इस फायदे के लिए केजरीवाल ने छीनी कुर्सी?
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आम आदमी पार्टी की सरकार के कैबिनेट में कानून मंत्रालय हमेशा ही सुर्खियों में रहता है। अबतक केजरीवाल सरकार में दिल्ली के कानून मंत्रियों की कार्यशैली, व्यक्तिगत या पारिवरिक मामले और डिग्री विवाद इस मंत्रालय की नीतियों पर हावी रहे हैं।
ऐसे में मुख्यमंत्री केजरीवाल छह महीने के अंदर तीन बार कानून मंत्री बदल चुके हैं। लेकिन कपिल मिश्रा से कानून मंत्रालय वापस लिया जाना सीधा मामला नजर नहीं आ रहा है।
दरअसल जब कपिल मिश्रा को कानून मंत्री की कुर्सी सौंपी गई थी तो सरकार के साथ पार्टी और जनता को उनसे खासी उम्मीदें थी। इसकी बड़ी वजह थी उनका दिल्ली जल बोर्ड में कामकाज और जनता की नजर में साफ सुथरी छवि।
कपिल की विदाई की जड़ है बिहार
जाहिर है कपिल मिश्रा ने भी अपनी छवि के अनुरूप ही कानून मंत्री के पद पर काम करने का प्रयास किया। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के खिलाफ टैंकर घोटाले में जांच की सिफारिश से उनकी प्रतिबद्धता की झलक भी मिली।
हालांकि ये बात अलग है कि कपिल मिश्रा के इस फैसले से जनता में उत्सुकता और भाजपा में उत्साह तो नजर आया लेकिन उनकी खुद की सरकार ने अनमने ढंग से ही इस पर हामी भरी।
राजनैतिक पंड़ितों के मुताबिक कपिल मिश्रा को कानून मंत्री के पद से हटाने की वजह दिल्ली में नहीं बल्कि बिहार में है। जहां सभी राजनैतिक पार्टीयां चुनावी माहौल में अपने-अपने तरीके से दस्तक दे रही हैं।
केजरी मित्र नीतीश का महागठबंधन बना वजह
हाल ही के दिनों में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की नजदीकियां किसी से छिपी नही हैं। जहां केजरीवाल के बिहार सम्मान समारोह में नीतीश दिल्ली आए तो वहीं नीतीश के विशेष कार्यक्रम में केजरीवाल भी पटना पहुंचे थे।
मतलब बिहार चुनाव में नीतीश के प्रचार-प्रसार और जीत के लिए केजरीवाल प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अपना योगदान दे रहे हैं। वहीं नीतीश एक महागठबंधन का भी हिस्सा हैं।
इस महागठबंधन की स्वाभिमान रैली के मंच से ही कपिल मिश्रा की विदाई के तार जुड़े हैं। इस मंच पर नीतीश कुमार के साथ सोनिया गांधी भी मौजूद थीं। ऐसे में इशारा समझा जा सकता है।
कपिल मिश्रा ने आशंका की थी जाहिर
अहम बात यह भी है कि कपिल मिश्रा 28 अगस्त को ही मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को चिट्ठी लिखकर उनसे पदभार वापस लिये जाने की आशंका जाहिर कर चुके थे। इसमें उन्होंने अपने खिलाफ चल रही साजिश का भी जिक्र किया था।
इस चिट्ठी का जवाब तो शायद उन्हें नहीं मिला लेकिन उनसे कानून मंत्रालय जरूर वापस ले लिया गया। अब केजरीवाल सरकार में कानून मंत्रालय का जिम्मा उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के पास रहेगा।
जहां आम आदमी पार्टी शीला दीक्षित पर एफआईआर को कपिल मिश्रा के कानून मंत्रालय से विदाई की वजह मानने से इनकार कर रही है। वहीं सोशल मीडिया पर आप समर्थक इसी मुद्दे को ही कपिल के जाने का कारण मान रहे हैं।
सीएम के सामने और भी हैं मुसीबतें
कुल मिलाकर आप सरकार के रणनीतिकार और थिंक टैंक दिल्ली से ही पंजाब व बिहार के साथ अपनी राजनीतिक मंहत्तवाकांक्षाओं को मैनेज करते नजर आ रहे हैं।
इसी बीच केजरीवाल के लिए करारी खबर ये भी है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर पंजाब के दो सासंदो के निलंबन के बाद आप विधायक पंकज पुष्कर ने भी अनधिकृत कॉलोनियों में सुविधाओं की कमी को लेकर दिल्ली सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ने की घोषणा की है।
तिमारपुर से विधायक पुष्कर के मुताबिक वे संगम विहार में शुरू हो रहे 'सत्याग्रह' के जरिए अपनी पार्टी को उनके चुनावी वादे याद दिलाना चाहते हैं।
अब देखना है कि अरविंद केजरीवाल विधायक पुष्कर के लिए कौन-सा तरीका अपनाते हैं। बहरहाल उनके पास तो कोई मंत्रालय भी नहीं है।