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पार्टी का फरमान सुनकर उड़ी नेताओं की नींद

Fri, 12 Sep 2014 03:29 AM IST
एस.एस.अवस्थी/अमर उजाला, नोएडा
एस.एस.अवस्थी/अमर उजाला, नोएडा Updated Fri, 12 Sep 2014 03:29 AM IST
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leaders to collect vore.

नोएडा विधान सभा के उपचुनाव में मतदान शुरू होने में 24 घंटे से भी कम समय बचा है। मौसम और समय की बाधा के चलते इस बार प्रत्याशी हर वोटर तक अपनी बात नहीं पहुंचा पाया। इसलिए वोट जुटाने की जिम्मेदारी पदाधिकारियों पर डाल दी गई है।

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पदाधिकारियों को गांव और सेक्टर बांटे गए हैं। परिणाम आने के बाद यह देखा जाएगा कि कितना काम किया गया। अच्छा वोट प्रतिशत न मिलने पर उन लोगों को पार्टियां बाहर का रास्ता दिखाएंगी।
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वहीं इस तरह के फरमान आने से पदाधिकारियों की सांसें फूल गई हैं। सभी प्रमुख दलों ने अपने-अपने पदाधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी है।

स्लम बस्तियों में खोजी जा रही जीत
शहरी वोटरों का मिजाज हर प्रत्याशी को पता है, लेकिन गरीब बस्तियों का वोटर वहीं जाएगा, जो प्रत्याशी उनके घर जाकर वोट मांगेगा। करीब 25 से 30 हजार वोटर इन बस्तियों-कॉलोनियों में हैं। शहर के साथ गांव के आसपास भी ऐसी कॉलोनियां हैं। कॉलोनियों को नियमित कराने और सभी सुविधाएं देने का भरोसा दिलाया गया।
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इन वोटरों की अहमियत सभी दल जानते हैं, इसलिए हरेक प्रत्याशी ने एक टीम बस्तियों में लगा रखी थी और ज्यादातर वोट मांगने का समय शाम से लेकर देर रात तक चला। क्योंकि दिन में वहां के लोग काम पर जाते हैं और शाम को ही घर वापसी होती है।

बसपा वोटरों को चिंता नहीं
सूत्र बताते हैं कि बसपा का निर्दलीय प्रत्याशी को वोट देने का फरमान महज औपचारिकता भर है। इसलिए अन्य पार्टी के प्रत्याशी इन वोटरों को अपनी तरफ खींचने का प्रयास कर रहे हैं। स्थानीय बसपा संगठन कुछ भी कहने को तैयार नहीं है।

पार्टी जानती है कि अगर किसी दल को समर्थन दिया जाता तो दल की खामियों की तोहमत उन पर भी आती। किसी निर्दलीय के लिए वोट कहने भर से कोई वोटर मानने वाला नहीं है।  बसपा के वोट झटकने के लिए पार्टियों ने उनके साथ प्रचार के दौरान खूब हमदर्दी दिखाई।


मुस्लिम-ठाकुर वोटर फिलहाल चुप
किसी भी बड़े दल ने इस जाति से प्रत्याशी नहीं उतारा है, इसलिए इनमें गुस्सा है। वोटर बोलने को तैयार नहीं। इनके करीब 70 हजार वोट हार-जीत में बड़ी भूमिका निभाएंगे। पार्टियों ने अपने-अपने ढंग से इन्हें मनाने का काम किया। हालांकि प्रत्याशियों ने भी ऐसे पदाधिकारियों को जिम्मा दिया है जो इन जातियों से ताल्लुकात रखते हैं।

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