अधिकारियों की जासूसी के लिए दिल्ली सरकार ने बनाई थी ये यूनिट, LG ने बंद करने को कहा
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आम आदमी पार्टी सरकार की तरफ से सरकारी अधिकारियों पर नजर रखने और भ्रष्टाचार के मामले में आरोपियों को पकड़ने के लिए बनाई गई फीडबैक (मुखबरी यूनिट) को बंद करने के आदेश उपराज्यपाल अनिल बैजल ने दिए हैं। इस यूनिट को सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को रिपोर्ट करने के आदेश थे।
इस यूनिट के गठन, खुफिया यंत्र खरीदने के आदेश और अधिकारियों की तैनाती का खुलासा पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग की तरफ से गठित शुंगलू कमेटी की जांच में हुआ था। यह यूनिट भी बिना उपराज्यपाल के मंजूरी के बनाई गई थी। इसकी जांच सीबीआई को पूर्व उपराज्यपाल ने ही भेज दी थी। जिस पर प्राथमिक जांच रिपोर्ट दर्ज है।
उपराज्यपाल कार्यालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने फीडबैक यूनिट को बंद करने के आदेश की पुष्टि की है। उनका कहना है कि यूनिट बंद करने की सतर्कता विभाग की सिफारिश को मार्च के पहले सप्ताह में ही उपराज्यपाल ने मंजूरी दी है। क्योंकि डेढ़ साल के नियम विरुद्ध कार्यों की जांच करने को गठित वीके शुंगलू कमेटी ने इस कमेटी को अवैध करार दिया था।
यूनिट को सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को रिपोर्ट करने के थे आदेश
उल्लेखनीय है कि अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की मंजूरी से इस फीडबैक यूनिट का गठन सितंबर 2015 में किया गया था। यूनिट को सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को रिपोर्ट करने के आदेश थे।
तर्क दिया गया था कि सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग और भ्रष्टाचार फैलाने वाले अधिकारियों को पकड़ने के लिए यह यूनिट बनाई गई थी। सतर्कता विभाग के सूत्र बताते हैं कि 15 सेवानिवृत्त पुलिस व खुफिया विभाग के अधिकारियों को इस यूनिट में लिया गया था लेकिन वो क्या करते थे इसकी जानकारी नहीं थी।
कुछ ने खुद नौकरी छोड़ दी तो कुछ का अनुबंध आगे नहीं बढ़ाया गया। एक मार्च से यूनिट काम नहीं कर रही है। पिछले साल यूनिट के लिए 10 लाख रुपये का गुप्त फंड भी रखा गया था।
फीडबैक यूनिट के गठन और उसे बंद किए जाने के आदेश को लेकर उपमुख्यमंत्री ने कहा है कि ऐसी यूनिट का गठन गलत नहीं है। हर सरकार कैबिनेट के फैसलों को लागू करने और समीक्षा के लिए इस तरह की यूनिट बनाती है। जो काम अधिकारियों को सौंपे जाते हैं उसकी निगरानी भी जरूरी होती है।