कांग्रेस के लिए लकी रही है यह सीट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली की सर्वाधिक प्रतिष्ठित चांदनी चौक संसदीय सीट वैश्य बहुल होते हुए भी ज्यादातर समय कांग्रेस के कब्जे में रही। अब तक हुए 14 चुनाव में पांच बार ही इस सीट से गैर कांग्रेसी सांसद निर्वाचित हुए हैँ।
इस सीट से जीतने वाले सांसदों का कैरियर भी काफी ब्राइट होता है। यहां से जीते पहले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राधा रमन से लेकर सुभद्रा जोशी, सिकंदर बख्त, जेपी अग्रवाल, विजय गोयल और कपिल सिब्बल बड़े नाम राष्ट्रीय राजनीति में सामने आए हैं।
इनमें से राधा रमन मुख्य कार्यकारी पार्षद रहे तो जेपी अग्रवाल कांग्रेस तथा विजय गोयल भाजपा का प्रदेश नेतृत्व संभाल चुके हैं।
14 चुनाव में सिर्फ 5 बार गैर कांग्रेसी जीते
इस सीट पर 13 फीसदी मुस्लिम और 14 फीसदी पंजाबी मतदाता होते हुए भी बाजी हमेशा वैश्य या व्यापारी संगठन से जुड़ा उम्मीदवार ही मारता रहा है। आमतौर पर वैश्य सीट भाजपा की मानी जाती है, लेकिन 1957 से संसदीय सीट बनी चांदनी चौक पर कांग्रेस का ही दबदबा रहा है।
चौदह चुनाव में कांग्रेस ने नौ बार सीट जीती। जनसंघ, जनता पार्टी और भाजपा भी अलग-अलग समय पर इस सीट पर जीत हासिल कर चुकी है।
यहां से पहले सांसद स्वतंत्रता सेनानी राधा रमन इससे पूर्व दिल्ली सिटी से सांसद थे। बाद में दिल्ली के मुख्य कार्यकारी पार्षद भी बने। दूसरे सांसद लाला शामनाथ बने जिनके नाम से शामनाथ मार्ग है। सुभद्रा जोशी को यहां की जनता ने विजयी बनाया जो बाद में मध्य प्रदेश से भी सांसद बनीं। इन्होंने दिल्ली प्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व भी किया।
चांदनी चौक है वह सीट
देश में इमरजेंसी के बाद जब चुनाव हुआ तो चांदनी चौक सीट से जीत दर्ज करने वाले सिकंदर बख्त पहली बार में केन्द्रीय मंत्री बने। बाद में राज्यसभा में भाजपा ने उन्हें सांसद बनाया और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में विदेश मंत्री भी रहे।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाई और फिर केरल के राज्यपाल भी रहे। दिल्ली की राजनीति में सक्रिय चांदनी चौक के पुराने सांसदों में जेपी अग्रवाल उत्तर पूर्वी दिल्ली से सांसद हैं और सबसे लंबे समय तक दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे हैं।
विजय गोयल चांदनी चौक से दो बार जीते हैं। राज्यमंत्री रहे और प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रहे हैं। वर्तमान में राज्यसभा के सांसद हैं। वहीं इस सीट पर जीत हासिल करने वाले पहले पंजाबी कपिल सिब्बल हैं, जो अभी केन्द्रीय मंत्री हैं और कांग्रेस के नीति निर्धारण में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
इस बार भी होने वाला है रोमांचक मुकाबला
पुरानी दिल्ली या चांदनी चौक के नाम से जाना जाने वाला शहर का यह हिस्सा राजनीति की दृष्टि से बेहद अहम है। यहां से राधा रमन, शामनाथ, आर गोपाल, सुभद्रा जोशी, सिकंदर बख्त, भीकूराम जैन, जेपी अग्रवाल(तीन बार), ताराचंद खंडेलवाल, विजय गोयल व कपिल सिब्बल सांसद रह चुके हैं।
इस बार भी इस सीट पर बेहद रोमांचकारी मुकाबला देखने को मिलने वाला है। दरअसल इस बार कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल की टक्कर आप नेता आशुतोष से है। वहीं भाजपा के टिकट पर किरण बेदी के चुनाव लड़ने की भी चर्चाएं चल रही हैं।
जबकि चांदनी चौक का जातिगत समीकरण इस प्रकार है। ओबीसी 19, वैश्य 17, एससी 16, पंजाबी 14, मुस्लिम 13, ब्राह्मण 7, मध्य वर्ग 6, सिख 4, यादव, गुर्जर और जाट 4 प्रतिशत हैं।
क्या थी लोकसभा 2009 की तस्वीर
इस लोकसभा सीट पर कुल 14,13,535 मतदाता हैं। इसमें 7,83,545 पुरुष, 6,29,990 महिला हैं। जिसमें 7,80,445 ने मतदान किया था। तब कांग्रेस के दिग्गज नेता कपिल सिब्बल को 4,65,713, दूसरे स्थान पर भाजपा के विजेन्द्र गुप्ता 2,65,003 वोट मिले थे। इसमें जीत का मार्जिन 2,00,710 वोट का था।
इसमें पीतमपुरा, शकूरपुर, रामपुरा, जोरबाग, वजीरपुर, चन्द्रावल ग्रामीण क्षेत्र हैं। जहांगीरपुरी, शकूरपुर, वजीरपुर, लालबाग, हैदरपुर, मजनू का टीला जेजे कॉलोनी हैं। पॉश कॉलोनी व डीडीए फ्लैट वाले शालीमार बाग, पीतमपुरा, पश्चिम विहार, मॉडल टाउन, अशोक विहार, कमला नगर, सिविल लाइंस, रोहतगी अपार्टमेंट, राजनिवास मार्ग, अलीपुर रोड, पुलिस लाइंस, शक्ति नगर, लारेंस रोड, अशोक विहार फेस-1,2,3,3 हैं ।
वहीं आदर्श नगर, शालीमार बाग, शकूरपुर बस्ती, त्रिनगर, वजीरपुर, मॉडल टाउन, सदर बाजार, चांदनी चौक, मटिया महल, बल्लीमारन विधानसभाएं हैं।