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कृष्णानंद राय हत्याकांडः 500 गोलियां, 8 कत्ल और 70 गवाह, फिर भी सब बरी, किसने की हत्या?

Thu, 04 Jul 2019 03:08 PM IST
पूजा त्रिपाठी धीरज बेनीवाल, अमर उजाला, नई दिल्ली
धीरज बेनीवाल, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Thu, 04 Jul 2019 03:08 PM IST
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krishnanand rai murder case 8 murders 500 bulets ak 47 70 witness all acquits then who culprit
भाजपा नेता कृष्णानंद राय - फोटो : amar ujala

विधायक कृष्णानंद राय समेत सात लोगों की  दिनदहाड़े हत्या की कर दी गई , केस की जांच पुलिस से लेकर सीबीआई को दी गई और सुनवाई गाजीपुर से दिल्ली स्थानांतरित की गई लेकिन किसी आरोपी पर अपराध साबित नहीं हुआ। क्योंकि मामले के सभी चश्मदीद व गवाह मुकर गए। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह तल्ख टिप्पणी विशेष सीबीआई अदालत ने बुधवार को मुख्तार अंसारी समेत सात आरोपियों को बरी करते हुए की।

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विशेष न्यायाधीश अरुण भारद्वाज ने अपने फैसले में कहा कि कई मामलों में गवाहों के मुकर जाने के मद्देनजर किसी भी आरोपी पर आरोप साबित करने में अभियोजन नाकाम रहा है। यह गवाहों के मुकर जाने के कारण आरोपियों के छूटने का एक और मामला है।
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अदालत ने गवाहों के मुकरने और उससे आरोपियों के छूटने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि गवाहों के मुकरने के कारण आरोपियों को सजा मिलने का प्रतिशत बेहद कम है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने गवाहों की सुरक्षा के लिए कानून बनाने का आदेश दिया था।
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अदालत ने कहा कि हालांकि सरकार ने गवाहों की सुरक्षा योजना 2018 की रूपरेखा तैयार कर ली है। दूसरे सुप्रीम कोर्ट भी इस पर सहमति दे चुका है। अब केवल इस योजना को उसकी मूल भावना के साथ लागू करने की जरूरत है।

सीबीआई ने दायर किए थे चार आरोप पत्र

अदालत ने कहा कि गवाहों के मुकरने के कई कारणों की पहचान सुप्रीम कोर्ट ने की थी। इनमें गवाहों को धमकी, प्रलोभन, पैसा व बाहुबल का प्रयोग, झूठे गवाहों का इस्तेमाल, गवाहों के मुकरने से रोक के लिए कानून का न होना समेत कई कारण शामिल थे।

कोर्ट ने यह भी कहा कि गवाहों को इनसे बचाने के लिए गवाहों की पहचान छिपाना, गवाहों की पहचान बदलना, गवाह व आरोपी का आमना सामना होने से रोकना समेत उपाय करने का निर्देश दिया गया था लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हो सका। इसलिए गवाह मुकर रहे हैं और अभियोजन आरोपों को साबित करने में कामयाब नहीं हुआ है। लिहाजा इस मामले में भी सभी आरोपियों को बरी किया जाता है।

सीबीआई ने दायर किए थे चार आरोप पत्र
केस की जांच के बाद सीबीआई ने चार आरोप पत्र कोर्ट में पेश किए थे। इन आरोप पत्रों के साथ सीबीआई ने करीब 70 गवाहों की सूची दी थी। इन गवाहों में कृष्णानंद राय की पत्नी, उनके भाई, जांच अधिकारी व अन्य लोग शामिल थे। इनमें से ज्यादातर मुकर गए थे।

हालांकि पूर्व केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा ने इस मामले में पुख्ता बयान दिया था। उन्होंने अपने बयान में कहा था कि कृष्णानंद राय को आरोपियों की ओर से लगातार धमकी मिलती थी और वह इस कारण परेशान थे। वह उनके अच्छे मित्र थे इसलिए अपनी परेशानी उनसे साझा करते थे।

आरोपियों के खिलाफ नहीं था कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य

कोर्ट के समक्ष आरोपियों की ओर से जिरह करते हुए बचाव पक्ष के अधिवक्ता दीपक शर्मा व राजीव मोहन ने तर्क रखा था कि किसी भी आरोपी के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है और सारा केस परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर टिका है। इसके खिलाफ किसी चश्मदीद ने आरोपियों के खिलाफ बयान नहीं दिया बल्कि कुछ ने तो पहचाना ही नहीं। ऐसे हालात में आरोपियों पर हत्य व अन्य धाराओं में आरोप साबित नहीं हो सकते।

सीबीआई ने किया था पुख्ता सबूत होने का दावा
केस की जांच के बाद सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ तमाम पुख्ता सबूत व साक्ष्य होने का दावा किया था। इस मामले में एजेंसी ने बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी को मुख्य साजिशकर्ता, राकेश पांडे व मुन्ना बजरंगी को शार्प शूटर बताया था। इस हत्याकांड में कृष्णानंद राय की सुरक्षा में तैनात यूपी पुलिस के दो गनर भी मारे गए थो।

एजेंसी का कहना था कि मुख्तार अंसारी ने इस हत्याकांड की साजिश गाजीपुर जेल में रहते हुए रची थी। इस हत्याकांड के फौरन बाद मुख्तार अंसारी व गैंगस्टर अभय सिंह के बीच मोबाइल फोन पर बातचीत हुई थी। इस बातचीत को रिकार्ड किया गया था। उस सीडी को कोर्ट में पेश किया गया था लेकिन यह सीडी कोर्ट में नहीं चली थी।

कृष्णानंद राय हत्याकांड के मृतक
. कृष्णानंद राय
. श्यामा शंकर राय
. रमेश राय
. निर्भय नारायण राय
. पुलिस का गनर अखिलेश कुमार राय
. सरकारी चालक मुन्ना यादव
. शेष नाथ सिंह

कुल आरोपी 
1. एजाज उल हक-बरी
2. अफजाल अंसारी-बरी
3. मुख्तार अंसारी-बरी
4. मंसूर अंसारी-बरी
5. अता उर्र रहमान-भगोड़ा
6. मुन्ना बजरंगी उर्फ प्रेम प्रकाश सिंह-मृत
7. फिरदौस उर्फ जावेद-मृत
8. संजीव महेश्वरी उर्फ जीवा-बरी
9. राकेश पांडे-बरी
10. रामू मल्लाह-बरी
11. विश्वास उर्फ नेपाली-भगोड़ा
12. जफर उर्फ चंदा-भगोड़ा
13. अफरोज खान उर्फ चुन्नू-आरोप मुक्त

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