लोकसभा चुनाव 2019: तीन खेमों में बंटे हैं दिल्ली के व्यापारी, भूमिका को लेकर मंथन में जुटे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लोकसभा चुनाव में दिल्ली का व्यापारी वर्ग अपनी भूमिका तलाश रहा है। व्यापारी मंथन में जुटे हैं कि अपना झुकाव किस पार्टी की तरफ रखें। सीलिंग से ना तो उन्हें आम आदमी पार्टी और ना ही केंद्र सरकार ने किसी तरह की राहत दी। दिल्ली के व्यापारी शुरू से दो खेमे में बंटे थे, पर जब से आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली में बनी तब से व्यापारी तीन खेमे में बंट गए हैं। आगामी लोकसभा चुनाव में किस पार्टी को व्यापारी वर्ग वोट करे, इसे लेकर असमंजस की स्थिति में है। जीएसटी, सीलिंग, किराया कानून से तो दिल्ली के सभी व्यापारी वर्ग परेशान हैं, बावजूद इनका खेमा बंटा हुआ है।
सभी दलों को भेजा चार्टर, उत्तर आने के बाद करेंगे समर्थन
अपनी भूमिका तलाशने के लिए कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ने कैंपेन शुरू किया है। कंफेडरेशन का दावा है कि दिल्ली के 19 लाख व्यापारियों व अपने करीब 30 लाख कर्मचारियों को एकजुट कर एक वोट बैंक बनाया जाएगा। इसे लेकर बैठकों का दौर जारी है। कंफेडरेशन का कहना है कि एक राष्ट्रीय चार्टर तैयार किया गया है, जिसे सभी दलों को भेजा गया है। राजनीतिक दलों का उत्तर आने पर व्यापारी तय करेंगे कि इस चुनाव में किस दल को समर्थन देना है।
क्या है लोकसभा क्षेत्र में व्यापारियों की स्थिति
| सीट | मतदाताओं की संख्या | व्यापारियों की संख्या |
| चांदनी चौक | 15,32000 | 4,00,000 |
| नई दिल्ली | 15,82000 | 2,00,000 |
| दक्षिणी दिल्ली | करीब 20 लाख | 2,00,000 |
| उत्तर पूर्वी दिल्ली | 22 लाख | 3,00,000 |
| पूर्वी दिल्ली | करीब 20 लाख | 2.5 लाख |
| पश्चिमी दिल्ली | 23 लाख | 2.75 लाख व्यापारी |
| उत्तर पश्चिमी दिल्ली | 23 लाख | 3 लाख |
क्या कहते हैं व्यापारी
राजनीतिक दलों को केवल चुनाव के समय में व्यापारियों की याद आती है। व्यापारियों को भाजपा का वोट बैंक समझा जाता है इसलिए अन्य पार्टियां व्यापारियों से दूरी बनाकर रखती हैं जबकि भाजपा व्यापारियों को कोई महत्व नहीं देती है। इस बार के चुनावों में व्यापारियों को एक वोट बैंक के रूप में बदलने के लिए हम बैठक कर रहे हैं। 150 से अधिक बैठक अभी तक हुई है। - विपिन आहूजा, प्रदेश अध्यक्ष , कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स
20 हजार दुकानें सील करने से लाखों व्यापारियों का रोजगार छिन गया है। भाजपा सीलिंग के मुद्दे से अपना पल्ला झाड़ रही है। केंद्र सरकार चाहती तो संसद में अध्यादेश लाकर दिल्ली में व्यापारियों के रोजगार पर चल रहे बुलडोजर को रुकवा सकती थी। दिल्ली के व्यापारियों ने इस बार आह्वान किया है कि चुनाव में एक भी व्यापारी भाजपा के समर्थन में वोट नहीं करेगा। - बृजेश गोयल, संयोजक, आप व्यापार प्रकोष्ठ
जीएसटी, सीलिंग से व्यापारी वर्ग बेहद परेशान है। कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में जीएसटी के सरलीकरण की बात की है। छोटे, मझोले व उद्योग को ऋण देने की बात करके कांग्रेस ने राहत देने की बात की है। व्यापारी वर्ग दिल्ली सरकार व केंद्र सरकार से नाराज हैं। जो दल व्यापार को बढ़ावा देने की बात करेगा व्यापारी उसी पार्टी को वोट देंगे। - अजय अरोड़ा, संयोजक, स्टेट ट्रेडर्स कांग्रेस
व्यापारियों के मुद्दे
सीलिंग, किराया कानून, सरकारी विभागों में निचले स्तर पर भ्रष्टाचार, एमसीडी का लाइसेंस संबंधित कानून, बाजारों में दिन के समय माल की लोडिंग एवं अनलोडिंग पर प्रतिबंध, बाजारों की खस्ता हालत, पुख्ता सुरक्षा का कोई बंदोबस्त नहीं। ई-कॉमर्स एवं रिटेल में एफडीआई ।