बंद कमरों का किराया चुकाने को मजबूर हैं लाखों छात्र, अभिभावकों की आय घटने से हो रही मुश्किल
- दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय और जामिया यूनिवर्सिटी के लाखों छात्र मार्च से ही बंद पड़े कमरों का किराया चुकाने को मजबूर
- छात्रों का कहना है कि उनकी इस समस्या पर केंद्र-दिल्ली सरकार को विचार करना चाहिए और उन्हें उचित राहत प्रदान करनी चाहिए
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तब से पांच महीने का समय बीत चुका है और वजीराबाद का उनका कमरा बंद है। लेकिन हर महीने की पहली तारीख को ही ऑनलाइन माध्यम से उन्हें अपने कमरे का 7,500 रुपये का किराया चुकाना पड़ रहा है।
उनके जैसे लाखों छात्र हैं, जो बिना कमरों में रहे उनका किराया चुका रहे हैं। परीक्षाओं के टलने की स्थिति में उनका यह खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसके बारे में सोचने वाला कोई नहीं है।
छात्रों का कहना है कि उनकी इस समस्या पर केंद्र-दिल्ली सरकार को विचार करना चाहिए और उन्हें उचित राहत प्रदान करनी चाहिए।
बीए ऑनर्स के अंतिम वर्ष के छात्र रौशन कुमार कहते हैं कि अगर उनकी परीक्षाएं समय से हो जातीं, तो वे आगे बढ़ सकते थे। लेकिन अब उन्हें तब तक इंतजार करना पड़ेगा, जब तक कि उनकी परीक्षाएं समाप्त नहीं होतीं।
तब तक वे कमरे का किराया चुकाने के लिए मजबूर हैं। शहीद भगत सिंह कॉलेज में पढ़ने वाले मणिपुर के छात्र टीए निमसिंग भी इसी तरह से बंद कमरे का किराया चुकाने को मजबूर हैं जबकि इसी दौरान उनके पिता की कमाई का जरिया ठप हो चुका है। निमसिंग के लिए यह बेहद कठिन समय है।
कितना है कमरों का किराया
दिल्ली शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र है और यहां देश-विदेश से लाखों छात्र प्रतिवर्ष पढ़ाई करने के लिए आते हैं। रहने के लिए छात्रों की पहली पसंद जवाहरलाल यूनिवर्सिटी, दिल्ली यूनिवर्सिटी या जामिया यूनिवर्सिटी के आसपास के इलाके होते हैं।
इनमें मुखर्जी नगर, गांधी विहार, वजीराबाद, जामिया नगर, नीम सराय और बेर सराय प्रमुख हैं। इसके आलावा लक्ष्मी नगर, गांधी नगर और अन्य इलाके सस्ता होने के कारण काफी लोकप्रिय हैं।
इनमें न्यूनतम किराया 6 हजार रुपये प्रति माह से शुरू होता है ,जो मुखर्जी नगर जैसे प्रमुख इलाकों में 15 से 20 हजार रुपये प्रति माह तक जाता है। इन फ्लैट्स में एक से दो छात्र रहते हैं।
यूनिवर्सिटी हॉस्टल में जगह नहीं
किसी भी यूनिवर्सिटी में छात्रों को रहने के लिए हॉस्टल की भारी कमी है। इस मामले में जवाहर लाल नेहरु सबसे बेहतर है, जो अपने सबसे ज्यादा छात्रों को हॉस्टल उपलब्ध करवाता है। लेकिन इसके बाद भी छात्र आसपास के इलाकों में किराए पर रहते हैं।
सबसे ज्यादा खराब स्थिति दिल्ली यूनिवर्सिटी और जामिया यूनिवर्सिटी की है। छात्रों की भारी संख्या के बावजूद यहां हॉस्टल नहीं बन रहे हैं। कई चुनावों में मुद्दा बनने के बाद भी होस्टल्स का निर्माण नहीं हो रहा है, जिससे छात्रों को बाजार पर निर्भर रहना पड़ता है, जो उनकी शिक्षा को बेहद खर्चीला बना देता है।
छात्रों की मांग
छात्रों का कहना है कि उचित प्रक्रिया के जरिए विश्वविद्यालय प्रशासन को उनकी परीक्षाएं करवा उनका परिणाम घोषित करना चाहिए, जिससे उन पर प्रति महीने पड़ रहा अनावश्यक बोझ खत्म किया जा सके।
इस बीच केंद्र और दिल्ली सरकार को छात्रों की इस समस्या पर विचार करना चहिये और उन्हें कुछ राहत प्रदान करने की कोशिश करनी चाहिए।