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होते-होते रह गया आप-कांग्रेस का गठबंधन, दोस्ती न होने की ये हैं बड़ी वजह

Mon, 22 Apr 2019 05:19 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Mon, 22 Apr 2019 05:19 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019 reasons why aap congress alliance not happen in delhi
आप-कांग्रेस - फोटो : अमर उजाला

मीडिया को लगभग एक महीने तक छकाने और हां-ना, हां-ना की ऊहापोह के बाद जब दिल्ली में नामांकन के लिए आखिरी वक्त आ गया, तब जाकर यह साफ हुआ है कि अब आम आदमी पार्टी और कांग्रेस में गठबंधन नहीं होगा।

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सोमवार को कांग्रेस पार्टी ने अपने छह उम्मीदवारों का एलान करते हुए हर उस संभावना को खत्म कर दिया जो आप और कांग्रेस में गठबंधन की आस लगाए थे। इस गठबंधन की सुगबुगाहट तब शुरू हुई थी जब जनसभाओं से आप संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत आप के बड़े नेता भाजपा को हराने के लिए सभी पार्टियों के एक होने की बात करने लगे थे।
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एक बार तो अरविंद केजरीवाल ने ये तक कह दिया था कि वह कांग्रेस से गठबंधन के लिए लालायित हैं, लेकिन कांग्रेस अपना अहंकार छोड़ने को तैयार नहीं है। वह कांग्रेस को मना-मना कर थक गए लेकिन कांग्रेस उनकी नहीं सुन रही।
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इसके बाद दिल्ली की कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित का बयान आया था कि केजरीवाल व उनकी पार्टी से कांग्रेस के किसी नेता की कोई बात नहीं हुई है। आप और कांग्रेस में गठबंधन नहीं हो सकता।

इसके बाद भी लगातार आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल राय व संजय सिंह आदि बैकडोर नेगोसिएशन में लगे रहे। लगातार आप के नेताओं द्वारा कहा जाता रहा कि अगर नरेंद्र मोदी-अमित की जोड़ी दोबारा सरकार में आती है, दोबारा भाजपा की सरकार बनती है तो इसकी जिम्मेदार कांग्रेस पार्टी होगी।

Lok Sabha Elections 2019 reasons why aap congress alliance not happen in delhi
कांग्रेस-आप - फोटो : SELF

आप मुखिया और उसके नेताओं के इन तेवरों की वजह से कांग्रेस का एक धड़ा शुरू से ही आप के खिलाफ रहा। वहीं एक बड़ा वर्ग आप से गठबंधन के लिए राजी था क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि इससे भाजपा को हराना आसान होगा। इस बीच शीला दीक्षित की मंजूरी न होते हुए भी कांग्रेस प्रभारी पीसी चाको ने दिल्ली में पार्टी सदस्यों के बीच एक सर्वे भी करा लिया जिसका परिणाम रहा कि कांग्रेस को आप के साथ गठबंधन करना चाहिए।

लेकिन कांग्रेस के इतने प्रयासों के बाद भी आप ने उस पर हमला करना नहीं छोड़ा। दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन पर बात भी शुरू हो गई, लेकिन आप और कांग्रेस दोनों अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े रहे। जहां आप कांग्रेस से हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, गोवा में गठबंधन चाहती थी वहीं कांग्रेस आप से सिर्फ दिल्ली में गठबंधन चाहती थी वो भी तीन सीटों की साझेदारी के साथ।

यही मुख्य वजह रही कि आप-कांग्रेस का गठबंधन नहीं हो सका। कांग्रेस दिल्ली के अलावा अन्य राज्यों में आप से गठबंधन नहीं चाहती थी, वहीं आप चंडीगढ़ और हरियाणा में गठबंधन से कम कुछ नहीं चाहती थी। आप का कहना था कि दिल्ली जैसे राज्य में जहां पिछली बार कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली थी वो कांग्रेस को तीन सीटें दे रही है तो हरियाणा और चंडीगढ़ कांग्रेस आम आदमी पार्टी को क्यों सीटें नहीं दे सकती।

आप और कांग्रेस के इस पचड़े में भाजपा ने भी अपने उम्मीदवारों की दो-दो लिस्ट होने के बावजूद आखिरी समय में जाकर चार उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की। अभी भी उसने तीन सीटों पर उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं।

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