फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   leopard death is dangerous for aravalli food chain

तेंदुए की मौत से बिगड़ रहा है अरावली की खाद्य श्रृंखला

Sat, 26 Nov 2016 07:51 AM IST
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुरुग्राम
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Sat, 26 Nov 2016 07:51 AM IST
विज्ञापन
leopard death is dangerous for aravalli food chain
तेंदुए को पीट-पीटकर मारा - फोटो : PTI

अरावली में लगातार तेंदुए की मौत से जंगल का खाद्य श्रृंखला (फूड चेन) बिगड़ रहा है। इंसानों के लगातार दखलअंदाजी से जंगली जानवर अब प्रभावित होने लगे हैं। अवैध कब्जे और फॉर्म हाउस का निर्माण जंगलों को तहस-नहस कर रहा है।

विज्ञापन


वनस्पति और पारिस्थितिकी तंत्र दोनों बिगड़ रहा है। बृहस्पतिवार को सोहना कस्बे के गांव मंडावर में तेंदुए को ग्रामीणों द्वारा पीट-पीटकर मारने की घटना ने अरावली के खाद्य श्रृंखला पर सवाल खड़े कर दिए है। बता दें कि बीते दो वर्ष में अरावली क्षेत्र में 09 तेंदुए की अलग-अलग जगहों पर मौत हो चुकी है।
विज्ञापन


अरावली में प्राकृतिक तौर पर शाकाहारी जीव जंतुओं से लेकर शिकारी जानवरों तक की खाद्य श्रृंखला है, जो एक-दूसरे का शिकार कर अपना पेट पालते हैं। वन्य जीव विभाग के मुताबिक अरावली में खरगोश, हिरण, नील गाय, बकरी, चूहा, लंगूर सभी रहते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


वक्त के साथ अवैध निर्माण और अतिक्रमण के कारण यहां से नीलगाय, हिरण, लंगूर और जंगली खरगोश गायब हो गए। जिसकी वजह से खाद्य श्रृंखला की द्वितीय श्रेणी बिगड़ गई है। इसमें सबसे ऊपर आने वाले तेंदुआ को अब खाना जंगलों में नहीं मिल रहा है। खाने की तलाश में आबादी की ओर बढने लगा है।

वैज्ञानिकों के मुताबिकों किसी भी वन क्षेत्र के लिये जरूरी है कि वहां की खाद्य श्रृखंला पूरी हो। शाकाहारी और मांसाहारी पशु-पक्षियों के अलावा वहां सर्वभक्षी जानवर भी होने चाहिए। पीपल फॉर एनिमल (हरियाणा) के चेयरमैन नरेश कादियान का कहना है कि इको-बैलेंस गड़बड़ हो गया है।

प्रशासनिक लापरवाही के कारण फूड चेन बर्बाद हो गया है। प्राकृतिक फूड चेन में नील गाय और हिरण जरूरी था, लेकिन यह अब खत्म हो चुका है। अरावली में निर्माण की वजह से छोटे जंगली जानवर के खत्म होने की वजह से इन पर निर्भर रहने वाला तेंदुआ जैसा अब आबादी के बीच आ गया है। जंगलों में आदमी की दखल अंदाजी से जंगली जानवरों को खतरा हो गया है।

कैसे प्रभावित हो रहा है खाद्य श्रृंखला
वैज्ञानिक डॉ. श्रीकांत कुमार बताते हैं कि खाद्य श्रृंखला में सबसे बुनियादी घास के मैदान और पेड़-पौधे है। धीरे-धीरे पेड़ों की कटाई और अरावली का दोहन होने के कारण घास का मैदान भी खत्म हो गया है। जिसकी वजह से इन इलाके में बकरी, भेड़, लंगूर और हिरण जैसे जानवर खत्म हो गए। इन जानवरों के ऊपर ही तेंदुआ निर्भर रहता था। लंगूर व हिरण के खत्म होने की वजह से सांपों की कमी और अन्य जानवरों की कमी होने पर इन जानवरों को खाकर पेट पालने वाले जंगली जानवरों को दिक्कत होने लगती है। इससे यह खाने की तलाश में जंगलों के आस-पास के गांव में आने लगते हैं।

अरावली में है कई तेंदुए
अरावली के जंगलों में कई तेंदुए है। हाल ही वन विभाग द्वारा लगाए नाइट विजन कैमरा में इन्हें देखा गया था। बांधवाड़ी और मानेसर के पास कैमरा में रात और अहले सुबह कैद हुआ था। जिसके बाद विभाग को उम्मीद थी कि इन तेंदुओं की संख्या में और इजाफा होगा। अरावली का पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में मदद मिलेगी।


क्या है खाद्य श्रृंखला
-खाद्य शृंखला में पारिस्थितिकी तंत्र के विभिन्न जीवों की परस्पर भोज्य निर्भरता को प्रदर्शित करते हैं। हर जीव भोजन के लिए दूसरे जीव पर निर्भर होता है। प्रथम श्रेणी में सभी शाकाहारी जन्तु खरगोश, हिरण, बंदर आदि आते हैं। द्वितीय श्रेणी में वे सभी जानवर आते हैं जो भोजन के लिए प्रथम श्रेणी के उपभोक्ताओं पर निर्भर होते हैं। इनमें मेढक, मछली, पक्षी आदि शामिल है। तृतीय श्रेणी में वे सभी जीव शामिल है कि जो द्वितीय श्रेणी के उपभोक्ताओं पर निर्भर होते हैं। इनमें शेर, तेंदुआ, भालू आदि शामिल है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed