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कॅरियर चुनते समय दिल की सुनें, समाज के दबाव में न आएं : एलजी
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शास्त्र प्रतिभा विजेताओं से बोले उपराज्यपाल- सफलता का रास्ता उत्कृष्टता से निकलता है
नए कौशल सीखने की दी सलाह, वैज्ञानिक सोच को बताया नींव
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने शास्त्र प्रतिभा प्रतियोगिता के विजेता छात्रों से संवाद करते हुए कॅरियर चुनने का अहम मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों को सामाजिक दबाव या दूसरों की अपेक्षाओं के आधार पर नहीं बल्कि अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप कॅरियर का चुनाव करना चाहिए। जिस क्षेत्र में मन लगे, उसी में उत्कृष्टता हासिल कर सफलता पाई जा सकती है।
उपराज्यपाल ने बृहस्पतिवार को लोक निवास में छात्रों से कहा कि कॅरियर का चुनाव जीवन का सबसे महत्वपूर्ण फैसला होता है। इसलिए इसे समाज, परिवार या बाहरी दबाव के आधार पर नहीं बल्कि अपनी अंतरात्मा की आवाज और रुचि के अनुसार लेना चाहिए। सफलता का वास्तविक पैमाना किसी खास पेशे में जाना नहीं बल्कि चुने हुए क्षेत्र में श्रेष्ठ प्रदर्शन करना है। उन्होंने कहा, असफलता किसी भी सफलता की यात्रा का स्वाभाविक हिस्सा है। इससे डरने या निराश होने के बजाय इससे सीखने और खुद को बेहतर बनाने का अवसर मानना चाहिए। हर विफलता व्यक्ति को अधिक मजबूत, परिपक्व और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करती है।
डिग्री के साथ स्किलस भी जरूरी
तेजी से बदलती दुनिया का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केवल शैक्षणिक डिग्री अब पर्याप्त नहीं है। युवाओं को समय के साथ नए कौशल सीखते रहने चाहिए, ताकि वे बदलती तकनीक और रोजगार की जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार रख सकें। अनुकूलन क्षमता ही भविष्य की सबसे बड़ी ताकत होगी। लोक निवास में आयोजित कार्यक्रम में विज्ञान भारती द्वारा आईआईटी गांधीनगर में आयोजित शास्त्र प्रतिभा प्रतियोगिता के विजेता छात्रों से बातचीत के दौरान उपराज्यपाल ने वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा और नवाचार को विकसित भारत की मजबूत नींव बताया।
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नए कौशल सीखने की दी सलाह, वैज्ञानिक सोच को बताया नींव
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने शास्त्र प्रतिभा प्रतियोगिता के विजेता छात्रों से संवाद करते हुए कॅरियर चुनने का अहम मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों को सामाजिक दबाव या दूसरों की अपेक्षाओं के आधार पर नहीं बल्कि अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप कॅरियर का चुनाव करना चाहिए। जिस क्षेत्र में मन लगे, उसी में उत्कृष्टता हासिल कर सफलता पाई जा सकती है।
उपराज्यपाल ने बृहस्पतिवार को लोक निवास में छात्रों से कहा कि कॅरियर का चुनाव जीवन का सबसे महत्वपूर्ण फैसला होता है। इसलिए इसे समाज, परिवार या बाहरी दबाव के आधार पर नहीं बल्कि अपनी अंतरात्मा की आवाज और रुचि के अनुसार लेना चाहिए। सफलता का वास्तविक पैमाना किसी खास पेशे में जाना नहीं बल्कि चुने हुए क्षेत्र में श्रेष्ठ प्रदर्शन करना है। उन्होंने कहा, असफलता किसी भी सफलता की यात्रा का स्वाभाविक हिस्सा है। इससे डरने या निराश होने के बजाय इससे सीखने और खुद को बेहतर बनाने का अवसर मानना चाहिए। हर विफलता व्यक्ति को अधिक मजबूत, परिपक्व और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करती है।
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डिग्री के साथ स्किलस भी जरूरी
तेजी से बदलती दुनिया का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केवल शैक्षणिक डिग्री अब पर्याप्त नहीं है। युवाओं को समय के साथ नए कौशल सीखते रहने चाहिए, ताकि वे बदलती तकनीक और रोजगार की जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार रख सकें। अनुकूलन क्षमता ही भविष्य की सबसे बड़ी ताकत होगी। लोक निवास में आयोजित कार्यक्रम में विज्ञान भारती द्वारा आईआईटी गांधीनगर में आयोजित शास्त्र प्रतिभा प्रतियोगिता के विजेता छात्रों से बातचीत के दौरान उपराज्यपाल ने वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा और नवाचार को विकसित भारत की मजबूत नींव बताया।
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