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सुविधाओं और डॉक्टरों को तरसता नॉर्थ इंडिया का पहला चाइल्ड PGI
संदीप वर्मा/अमर उजाला, नोएडा
Updated Sun, 04 May 2014 05:38 PM IST
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ऊंची दुकान, फीके पकवान, ये कहावत बस चार डॉक्टरों के दम पर खिंच रहे डॉ. भीमराव अंबेडकर पीडियाट्रिक इंस्टीट्यूट एंड सुपर स्पेशियालिटी हॉस्पिटल पर फिट बैठती है।
सेक्टर 30 में 700 करोड़ की लागत से बने उत्तर भारत के पहले चाइल्ड पीजीआई में डॉक्टर ही नहीं सुविधाओं का भी अकाल है और मरीज बेहाल है। फाइव स्टार होटल जैसे दिखने वाले इस अस्पताल में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी सुविधाएं भी नहीं मिलतीं।
अक्तूबर 2013 में खुले इस अस्पताल की इमारत को देखकर नोएडा वासियों को भले ही गर्व होता हो, लेकिन यहां आने वाले मरीजों को शायद ही होगा। ओपीडी में रोजाना डेढ़-दो सौ मरीज आते हैं।
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सर्दी, खांसी, जुकाम तक तो ठीक है, लेकिन अगर मामला पैथोलॉजी टेस्ट का हो तो उसके लिए भी मरीजों को जिला अस्पताल ही जाना पड़ता है। ऐसे में ये अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि जो जांच जिला अस्पताल फ्री में करता है, वह भी इस स्पेशल अस्पताल में नहीं होती।
यह भी पढ़ें: खुशखबरी! नोएडा को मिला CBS का तोहफा
मार्च से 200 बेड की इंडोर सुविधा, इमरजेंसी और आईसीयू भी शुरू की जानी थी, लेकिन मई आ गया है और सुविधाएं योजनाओं में चक्कर खा रही हैं। अस्पताल के स्टाफ को लेकर भी हाल अलग नहीं है।
फिलहाल मरीजों का इलाज बस चार डॉक्टरों के जिम्मे है। वार्ड ब्वाय, स्वीपर आदि स्टाफ सीमित है। ये मुट्ठीभर स्टाफ जैसे तैसे रोज आने वाले सैकड़ों मरीजों को संभालता है। देखना ये है कि रुतबे और शान-ओ-शौकत से ठसाठस इस इमारत में मरीजों को माकूल इलाज कब मुहैया होता है।
साल भर तक इंस्टीट्यूट की उम्मीद नहीं
वर्ष 2014 के पहले सेशन से इंस्टीट्यूट में पढ़ाई के लिए डॉक्टरों का एडमिशन शुरू करने की योजना है। लोकसभा चुनावों के चलते आचार संहिता लागू होने से विधानसभा में अस्पताल का एक्ट पास नहीं हो पाया। वहीं, मई से जून के दौरान यूपी मेडिकल की परीक्षाओं में चाइल्ड पीजीआई में शिक्षा के लिए पेपर होना मुश्किल है। ऐसे में यह मामला अगले साल तक टल सकता है।
योजना में अटकी 425 डॉक्टरों की फैकल्टी
चाइल्ड पीजीआई के निदेशक डॉ. एके भट्ट का कहना है कि नए सेशन में इंस्टीट्यूट के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का प्रयास जारी है। एक्ट पास होने के बाद 425 डॉक्टरों की फैकल्टी भर्ती करने की योजना है। जिसमें प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, सीनियर रेजिडेंट और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर भर्ती किए जा सकेंगे।
चाइल्ड पीजीआई में चलेंगे 19 विभाग
चाइल्ड पीजीआई में 19 विभागों में मरीजों को उपचार मिलना था। जिसमें कार्डियोलॉजी (हृदयरोग विभाग), गैस्ट्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, हेमेटो ओंकोलॉजी, चाइल्ड साइकोलॉजी, पीडियाट्रिक आर्थोपेडिक, ऑप्टिमेटिस्ट्रोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी, फिजियोथेरेपी, चाइल्ड साइकोलॉजी सहित करीब 19 विभागों में मरीजों को उपचार मिलेगा।
