कार के बाद वॉलेंटियर ने कहा' 'मेरा लोगो वापस करो'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पहले कार, फिर योजनाकार और अब लोगो धीरे-धीरे आम आदमी पार्टी से सब छिनता नजर आ रहा है। आम आदमी पार्टी में फरवरी अंत से ही जो कलह मची है उससे पार्टी को बड़ा नुकसान हो रहा है।
पार्टी के मूल सिद्धांतों से जुड़े लोग आप की अंतर्कलह से बहुत आहत हैं और इसी का परिणाम है कि वह धीरे-धीरे पार्टी से किनारा कर रहे हैं। इसी कड़ी में नया नाम जुड़ गया है सुनील लाल का। सुनील लाल वही व्यक्ति हैं जिन्होंने पार्टी को पहचान दी है।
पार्टी का लोगो बनाने वाले सुनील लाल ने अरविंद केजरीवाल को चिट्ठी लिखकर दावा किया है कि पार्टी के लिए उन्होंने ये लोगो डिजाइन किया था और कृपया करके आम आदमी पार्टी उनके द्वारा बनाए गए लोगो का इस्तेमाल न करे।
इस तरह अब पार्टी का पर्याय बन चुके उसके लोगो का अस्तित्व खतरे में है और अगर यह लोगो छिन गया तो पार्टी को अपनी नए सिरे से पहचान गढ़नी पड़ जाएगी जिसे लोगों के बीच लोकप्रिय बनाना टेढ़ी खीर साबित हो सकता है।
पढ़िए, पूरी चिट्ठी क्या लिखा है लोगो बनाने वाले ने
पहले मांगी जा चुकी है केजरीवाल की वैगनआर
नेताओं पर से जनता का भरोसा उठना कोई नई बात नहीं है लेकिन प्रचंड बहुमत से आने के एक महीने के बाद ही अगर समर्थक पार्टी को दिया अपना चंदा वापस मांगने लगें तो बात जरूरी चौंकाती है।
आम आदमी पार्टी के ऐसे ही एक समर्थक ने अरविंद केजरीवाल को दी वैगन कार उनसे वापस मांगी है। पिछले चुनाव तक यह नीली वैगन कार अरविंद केजरीवाल की पहचान बन गई थी।
आप में चली रही गुटबाजी और खींचतान से परेशान कुंदन ने केवल अपनी कार ही नहीं बल्कि वह सारा पैसा भी पार्टी से वापस मांगा है जो उन्होंने और उनकी पत्नी श्रद्घा ने आप को सहयोग के तौर पर दिया था।
पार्टी से पहले ही अलग हो चुके हैं योजनाकार
इससे पहले भ्रष्टाचार निरोधक हेल्पलाइन के मुख्य योजनाकार ने ‘आप’ से किनारा कर लिया है। वैचारिक मतभेद की वजह से वैज्ञानिक और नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (एनटीआरओ) के संयुक्त सचिव रहे वीके मित्तल ने पार्टी छोड़ दी है।
मित्तल के मुताबिक, एक नई विचारधारा से वह पार्टी का हिस्सा बने थे, लेकिन फिलहाल ‘आप’ का वैचारिक पतन हुआ है। लिहाजा उनका पार्टी से कोई वास्ता नहीं है।
मित्तल के मुताबिक, पार्टी से हमारा जुड़ाव एक विचारधारा की वजह से हुआ है, लेकिन पार्टी इस समय अपनी विचारधारा खो चुकी है। दूसरे राजनीतिक दलों की तरह ‘आप’ भी सत्ता के लिए गुंडे-बदमाशों का साथ लेने में गुरेज नहीं कर रही है।