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अमर उजाला 'संवाद' में पहुंचे मनोज मुन्तशिर, बाहुबली के बारे में बताई ये बातें

Fri, 02 Jun 2017 10:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Fri, 02 Jun 2017 10:00 AM IST
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lyricist and TV writer Manoj Muntashir talks in amar ujala samvad session
मनोज मुन्तशिर - फोटो : अमर उजाला

'मैं उत्तर प्रदेश के अमेठी में पैदा हुआ हूं, इसका मुझे भाषा में फायदा मिला है। रात को सोने से पहले किताबों को पढ़ने की आदत ने मेरी भाषा पर पकड़ बढ़ा दी। यही वजह है कि बाहुबली- 2 में गाने और डायलॉग लिखने का अच्छा अनुभव रहा।

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जब मैं बाहुबली के डायलॉग लिख रहा था। हर कोई शख्स मुझ से कटप्पा ने बाहुबली को क्यो मारा, पूछता था। लेकिन मैंने किसी को नहीं बताया। यहां तक कि पत्नी को भी नहीं बताया। ये कहना है मशहूर शायर, पटकथाकार और संवाद लेखर मनोज मुन्तशिर का। 
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उन्होंने बृहस्पतिवार को नोएडा के सेक्टर- 59 स्थित अमर उजाला के कॉरपोरेट ऑफिस में आयोजित 'संवाद' में हिस्सा लिया।  एक विलेन फिल्म के गाने 'तेरी गलियां' से चर्चा में आए मनोज ने अपनी जिंदगी की तमाम बातें अमर उजाला से साझा की।
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बाहुबली-2 के लिए डायलॉग लिख चुके मनोज मुन्तशिर ने बताया, 'मैंने फिल्म के हर एक सीन को समझकर डायलॉग के साथ लिप्स मैच किए। एसएस राजामौली ने मुझे अपने अंदाज में लिखने की आजादी दी।'

बाहुबली के पसंदीदा डायलॉग के बारे में बताते हुए कहा कि उनको औरत पर हाथ डालने वाले की उंगलियां नहीं काटते, काटते हैं तो गला बहुत पसंद है। 

मनोज मुन्तशिर ने बताया कि वो भाषा के ज्ञान के लिए हर तरह की किताब पढ़ते थे। मायापुरी, मनारेमा से लेकर उर्दू के बड़े - बड़े लेखकों की किताबें पढ़ते थे। उन्होंने बताया कि मुझे लगता था कि मैं लिखने के लिए ही बना हूं। मुझे विश्वास था कि मैं इस क्षेत्र में जाऊंगा तो बेहतर करूंगा। 

1999 में किया मुंबई का रूख

lyricist and TV writer Manoj Muntashir talks in amar ujala samvad session
मनोज मुन्तशिर - फोटो : अमर उजाला

मनोज ने अपने संघर्ष के दिनों के बारे में बताया, 'मैं 1999 में मुंबई चला गया। मेरे पिता ने मुझे 700 रुपये दिए थे। जिसमें से 350 रुपये का मैंने मुंबई जाने के लिए रिजर्वेशन करा लिया था।

वहां से मेरे असली संघर्ष की कहानी शुरू हुई। इस दौरान मुझे फुटपाथ पर भी सोना पड़ा। लेकिन जब मुझे अमिताभ बच्चन ने सुना तो, उन्होंने मुझे मिलने के लिए बुलाया। एक होटल में करीब 15 से 20 मिनट मेरी मुलाकात हुई। उन्होंने मुझसे पूछा कि तुम कहां से हो, तो मैंने उनको बताया कि इलाहाबाद से मैंने पढ़ाई की है।' 

इस पर उन्होंने कहा कि मुझे इम्प्रेस करने की कोशिश मत करो। मैंने पढ़ाई नहीं बल्कि पूछा है कि तुम कहां के रहने वाले हो। उसके बाद मैंने बताया कि अमेठी का हूं। फिर 10 मिनट उन्होंने मुझे बोलने का मौका दिया।

इस दौरान मैंने बिना कुछ सोचे समझे बोलता गया। क्योंकि मेरी पास खोने को कुछ नहीं था। मुझे कौन बनेगा करोड़पति लिखने का मौका मिला। इसके बाद 3 महीने के अंदर मैं पुरी तरह से बदल गया था।

मैं राजनीति में कदम नहीं रखना चाहता हूं। ऐसा कोई शख्स नहीं, जिसके हर धर्म के दोस्त ना हो। मुझे नहीं पता क्यों ऐसी घटनाओं को तूल दिया जाता है। हालांकि ऐसा नहीं होना चाहिए।

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