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MAX अस्पताल को मिल गई इस आधार पर राहत, होना था लाइसेंस रद्द

Wed, 20 Dec 2017 07:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 20 Dec 2017 07:09 PM IST
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license of max hospital will not be canceled
मैक्स अस्पताल

नवजात शिशु को मृत बताने और ईडब्ल्यूएस नियमों की अनदेखी के मामले में शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल को बड़ी राहत मिली है। बुधवार को अपीलीय प्राधिकरण ने दिल्ली सरकार के लाइसेंस रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी, जिसके बाद सुबह से अस्पताल की सेवाएं शुरू हो गईं।

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आदेश मिलने के बाद मैक्स प्रबंधन ने अस्पताल की ओपीडी को शुरू करवाया। वहीं, इस मामले को लेकर दोपहर बाद अस्पताल के बाहर प्रदर्शन भी होने लगा। साथ ही राजनिवास से भी इस मामले से कोई संबंध न होने का स्पष्टीकरण जारी किया गया।
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इन सबके बीच दिल्ली स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस आदेश के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। कानूनी विभाग इस संबंध में जानकारी लेगा। दरअसल, दिल्ली सरकार के फैसले को मैक्स प्रबंधन ने अपीलीय प्राधिकरण में चुनौती दी थी, जिसके बाद रद्द लाइसेंस पर रोक लगाई गई।

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max hospital - फोटो : अमर उजाला

प्रबंधन का कहना है कि वे मरीजों को उच्चस्तरीय सुविधाएं देने पर पूरा फोकस करेंगे। कुछ दिन पहले मैक्स अस्पताल पर एक परिवार ने आरोप लगाए थे कि डॉक्टरों ने नवजात शिशु को मृत बताकर उन्हें सौंप दिया, लेकिन जब वे उसे ले जा रहे थे, तो रास्ते में नवजात के जीवित होने का पता चला।

इस मामले की जांच हुई, तो स्वास्थ्य विभाग की टीम को और भी कई खामियां मिलीं, जिस पर सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर दिया था।

ओपीडी में पहुंचने लगे मरीज

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max hospital

अस्पताल शुरू होने की सूचना फैलते ही ओपीडी में मरीज पहुंचने लगे। मैक्स के बयान में कहा गया है कि जो ऑपरेशन लाइसेंस रद्द होने के फैसले से पहले तय थे, उनके लिए ऑपरेशन थियेटर दोबारा शुरू कर दिया गया है।

ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत कुछ मरीजों का उपचार जारी है। मैक्स का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को चिकित्सीय सेवाएं देने का प्रयास जारी रहेगा।

पीड़ित परिवार ने उठाए सवाल
अस्पताल शुरू होने के खिलाफ पीड़ित परिवार सड़क पर उतर आया। दोपहर बाद अस्पताल के बाहर बैठे मृतक बच्चों के दादा कैलाश और अन्य परिजन हरिसिंह का कहना है कि बगैर उनका पक्ष सुने अस्पताल को राहत मिलना नाइंसाफी है।

जब वे धरने पर बैठे थे तब डॉक्टरों की गिरफ्तारी और अस्पताल पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक डॉक्टर गिरफ्तार नहीं हुए हैं।

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