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गाजीपुर बॉर्डर पर नन्हे हाथों ने संभाली बड़ी जिम्मेदारी
Mon, 28 Dec 2020 06:30 AM IST
दुष्यंत शर्मा
किशन कुमार, नई दिल्ली
किशन कुमार, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 28 Dec 2020 06:30 AM IST
सार
- पिता करते हैं हेयर कटिंग-शेविंग, बेटी करती है कॉपी में एंट्री
- तीन दिन से किसानों की निशुल्क सेवा कर रहे हैं पिता-पुत्री
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पिता के साथ नीशू...
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
गाजीपुर बॉर्डर पर एलकेजी कक्षा में पढ़ने वाली सात वर्षीय नीशू भी अपने पिता के साथ रोजाना आंदोलन का हिस्सा बनने पहुंच रही है। उसके पिता अजय तीन दिन से वहां किसानों की हेयर कटिंग-शेविंग कर रहे हैं। साथ में मसाज भी करते हैं। इसके लिए वह कोई मेहनताना नहीं लेते। सेवाभाव के इस काम में नीशू उनका हाथ बंटाती है।
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वह सुबह ही कॉपी-पेन लेकर बैठ जाती है और पिता के पास पहुंचने वाले किसानों को क्रमबद्घ करने के लिए एंट्री करती है। वह किसानों के नाम और मोबाइल नंबर लिखती है। इसके बाद पिता कॉपी में दर्ज नाम के हिसाब से कटिंग-शेविंग करते हैं।
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एक दिन में 60 से 70 एंट्री
अजय ने बताया कि नीशू एक दिन में करीब 60 से 70 किसानों की एंट्री करती है। सुबह 9 बजे से शुरू हुआ एंट्री का काम शाम 7 बजे तक चलता है। जिन किसानों की सेवा 7 बजे तक नहीं हो पाती है उन्हें अगले दिन कॉपी में से नाम और मोबाइल नंबर देखकर फोन कर बुलाया जाता है। तीन दिन के भीतर वे अब तक करीब 150 किसानों की निशुल्क हेयर कटिंग-शेविंग की सेवा कर चुके हैं।
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जूते पॉलिश की भी कर रहे सेवा
अजय ने बताया कि नाई के काम के साथ-साथ वह जूते पॉलिश की भी सेवा कर रहे हैं। इसके लिए भी जो लोग बेटी के पास नाम पंजीकृत करा लेते हैं उनकी बूट पॉलिश की सेवा की जाती है।
बेटी ने बढ़ाया हौसला
नन्ही नीशू का कहना है कि जब तक किसानों का आंदोलन बॉर्डर पर चलेगा तब तक वह अपने पिता के साथ सहयोग करेगी। हालांकि, स्कूल की पढ़ाई भी सेवा करने के बाद घर पहुंचकर जारी रहेगी। अजय ने कहा कि बेटी के हौसले को देखते हुए उन्होंने भी आंदोलन खत्म होने तक निशुल्क सेवा करने की ठानी है।