इस शहर की बेटियां हो रहीं गायब, पुलिस प्रशासन को नहीं होश
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कोई घर से भाग रही तो किसी का हो रहा अपहरण, इस शहर की पुलिस को नहीं कोई खबर..
फरीदाबाद से हर साल दर्जनों किशोरियां व युवतियां गायब हो जाती हैं, उनमें से 10 से 15 प्रतिशत ही वापस आती हैं, जबकि बाकियों का पता नहीं चल पाता है।
अधिकांश मामलों में किशोरियों को बहला फुसलाकर भगा ले जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि पिछले सवा दो साल में जिले से 230 किशोरियों को बहला फुसलाकर भगा कर ले जाने के मामले दर्ज किए गए हैं।
जिले से हर साल लापता होने वाले लोगों का आंकड़ा भी चौकाने वाला है। पिछले साल 780 लोग लापता हुए थे। ऐसे में इनकी तलाश के लिए पुलिस को मिसिंग सेल गठित करना पड़ा।
कहां चली जाती हैं लड़कियां
भाग कर जाने वाली आखिर कहां चली जाती हैं। यह सवाल अनसुलझा है। भगा कर ले जाए जाने वाली किशोरियों व युवतियों की तलाश में संबंधित थाने के अलावा मिसिंग सेल भी जांच करती है।
पुलिस के अनुसार अधिकांश मामलों में किशोरियों की किसी से दोस्ती होने पर वह उसे बहला फुसला कर अपहरण कर ले जाता है। कई बार परिजनों के साथ घर में किसी तरह का वाद-विवाद होने पर या कोई मांग पूरी न होने पर भी वे घर छोड़कर चली जाती हैं।
पूछताछ में अभिभावकों को भी विश्वास नहीं होता कि उनकी बेटी घर छोड़कर जा सकती है। ऐसे में वह किसी अनहोनी की घटना से भी डरे रहते हैं।
हर दिन लापता हुए दो लोग
इस साल 1 जनवरी से 17 मार्च 2018 तक (76 दिनों में) जिले से 184 लोग लापता हुए हैं। यानी हर दिन दो लोग लापता हुए हैं। इनमें अधिकांश की उम्र 15 से 25 साल के लोग शामिल हैं।
इनकी तलाश में पुलिस का अलग से मिसिंग सेल काम कर रहा है। उनको खोजने के लिए सर्विलांस की भी मदद ली जाती है, इसके बावजूद बहुतों का पता नहीं चल पाता है।
कई बच्चों को पहुंचाया गया घर
गाजियाबाद के पूर्व एसएसपी धमेंद्र सिंह द्वारा चलाए गए ऑपरेशन स्माइल की तर्ज पर हरियाणा पुलिस ने करीब तीन साल पहले ऑपरेशन मुस्कान शुरू किया था।
ऑपरेशन मुस्कान के तहत पिछले तीन साल में जिला पुलिस ने कई लापता बच्चों को ढूंढ कर उनके परिजनों से मिलवाया हैं। इनमें से बहुत से बच्चे सड़क किनारे ढाबों, चाय की दुकानों पर काम करते मिले तो कई भीख मांगते हैं और छोटा-मोटा सामान बेचते पुलिस को मिले थे।
"लापता बच्चों या अपहृत किशोरियों की तलाश में मिसिंग सेल जुटा हुआ है। कई मामलों में मिसिंग सेल की टीम खुद भी कार्रवाई करती है और थाने चौकियों की पुलिस की भी मदद की जाती है। हम सब का एकमात्र ध्यय यही रहता है कि किसी न किसी तरह लापता या अपहृत बच्चों को सकुशल बरामद कर उन्हें उनके अभिभावकों से मिलवा दिया जाए।" - सतेंद्र रावल, प्रभारी, मिसिंग सेल
आंकड़ों की नजर से
2016 2017 2018 (17 मार्च तक)
अपहृत किशोरियां 77 120 33
लापता/गुमशुदा 529 780 184