इनके भरोसे चल रहा अस्पताल
चार डॉक्टर
दो फार्मासिस्ट
12 वार्ड ब्वाय
पांच स्वीपर
पांच डाटा एंट्री कर्मी
दो नर्स
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सेक्टर 30 में 700 करोड़ की लागत से बने उत्तर भारत के पहले चाइल्ड पीजीआई में डॉक्टर ही नहीं सुविधाओं का भी अकाल है और मरीज बेहाल है। फाइव स्टार होटल जैसे दिखने वाले इस अस्पताल में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी सुविधाएं भी नहीं मिलतीं।
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अक्तूबर 2013 में खुले इस अस्पताल की इमारत को देखकर नोएडा वासियों को भले ही गर्व होता हो, लेकिन यहां आने वाले मरीजों को शायद ही होगा। ओपीडी में रोजाना डेढ़-दो सौ मरीज आते हैं।
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सर्दी, खांसी, जुकाम तक तो ठीक है, लेकिन अगर मामला पैथोलॉजी टेस्ट का हो तो उसके लिए भी मरीजों को जिला अस्पताल ही जाना पड़ता है। ऐसे में ये अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि जो जांच जिला अस्पताल फ्री में करता है, वह भी इस स्पेशल अस्पताल में नहीं होती।
यह भी पढ़ें: खुशखबरी! नोएडा को मिला CBS का तोहफा
मार्च से 200 बेड की इंडोर सुविधा, इमरजेंसी और आईसीयू भी शुरू की जानी थी, लेकिन मई आ गया है और सुविधाएं योजनाओं में चक्कर खा रही हैं। अस्पताल के स्टाफ को लेकर भी हाल अलग नहीं है।
फिलहाल मरीजों का इलाज बस चार डॉक्टरों के जिम्मे है। वार्ड ब्वाय, स्वीपर आदि स्टाफ सीमित है। ये मुट्ठीभर स्टाफ जैसे तैसे रोज आने वाले सैकड़ों मरीजों को संभालता है। देखना ये है कि रुतबे और शान-ओ-शौकत से ठसाठस इस इमारत में मरीजों को माकूल इलाज कब मुहैया होता है।
साल भर तक इंस्टीट्यूट की उम्मीद नहीं
वर्ष 2014 के पहले सेशन से इंस्टीट्यूट में पढ़ाई के लिए डॉक्टरों का एडमिशन शुरू करने की योजना है। लोकसभा चुनावों के चलते आचार संहिता लागू होने से विधानसभा में अस्पताल का एक्ट पास नहीं हो पाया। वहीं, मई से जून के दौरान यूपी मेडिकल की परीक्षाओं में चाइल्ड पीजीआई में शिक्षा के लिए पेपर होना मुश्किल है। ऐसे में यह मामला अगले साल तक टल सकता है।
योजना में अटकी 425 डॉक्टरों की फैकल्टी
चाइल्ड पीजीआई के निदेशक डॉ. एके भट्ट का कहना है कि नए सेशन में इंस्टीट्यूट के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का प्रयास जारी है। एक्ट पास होने के बाद 425 डॉक्टरों की फैकल्टी भर्ती करने की योजना है। जिसमें प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, सीनियर रेजिडेंट और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर भर्ती किए जा सकेंगे।
चाइल्ड पीजीआई में चलेंगे 19 विभाग
चाइल्ड पीजीआई में 19 विभागों में मरीजों को उपचार मिलना था। जिसमें कार्डियोलॉजी (हृदयरोग विभाग), गैस्ट्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, हेमेटो ओंकोलॉजी, चाइल्ड साइकोलॉजी, पीडियाट्रिक आर्थोपेडिक, ऑप्टिमेटिस्ट्रोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी, फिजियोथेरेपी, चाइल्ड साइकोलॉजी सहित करीब 19 विभागों में मरीजों को उपचार मिलेगा।
इनके भरोसे चल रहा अस्पताल
चार डॉक्टर
दो फार्मासिस्ट
12 वार्ड ब्वाय
पांच स्वीपर
पांच डाटा एंट्री कर्मी
दो नर्स