कार नंबर का हवाला देकर डेट मांग रहे वकील
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राजधानी में वाहनों के लिए सम-विषम फॉर्मूला एक जनवरी से शुरू होगा, लेकिन अदालतों में इसका असर अभी से देखने को मिल रहा है। वकीलों ने अपनी कारों के नंबरों के आधार पर वर्ष 2016 में सुनवाई की तिथियां मांगनी शुरू कर दी है।
अदालत ने भी उनकी सुविधानुसार वही तिथियां देनी शुरू कर दी है जो वकील मांग रहे हैं। हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी के समक्ष आइटम नंबर तीन मामले में जब अदालत ने वकील वैशाली मेहरा को अगली सुनवाई 19 जनवरी दी तो उन्होंने तुरंत डेट बदलने का आग्रह कर दिया।
अदालत के पूछने पर उन्होंने डायरी देखकर बताया कि उनके पास जो कार है उसके नंबर के अनुसार वह सम-विषम फार्मूले के तहत उस दिन कार सड़क पर नहीं निकाल पाएगी। ऐसे में वे कैसे अदालत में फाइलें लेकर आ सकती हैं।
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इसी दौरान आइटम नंबर 4 में पेश सर्वोच्च न्यायालय के वकील संजीव जैन ने भी कहा कि अदालत में कार के बिना आना संभव नहीं है। इसका मुख्य कारण है कि वे मामलों से संबंधित फाइलें पढ़ने के लिए घर ले जाते हैं और बस में भारी फाइलें लाना संभव नहीं है। वे तो एक और कार खरीदने की सोच रहे हैं।
इसी तर्क का समर्थन कई अन्य वकीलों ने भी कर दिया। न्यायमूर्ति भी उनके तर्कों को नजरअंदाज नहीं कर सके। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा कि आप योजना को गलत मत कहें। योजना को लागू होने दें फिर देखते हैं।
फिलहाल उन्होंने अधिवक्ता वैशाली को 19 जनवरी की जगह 18 जनवरी डेट प्रदान कर दी। निचली अदालत में भी काफी वकील इसी प्रकार की परेशानी को अदालत के समक्ष पेश करते नजर आए और अदालत ने भी बिना किसी रोक के उनको सुविधानुसार सुनवाई की डेट दे दी।