सीवीओ के मुद्दे पर मौन क्यों हैं मोदी?
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एम्स के मुख्य सतर्कता अधिकारी रहे संजीव चतुर्वेदी को उनके पद से हटाने का मामला शांत होने का नाम नहीं ले रहा। हर दिन इस मामले में कोई न कोई तथ्य सामने आ रहा है।
इस बार एम्स के चिकित्सकों और शोधकर्ताओं ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस अधिकारी को दोबारा से सीवीओ के पद पर बहाल करने की मांग की है। साथ ही संजीव को सीवीओ के पद से गलत तरीके से हटाने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में कार्यरत करीब 250 वरिष्ठ चिकित्सक, शोधकर्ता और रेजिडेंट डॉक्टर्स ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि इस मामले में वे स्वयं स्वास्थ्य मंत्रालय को सलाह दें कि अपना फैसला वापस ले। संजीव जैसे इमानदार अधिकारी की एम्स को जरूरत है, लिहाजा एम्स की साख के लिए भी जरूरी है कि उनको दोबारा से एम्स का सीवीओ बनाया जाए।
इस साजिश के लिए कौन है जिम्मेदार?
पत्र में यह भी आग्रह किया है कि पिछले दो वर्षों में संजीव चतुर्वेदी ने जो कार्य बतौर सीवीओ किया है उसे अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने दिया जाए व सीवीओ के पद से हटाने के पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं, उन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।
संजीव को सीवीओ के पद से हटाने के लिए कई गलत तथ्य मंत्रालय की ओर से पेश किए गए हैं, जिनकी जांच भी बहुत जरूरी है।
इससे पहले केंद्रीय सर्तकता आयोग ने भी स्वास्थ्य मंत्रालय से संजीव चतुर्वेदी को उनके पद से हटाने पर सवाल पूछे हैं। सीवीसी ने इस पूरे मामले पर संजीव चतुर्वेदी से भी बातचीत की थी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 14 अगस्त को एक आदेश जारी कर संजीव चतुर्वेदी से एम्स के सीवीओ पद का चार्ज वापस ले लिया था।
एम्स फैकल्टी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. मनोज सिंह ने कहा कि एम्स के सीवीओ रहे संजीव चतुर्वेदी के साथ अन्याय हुआ है और उन्हें न्याय मिलना चाहिए। एम्स के कई चिकित्सक संजीव चतुर्वेदी के खिलाफ की गई कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं, लिहाजा स्वास्थ्य मंत्रालय को इस पूरे मामले की विस्तृत जांच करानी चाहिए।