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जानिए, कैसे हेल्थ पर भारी पड़ा 2013

Fri, 27 Dec 2013 04:59 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 27 Dec 2013 04:59 PM IST
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know, how 2013 was unlucky for health in delhi

दिल्ली में स्वास्थ्य सुविधाओं की दृष्टि से अगर वर्ष 2013 पर नजर डालें तो परिणाम औसत से नीचे रहा है। सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकारी स्तर पर कई दावे किए गए।

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इनमें कुछ कागजों पर आगे भी बढ़े, लेकिन जमीनी हकीकत वास्तविकता से कोसों दूर ही रही। अस्पतालों में बिस्तर बढ़ाने के दावे व नई और आधुनिक चिकित्सा सेवा की शुरुआत का काम भी अधूरा रहा। वहीं उपलब्धियों के नाम पर अंगुली पर गिने जाने वाले कुछ काम रहे।
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नहीं शुरू हो सका ट्रामा सेंटर

लोक नायक अस्पताल में शुरू होने वाला 50 बिस्तरों वाला ट्रामा सेंटर कागजों में ही सिमट कर रह गया। सुश्रुत ट्रामा सेंटर में ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने से पांच मरीजों की मौत के बाद दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग की ओर से यह निर्णय लिया गया था।
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जनकपुरी और ताहिरपुर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल आज तक अपने पैर पर खड़ा नहीं हो सका। ओपीडी के अलावा कोई सेवा नहीं शुरू हो सकी है।

अधूरा रह गया लिवर ट्रांसप्लांट का सपना

पूरी तरह से क्रियाशील दिल्ली सरकार के एक मात्र सुपर स्पेशियलिटी जीबी पंत अस्पताल में लिवर ट्रांसप्लांट यूनिट की शुरुआत होनी थी।

यहां ऑपरेशन थियेटर बनकर तैयार है और विशेषज्ञ डॉक्टर भी मौजूद हैं, लेकिन व्यवस्था की कमी ने यूनिट के शुरू होने पर ब्रेक लगा रखा है। लोक नायक अस्पताल में भी किडनी ट्रांसप्लांट शुरू किया जाना था, लेकिन योजना अधर में लटकी है।

नहीं बढ़ सकी बिस्तरों की संख्या

अस्पतालों में तीन हजार बिस्तर बढ़ाने की योजना भी कागजों में ही रह गई। चालू वित्त वर्ष में दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग की ओर से आठ नए अस्पताल का निर्माण और कुछ पुराने अस्पतालों में विस्तार कर 3000 बिस्तर बढ़ाने की योजना थी।

लेकिन जमीनी स्तर पर महज बुराड़ी में ही 200 बिस्तरों वाले अस्पताल का निर्माण कार्य शुरू हो पाया है। कुछ अस्पतालों में बिस्तर भी बढ़े, लेकिन डब्ल्यूएचओ की मानक से काफी पीछे।

हड़ताल पर नहीं लग सका ब्रेक

इस वर्ष अस्पतालों में हड़ताल पर अंकुश नहीं लग सका।। सबसे बड़े लोक नायक अस्पताल में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से पांच दिनों तक चिकित्सा सेवा ठप रही।

वहीं अंबेडकर अस्पताल में छह दिनों तक हड़ताल रही। एक से दो दिनों तक कई अस्पतालों में चिकित्सा सेवा ठप रही। आज भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।

एम्स में भटक रहे मरीज

कई वर्षों से एम्स की सस्ती दवा दुकान पर एम्स-प्रशासन की तीखी नजर थी। दुकान पर कई तरह की अनियमितता बरतने का आरोप था।

नए निदेशक नियुक्त होने के बाद दुकान को बंद करने का फैसला किया गया। आज तक सरकारी दवा की दूसरी दुकान नहीं खुली है। सस्ती दवा के लिए एम्स में मरीज भटक रहे हैं।

इन फैसलों से मिली मरीजों को राहत

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग की ओर से सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों के लिए मुफ्त में डायलिसिस सुविधा की शुरुआत की गई। यह व्यवस्था पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर शुरू की गई।


सफदरजंग अस्पताल में इसी वर्ष से किडनी प्रत्यारोपण की शुरुआत हुई। एंबुलेंस के बेड़े में 50 नए कैट्स एंबुलेंस को शामिल किया गया। एंबुलेंस की कुल संख्या 151 तक पहुंच गई। 650 पब्लिक हेल्थ सेंटर और 32 बड़े अस्पतालों में शिशुओं के लिए मुफ्त पेंटावैलेंट वैक्सीन उपलब्ध कराई गई।

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