 11 में से पांच बच्चों को कोई मजदूरी नहीं दी गई थी, जबकि अन्य बच्चों को भी कथित तौर पर बेहद कम राशि दी जा रही थी।
बिहार, यूपी और महाराष्ट्र के हैं बच्चे
मुक्त कराए गए बच्चे बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। जांच में सामने आया कि बच्चे बिना उचित मजदूरी और जरूरी सुरक्षा इंतजामों के काम कर रहे थे। कार्रवाई के बाद बच्चों से एसडीएम ने बयान दर्ज किए और उनके काम करने की परिस्थितियों की जांच शुरू की गई।
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11 प्रतिष्ठान सील
अभियान में देओली तहसीलदार, श्रम विभाग, पुलिस, बाल विकास विभाग, एवीए और बाल विकास धारा के प्रतिनिधि शामिल रहे। कार्रवाई के दौरान जिन 11 प्रतिष्ठानों में बच्चे काम करते मिले, उन्हें सील कर दिया गया। सभी बच्चों का चिकित्सकीय परीक्षण कराने के बाद उन्हें बाल गृह भेज दिया गया। मामले में आगे की जांच जारी है।
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